नीति आयोग का टीबी-मुक्त भारत पर मंथन: स्क्रीनिंग से AI तक सात क्षेत्रों में रणनीति तय
सारांश
मुख्य बातें
नीति आयोग ने 19 अगस्त 2026 को नई दिल्ली में 'टीबी: आगे का रास्ता' विषय पर एक उच्चस्तरीय विचार-मंथन सत्र आयोजित किया, जिसका केंद्रीय उद्देश्य टीबी-मुक्त भारत के लक्ष्य को निर्धारित समयसीमा में पूरा करने के लिए ठोस रणनीति और नीतिगत सुझाव तैयार करना था। इस सत्र में देशभर के स्वास्थ्य विशेषज्ञ, शोधकर्ता और नीति निर्माता एक मंच पर एकत्र हुए।
सत्र की अध्यक्षता और प्रमुख भागीदार
इस विचार-मंथन की संयुक्त अध्यक्षता नीति आयोग के सदस्य प्रो. एम. श्रीनिवास, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय की सचिव पुण्या सलिला श्रीवास्तव और स्वास्थ्य अनुसंधान विभाग के सचिव एवं भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (ICMR) के महानिदेशक डॉ. राजीव बहल ने की। एम्स नई दिल्ली की डॉ. उर्वशी बी. सिंह ने सत्र का समन्वय संभाला।
राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन की अतिरिक्त सचिव एवं प्रबंध निदेशक आराधना पटनायक ने राष्ट्रीय टीबी कार्यक्रम की वर्तमान स्थिति और अब तक की प्रगति का विस्तृत विवरण प्रस्तुत किया। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के केंद्रीय टीबी डिवीजन से प्राप्त आँकड़ों और जानकारियों ने चर्चा को दिशा प्रदान की।
सात प्रमुख क्षेत्रों पर गहन मंथन
सत्र में स्क्रीनिंग, डायग्नोस्टिक्स, इलाज, रोकथाम, पोषण, सामाजिक सुरक्षा और तकनीक — इन सात प्रमुख क्षेत्रों पर केंद्रित चर्चा हुई। विशेषज्ञों ने शुरुआती चरण में ही टीबी की पहचान सुनिश्चित करने के लिए स्क्रीनिंग प्रक्रिया को तेज करने और नए एवं अधिक सटीक डायग्नोस्टिक उपकरण अपनाने पर बल दिया। इलाज की प्रक्रिया को सरल और सुलभ बनाने को भी प्राथमिकता दी गई।
मरीजों को पोषण सहयोग उपलब्ध कराने, सामाजिक भेदभाव समाप्त करने और सरकारी योजनाओं का लाभ सीधे लाभार्थियों तक पहुँचाने पर भी विस्तृत विचार-विमर्श हुआ। गौरतलब है कि टीबी मरीज अक्सर कुपोषण और सामाजिक कलंक की दोहरी चुनौती का सामना करते हैं, जो उपचार की निरंतरता को प्रभावित करती है।
तकनीक और डिजिटल निगरानी की भूमिका
सत्र में डिजिटल निगरानी, डेटा एनालिटिक्स और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित उपकरणों के माध्यम से टीबी के मामलों को ट्रैक करने की संभावनाओं पर विशेष ध्यान दिया गया। विशेषज्ञों के अनुसार तकनीक की सहायता से मरीजों की दवा नियमितता और फॉलोअप प्रक्रिया को उल्लेखनीय रूप से बेहतर बनाया जा सकता है।
रोकथाम के मोर्चे पर जागरूकता अभियान चलाने, भीड़भाड़ वाले क्षेत्रों में नियमित जाँच और उच्च जोखिम वाले समूहों पर विशेष ध्यान केंद्रित करने की आवश्यकता रेखांकित की गई। यह ऐसे समय में महत्वपूर्ण है जब भारत वैश्विक स्तर पर टीबी के सर्वाधिक मामलों वाले देशों में शुमार है।
आगे की राह
नीति आयोग के इस विचार-मंथन सत्र में प्राप्त सुझावों को संकलित कर केंद्र और राज्य सरकारों के साथ साझा किया जाएगा, ताकि टीबी नियंत्रण नीतियों में आवश्यक सुधार किए जा सकें। इस पहल का दीर्घकालिक लक्ष्य राष्ट्रीय टीबी उन्मूलन कार्यक्रम को और अधिक प्रभावी बनाना है। विशेषज्ञों का मानना है कि बहु-आयामी दृष्टिकोण और केंद्र-राज्य समन्वय के बिना टीबी-मुक्त भारत का लक्ष्य कठिन बना रहेगा।