गर्भावस्था में उल्टी और मतली से निजात पाने के आयुर्वेदिक उपाय
सारांश
मुख्य बातें
नई दिल्ली, २५ मार्च (राष्ट्र प्रेस)। गर्भावस्था के प्रारंभिक चरणों में कई महिलाएं सुबह में उल्टी और मतली का अनुभव करती हैं, जिसे मॉर्निंग सिकनेस के नाम से जाना जाता है। यह अक्सर गर्भावस्था का पहला संकेत भी हो सकता है और लगभग ८० प्रतिशत महिलाएं इससे प्रभावित होती हैं। हालांकि, कुछ महिलाओं को यह समस्या सुबह, दोपहर या रात के किसी भी समय हो सकती है। हार्मोनल परिवर्तन, तनाव और थकान इस स्थिति के प्रमुख कारण माने जाते हैं।
इस परिस्थिति में मानसिक और भावनात्मक सहारा देना अत्यंत आवश्यक है। गर्भवती महिला को यह आश्वासन देना कि ये लक्षण धीरे-धीरे कम होंगे, उनके लिए सकारात्मक होता है। इसके साथ ही, उल्टी के ट्रिगर को पहचानना और उनसे बचना भी महत्वपूर्ण है। कुछ विशेष खाद्य पदार्थ, तीखे सुगंध वाले व्यंजन या भारी भोजन उल्टी को बढ़ा सकते हैं, इसलिए इन्हें टालना चाहिए। थकान भी मतली को बढ़ा सकती है, इसलिए पर्याप्त आराम करना बहुत ज़रूरी है।
घरेलू उपायों में सबसे सरल और प्रभावी विकल्पों में से एक है छोटे-छोटे हिस्सों में भोजन करना। दिन में ४-५ बार हल्का भोजन करें, जिससे पेट भरा रहे लेकिन भारी न लगे। ठंडी और हल्की चीजें जैसे बिस्किट, फलों का जूस या ठंडे स्नैक्स कई महिलाओं को राहत देते हैं। सुबह उठने से लगभग २० मिनट पहले साधारण बिस्किट खाने से भी मतली में कमी आती है। इसके अलावा, अदरक, नींबू और इलायची के साथ बनाई गई कैंडी या शर्बत, हल्का सूप या छाछ जैसे पेय पीने से भी राहत मिलती है।
कुछ आयुर्वेदिक उपाय भी बहुत लाभकारी हैं। अमलकी और किशमिश का पाउडर हल्के गर्म पानी या दूध के साथ लेने से उल्टी में कमी आती है। धनिया का पेस्ट चावल के पानी और थोड़े से शक्कर के साथ दिन में दो बार लेने से पेट हल्का रहता है और मतली में राहत मिलती है। हरे मूंग का सूप, बेल का गूदा और लाजामंड या आम और जामुन की पत्तियों का काढ़ा शहद के साथ लेना भी असरदार है।
इसके अलावा, गर्भावस्था के दौरान महिलाओं को ध्यान रखना चाहिए कि वे अधिक तीखा, नमकीन, तेलीय और भारी भोजन न करें। चाय और कॉफी विशेषकर खाली पेट नहीं पीनी चाहिए। उल्टी आने पर जल्दी से दवा लेने के बजाय सरल घरेलू उपाय अपनाएं।