पालीताना अस्पताल घोटाला: ₹50.43 लाख का बिल, टंकी नदारद; गुजरात मंत्री प्रफुल पानशेरिया ने दो इंजीनियरों पर FIR के आदेश दिए
सारांश
मुख्य बातें
गुजरात के स्वास्थ्य मंत्री प्रफुल पानशेरिया ने 19 अगस्त 2026 को भावनगर जिले के पालीताना स्थित एक सरकारी अस्पताल में हुई कथित वित्तीय अनियमितता का भंडाफोड़ करते हुए दो वरिष्ठ अभियंताओं के विरुद्ध पुलिस शिकायत और अनुशासनात्मक कार्रवाई के आदेश दिए। मामला 2.55 लाख लीटर क्षमता की भूमिगत जल टंकी से जुड़ा है, जिसके लिए ₹50.43 लाख का बिल स्वीकृति हेतु प्रस्तुत किया गया, जबकि टंकी का निर्माण कभी हुआ ही नहीं।
मुख्य घटनाक्रम
मंत्री पानशेरिया ने हाल ही में पालीताना अस्पताल का औचक निरीक्षण किया, जिसके दौरान उन्होंने पाया कि निर्धारित स्थान पर अनुमोदित भूमिगत टंकी का कोई अस्तित्व नहीं था। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, बिल उच्च अधिकारियों को भेजे जाने के बावजूद टंकी निर्माण पर कोई कार्य नहीं किया गया। इस विसंगति के उजागर होने के बाद मंत्री ने तत्काल जाँच के निर्देश दिए।
जाँच और वीडियो कॉन्फ्रेंस
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए पानशेरिया ने पालीताना अस्पताल और प्रोजेक्ट इम्प्लीमेंटेशन यूनिट (PIU) के अधिकारियों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंस आयोजित की। इस समीक्षा बैठक में बिल प्रोसेस करने में शामिल व्यक्तियों की भूमिका की पड़ताल की गई। समीक्षा के बाद मंत्री ने इंचार्ज एग्जीक्यूटिव इंजीनियर मेहुल दवे और डिप्टी एग्जीक्यूटिव इंजीनियर एनवी कालिया के विरुद्ध पुलिस में शिकायत दर्ज कराने का आदेश दिया।
ठेकेदार पर कार्रवाई
मंत्री ने PIU को निर्देश दिया कि इस परियोजना में संलग्न सूरत की कंपनी धर्मनंदन कंस्ट्रक्शन को तत्काल प्रभाव से ब्लैकलिस्ट करने की प्रक्रिया शुरू की जाए। इसके अतिरिक्त, कथित लापरवाही के लिए दोनों अभियंताओं को उनके पदों से हटाने और नियमानुसार निलंबन तथा सेवा समाप्ति की कार्यवाही आरंभ करने के भी निर्देश दिए गए।
मंत्री की कड़ी चेतावनी
पानशेरिया ने स्पष्ट शब्दों में कहा, "राज्य की हेल्थकेयर सेवाओं के लिए दिए गए सरकारी फंड के इस्तेमाल में किसी भी तरह की लापरवाही, गड़बड़ी या अनियमितता बर्दाश्त नहीं की जाएगी।" उन्होंने सरकारी स्वास्थ्य अवसंरचना परियोजनाओं में गुणवत्ता, पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर बल दिया। यह ऐसे समय में आया है जब राज्य में सार्वजनिक स्वास्थ्य बुनियादी ढाँचे की गुणवत्ता पर पहले से ही सवाल उठते रहे हैं।
आगे क्या होगा
स्वास्थ्य विभाग ने कहा है कि वह ऐसी परियोजनाओं की नियमित निगरानी करेगा ताकि सरकारी धनराशि का जिम्मेदारीपूर्वक उपयोग हो और स्वीकृत कार्य निर्धारित मानकों के अनुसार पूर्ण हों। अधिकारियों के अनुसार, सरकारी कार्यों में लापरवाही या अनियमितता में संलिप्त पाए जाने वाले व्यक्तियों और एजेंसियों के विरुद्ध सख्त कदम उठाए जाएँगे। दोनों अभियंताओं के विरुद्ध पुलिस शिकायत और विभागीय कार्यवाही की प्रक्रिया जारी है।