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हनुमानासन: पेल्विक मसल्स, जांघों और कूल्हों की जकड़न दूर करने वाला उन्नत योगासन

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हनुमानासन: पेल्विक मसल्स, जांघों और कूल्हों की जकड़न दूर करने वाला उन्नत योगासन

सारांश

घंटों डेस्क पर बैठने से जकड़ी मांसपेशियों का जवाब है हनुमानासन — हठयोग का वह उन्नत आसन जो पेल्विक मसल्स को ताकत देता है, जांघों-कूल्हों की जकड़न खोलता है और रक्त संचार सुधारता है। आयुष मंत्रालय भी इसे लचीलेपन और संतुलन के लिए खास बताता है।

मुख्य बातें

हनुमानासन हठयोग की उन्नत श्रेणी का आसन है, जो पेल्विक मसल्स, जांघों और कूल्हों की जकड़न दूर करता है।
आयुष मंत्रालय के अनुसार यह आसन शरीर का लचीलापन और संतुलन बढ़ाने में प्रभावी है।
नियमित अभ्यास से रक्त प्रवाह बेहतर होता है और नितंबों व जांघों की अतिरिक्त चर्बी घटती है।
आसन की अंतिम स्थिति में 10-15 सेकंड तक रुकना और नमस्कार मुद्रा में हाथ जोड़ना आवश्यक है।
जांघ या घुटने में चोट होने पर यह आसन न करें; शुरुआती लोग योगा ब्लॉक का सहारा लें।

हनुमानासन (Splits Pose) हठयोग की उन्नत श्रेणी का एक ऐसा आसन है जो पैरों, कूल्हों और जांघों की जकड़न को प्रभावी ढंग से दूर करता है और पेल्विक मसल्स को विशेष रूप से मजबूत बनाता है। आयुष मंत्रालय के अनुसार, यह आसन शरीर के लचीलेपन और संतुलन को बढ़ाने में सहायक है। दफ्तर में घंटों डेस्क पर बैठे रहने से कमर दर्द और कमज़ोर मांसपेशियों की समस्या से जूझ रहे लोगों के लिए यह आसन विशेष रूप से लाभकारी माना जाता है।

हनुमानासन का पौराणिक और ऐतिहासिक संदर्भ

मान्यता है कि इस आसन का नाम भगवान हनुमान की उस ऐतिहासिक छलांग से लिया गया है, जो उन्होंने सीता माता की खोज में लंका जाने के लिए लगाई थी। यह आसन उसी विशाल और शक्तिशाली छलांग की मुद्रा को प्रतिबिंबित करता है। हठयोग परंपरा में इसे उन्नत श्रेणी में रखा गया है, जो इसकी शारीरिक माँग और दीर्घकालिक लाभ दोनों को रेखांकित करता है।

हनुमानासन के प्रमुख स्वास्थ्य लाभ

आयुष मंत्रालय के अनुसार, इस आसन के नियमित अभ्यास से शरीर को कई स्तरों पर लाभ मिलता है। यह पेल्विक मसल्स को ताकत देता है और शरीर के निचले भाग में रक्त प्रवाह को बेहतर बनाता है — जो उन लोगों के लिए विशेष रूप से उपयोगी है जिनका रक्त संचार बाधित रहता है।

इसके अतिरिक्त, यह आसन पेट की मांसपेशियों को सुदृढ़ करता है और नितंबों तथा जांघों की अतिरिक्त चर्बी घटाने में सहायक है। मानसिक स्तर पर, नियमित अभ्यास से एकाग्रता और धैर्य में भी वृद्धि होती है।

हनुमानासन करने की सही विधि

इस आसन का अभ्यास निम्नलिखित चरणों में करें:

चरण 1: जमीन पर घुटनों के बल बैठ जाएं और रीढ़ की हड्डी सीधी रखें।
चरण 2: दाएं पैर को आगे की ओर सीधा बढ़ाएं और हाथों को जमीन पर टिकाकर सहारा लें।
चरण 3: धीरे-धीरे दाएं पैर को आगे और बाएं पैर को पीछे खिसकाएं। शरीर का वजन हाथों पर संतुलित रखें।
चरण 4: कूल्हों को धीरे-धीरे नीचे जमीन की ओर लाएं। दोनों पैर जमीन पर पूरी तरह सीधे और एक सीध में होने चाहिए।
चरण 5: संतुलन स्थापित हो जाने पर हथेलियों को छाती के सामने नमस्कार मुद्रा में जोड़ लें और 10-15 सेकंड तक इसी स्थिति में रहें।

किन्हें सावधानी बरतनी चाहिए

यह उन्नत आसन है, इसलिए कुछ स्थितियों में इसे करने से बचना चाहिए। जांघ या घुटने में चोट होने पर इसका अभ्यास न करें। पैरों को झटके के साथ या जबरदस्ती फैलाने से मांसपेशियों में खिंचाव आ सकता है। शुरुआती अभ्यासकर्ता योगा ब्लॉक या तकिए का सहारा लेकर इस आसन का अभ्यास करें।

किसके लिए है यह आसन सबसे उपयोगी

लंबे समय तक बैठकर काम करने वाले कार्यालय कर्मचारियों, खिलाड़ियों और उन लोगों के लिए यह आसन विशेष रूप से अनुशंसित है जो शरीर के निचले हिस्से में लचीलापन बढ़ाना चाहते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, नियमित और सही तकनीक से किया गया अभ्यास दीर्घकालिक शारीरिक और मानसिक लाभ देता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

यह ध्यान देने योग्य है कि 'उन्नत' श्रेणी के आसनों को बिना प्रशिक्षित मार्गदर्शन के अपनाने से चोट का जोखिम बढ़ता है — जो अक्सर मुख्यधारा की कवरेज में नज़रअंदाज़ हो जाता है। शुरुआती लोगों के लिए सहायक उपकरणों की सलाह सही दिशा में है, लेकिन किसी योग्य प्रशिक्षक की देखरेख की अनुशंसा और भी स्पष्ट होनी चाहिए।
RashtraPress
7 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

हनुमानासन क्या है और इसका नाम कैसे पड़ा?
हनुमानासन हठयोग का एक उन्नत आसन है जिसे 'स्प्लिट्स पोज' भी कहा जाता है। मान्यता है कि इसका नाम भगवान हनुमान की उस विशाल छलांग से लिया गया है जो उन्होंने सीता माता की खोज में लंका जाने के लिए लगाई थी।
हनुमानासन के मुख्य फायदे क्या हैं?
आयुष मंत्रालय के अनुसार, यह आसन पेल्विक मसल्स को मजबूत करता है, जांघों और कूल्हों की जकड़न दूर करता है, रक्त प्रवाह सुधारता है और पेट व नितंबों की अतिरिक्त चर्बी घटाने में सहायक है। नियमित अभ्यास से मानसिक एकाग्रता और धैर्य में भी वृद्धि होती है।
हनुमानासन करने की सही विधि क्या है?
घुटनों के बल बैठकर दाएं पैर को आगे और बाएं पैर को पीछे खिसकाएं, हाथों के सहारे कूल्हों को धीरे-धीरे जमीन की ओर लाएं। दोनों पैर एक सीध में सीधे होने चाहिए। संतुलन बनने पर हथेलियों को नमस्कार मुद्रा में जोड़ें और 10-15 सेकंड तक रुकें।
हनुमानासन किन्हें नहीं करना चाहिए?
जांघ या घुटने में चोट होने पर यह आसन बिल्कुल न करें। पैरों को झटके के साथ या जबरदस्ती फैलाने से मांसपेशियों में खिंचाव आ सकता है। शुरुआती अभ्यासकर्ताओं को योगा ब्लॉक या तकिए का सहारा लेकर धीरे-धीरे अभ्यास करना चाहिए।
क्या यह आसन ऑफिस में काम करने वाले लोगों के लिए उपयुक्त है?
हाँ, घंटों डेस्क पर बैठकर काम करने से कमर दर्द और कमज़ोर मांसपेशियों की समस्या होती है, जिसके लिए हनुमानासन विशेष रूप से लाभकारी माना जाता है। हालाँकि यह उन्नत श्रेणी का आसन है, इसलिए शुरुआत में किसी प्रशिक्षित योग विशेषज्ञ के मार्गदर्शन में अभ्यास करना उचित रहेगा।
राष्ट्र प्रेस
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