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परिघासन: रीढ़ की लचक और फेफड़ों की ताकत बढ़ाने वाला 'गेट पोज', आयुष मंत्रालय ने बताए फायदे

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परिघासन: रीढ़ की लचक और फेफड़ों की ताकत बढ़ाने वाला 'गेट पोज', आयुष मंत्रालय ने बताए फायदे

सारांश

परिघासन सिर्फ एक स्ट्रेच नहीं — यह रीढ़, फेफड़े और पाचन तंत्र तीनों को एक साथ साधने वाला पार्श्व-झुकाव आसन है। आयुष मंत्रालय इसे संतुलन और लचीलेपन के लिए ज़रूरी मानता है। रोज़ सुबह खाली पेट 3 से 5 बार अभ्यास से दीर्घकालिक लाभ मिल सकते हैं।

मुख्य बातें

परिघासन एक पार्श्व-झुकाव वाला योगासन है जिसे ' गेट पोज़ ' भी कहते हैं — आयुष मंत्रालय ने इसे शरीर के संतुलन और लचीलेपन के लिए महत्वपूर्ण बताया है।
यह रीढ़ की हड्डी , पसलियों , कूल्हों , हैमस्ट्रिंग और पेल्विक मांसपेशियों को गहरा पार्श्व खिंचाव देता है।
छाती और पसलियों के बीच की मांसपेशियाँ खुलने से फेफड़ों की कार्यक्षमता बढ़ती है और गहरी साँस लेना आसान होता है।
यह कोलन को स्टिम्युलेट करता है और वात दोष को संतुलित करके कब्ज़ में राहत दिलाता है।
रोज़ सुबह खाली पेट 3 से 5 बार अभ्यास अनुशंसित; घुटने दर्द वाले पैडिंग का उपयोग करें; गर्भवती महिलाएँ इससे बचें।

परिघासन एक महत्वपूर्ण पार्श्व-झुकाव वाला योगासन है जो रीढ़ को लचीला बनाने, फेफड़ों की कार्यक्षमता बढ़ाने और कमर की जकड़न दूर करने में सहायक माना जाता है। आयुष मंत्रालय के अनुसार, यह आसन शरीर के संतुलन और लचीलेपन के लिए विशेष रूप से उपयोगी है। रोज़ाना योगाभ्यास करने वालों के लिए यह 'गेट पोज' एक अनिवार्य आसन बन सकता है।

परिघासन का अर्थ और स्वरूप

संस्कृत में 'परिघा' का अर्थ है द्वार को बंद करने वाली लोहे की छड़ या बीम, और 'आसन' का अर्थ है मुद्रा। इसी कारण इसे अंग्रेज़ी में 'गेट पोज़' भी कहा जाता है। यह आसन घुटनों के बल किया जाता है, जिसमें शरीर का आकार एक द्वार (गेट) के समान प्रतीत होता है — मज़बूत और स्थिर।

शरीर पर क्या होता है असर

आयुष मंत्रालय के अनुसार, परिघासन करते समय शरीर को साइड में स्ट्रेच करने से कमर की साइड की मांसपेशियों, हैमस्ट्रिंग, काफ मसल्स और पेल्विक क्षेत्र में गहरा खिंचाव आता है। रीढ़ की हड्डी, पसलियों और कूल्हों को मिलने वाला यह पार्श्व खिंचाव पीठ और कमर की अकड़न को धीरे-धीरे दूर करता है।

इसके साथ ही, छाती और पसलियों के बीच की मांसपेशियाँ खुलने से फेफड़ों की कार्यक्षमता बढ़ती है और गहरी साँस लेने की क्षमता बेहतर होती है। यह उन लोगों के लिए विशेष रूप से लाभकारी बताया जाता है जो दिनभर बैठकर काम करते हैं और जिनकी पसलियाँ संकुचित रहती हैं।

पाचन और आंत स्वास्थ्य में भूमिका

जब इस आसन में शरीर को साइड में स्ट्रेच किया जाता है, तो पेट के आंतरिक अंगों पर एक कोमल दबाव और खिंचाव आता है — जिसे योग परंपरा में 'अंतरिक मालिश' कहा जाता है। पेट के निचले हिस्से पर आने वाला यह दबाव कोलन को स्टिम्युलेट करता है, जिससे मल का संचलन सहज होता है।

आयुर्वेद के अनुसार, यह आसन वात दोष को संतुलित करता है, जो कब्ज़ का प्रमुख कारण माना जाता है। रोज़ सुबह खाली पेट 3 से 5 बार इसका अभ्यास करने से इन समस्याओं में क्रमिक राहत मिल सकती है।

किसे सावधानी बरतनी चाहिए

जिन लोगों के घुटनों में दर्द है या घुटने कमज़ोर हैं, उन्हें घुटने के नीचे मुड़ा हुआ कंबल या योगा मैट पैडिंग का उपयोग करना चाहिए। गंभीर घुटने के दर्द की स्थिति में इस आसन से बचने की सलाह दी जाती है।

गर्भवती महिलाओं को यह तीव्र पार्श्व खिंचाव वाला आसन करने की अनुशंसा नहीं की जाती। किसी भी नए योगाभ्यास को शुरू करने से पहले किसी प्रशिक्षित योग विशेषज्ञ या चिकित्सक की सलाह लेना उचित रहता है।

नियमित अभ्यास का महत्व

विशेषज्ञों का मानना है कि परिघासन केवल शारीरिक लाभ ही नहीं, बल्कि मन और शरीर के बीच तालमेल भी बेहतर करता है। गौरतलब है कि आयुष मंत्रालय ने इसे पार्श्व-झुकाव वाले योगासनों में से सबसे प्रभावशाली में गिना है। नियमित और सही विधि से किया गया यह अभ्यास समग्र स्वास्थ्य को दीर्घकालिक लाभ प्रदान कर सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन यह भी उतना ही ज़रूरी है कि इस तरह के दावों के साथ नैदानिक शोध का हवाला दिया जाए — खासकर फेफड़ों की कार्यक्षमता और पाचन सुधार जैसे दावों पर। योग के स्वास्थ्य लाभों पर प्रमाण-आधारित चर्चा अभी भी मुख्यधारा की मीडिया में उतनी गहराई से नहीं होती। आयुर्वेदिक अवधारणाएँ जैसे वात दोष और उनका आधुनिक पाचन विज्ञान से संबंध एक ऐसा क्षेत्र है जहाँ और शोध की आवश्यकता है। पाठकों को व्यक्तिगत स्वास्थ्य स्थिति के अनुसार योग विशेषज्ञ से परामर्श लेने की सलाह दी जानी चाहिए।
RashtraPress
19 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

परिघासन क्या है और इसे गेट पोज़ क्यों कहते हैं?
परिघासन एक घुटनों के बल किया जाने वाला पार्श्व-झुकाव वाला योगासन है जिसमें शरीर का आकार एक द्वार (गेट) जैसा बनता है। संस्कृत में 'परिघा' का अर्थ द्वार को बंद करने वाली लोहे की छड़ होता है, इसीलिए इसे 'गेट पोज़' कहा जाता है।
परिघासन के मुख्य स्वास्थ्य लाभ क्या हैं?
आयुष मंत्रालय के अनुसार, परिघासन रीढ़ को लचीला बनाता है, कमर की जकड़न दूर करता है और फेफड़ों की कार्यक्षमता बढ़ाता है। इसके अतिरिक्त यह कोलन को स्टिम्युलेट करके पाचन सुधारता है और वात दोष को संतुलित करके कब्ज़ में राहत देता है।
परिघासन का अभ्यास कब और कितनी बार करना चाहिए?
रोज़ सुबह खाली पेट 3 से 5 बार परिघासन का अभ्यास करने की सलाह दी जाती है। नियमित अभ्यास से रीढ़, पाचन और श्वसन संबंधी समस्याओं में क्रमिक सुधार देखा जाता है।
परिघासन किन लोगों को नहीं करना चाहिए?
घुटनों में गंभीर दर्द वाले लोगों को इस आसन से बचना चाहिए, हालाँकि हल्के दर्द में घुटने के नीचे पैडिंग का उपयोग किया जा सकता है। गर्भवती महिलाओं को यह तीव्र पार्श्व खिंचाव वाला आसन नहीं करने की सलाह दी जाती है।
परिघासन फेफड़ों को कैसे मज़बूत बनाता है?
जब इस आसन में शरीर को साइड में स्ट्रेच किया जाता है, तो छाती और पसलियों के बीच की मांसपेशियाँ खुलती हैं, जिससे फेफड़ों को अधिक फैलने का अवसर मिलता है। इससे गहरी साँस लेने की क्षमता बेहतर होती है और फेफड़ों की समग्र कार्यक्षमता में सुधार आता है।
राष्ट्र प्रेस
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