गुरेज में गर्भवती महिला-शिशु की मौत: डॉक्टर पर कार्रवाई की सिफारिश, प्रशासन ने माना चूक
सारांश
मुख्य बातें
जम्मू-कश्मीर के बांदीपोरा जिले के सुदूर सीमावर्ती क्षेत्र गुरेज में एक गर्भवती महिला और उसके शिशु की मृत्यु के मामले में प्रारंभिक जांच के बाद संबंधित डॉक्टर के खिलाफ कार्रवाई की सिफारिश की गई है। बांदीपोरा की उपायुक्त इंदु कंवल ने गुरुवार, 15 अक्टूबर 2026 को यह जानकारी दी। तुलैल के मजगुंड गाँव की निवासी हसीन बेगम — जो शौकत हमीद लोन की पत्नी हैं — और उनके नवजात शिशु की मौत के बाद क्षेत्र में व्यापक आक्रोश देखा गया।
घटनाक्रम: कैसे हुई त्रासदी
हसीन बेगम को पहले स्थानीय स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया, जहाँ से उन्हें गुरेज उप-जिला अस्पताल रेफर किया गया। चिकित्सकों ने उनकी गंभीर स्थिति — जिसमें नाल का नीचे की ओर होना (प्लेसेंटा प्रेविया) और हीमोग्लोबिन स्तर मात्र 5 — को देखते हुए उन्हें बांदीपोरा जिला अस्पताल स्थानांतरित करने की सलाह दी। हालाँकि, रजदान दर्रे के आसपास हुई भारी हिमपात और प्रतिकूल मौसम ने समय पर रेफरल को असंभव बना दिया। प्रशासन को मिली चिकित्सा जानकारी के अनुसार, जब महिला को इलाज के लिए लाया गया, तब तक गर्भ में ही शिशु की मृत्यु हो चुकी थी।
प्रशासन की प्रतिक्रिया
उपायुक्त इंदु कंवल ने बताया कि मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) और उप-मंडल मजिस्ट्रेट (एसडीएम) की रिपोर्टें प्राप्त होने के बाद संबंधित डॉक्टर के खिलाफ कार्रवाई का प्रस्ताव स्वास्थ्य सेवा निदेशक को सौंप दिया गया है। उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि महिला और संबंधित डॉक्टरों के बीच विवाद भी हुआ था। मुख्यमंत्री कार्यालय की रिपोर्ट भी स्वास्थ्य सेवा निदेशक को भेजी गई है, क्योंकि आगे की कार्रवाई उसी स्तर पर होनी है।
स्थानीय आक्रोश और विरोध
इस दर्दनाक मामले के बाद गुरेज के मुख्य शहर दावर में बुधवार को बाज़ार बंद रहे और निवासियों ने सड़कों पर उतरकर विरोध प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों का आरोप था कि रजदान दर्रे पर भारी हिमपात के कारण गंभीर रूप से बीमार महिला को समय पर बांदीपोरा अस्पताल नहीं पहुँचाया जा सका, जिससे यह त्रासदी हुई। शोकाकुल परिवार को रेड क्रॉस के माध्यम से वित्तीय सहायता प्रदान की गई है, हालाँकि उपायुक्त ने खुद स्वीकार किया कि कोई भी मुआवज़ा माँ और बच्चे की जान की भरपाई नहीं कर सकता।
सीमावर्ती क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवा की चुनौती
गौरतलब है कि बांदीपोरा, कुपवारा और बारामूला जिलों के कई सीमावर्ती इलाकों में सर्दियों के दौरान भारी बर्फबारी से सड़कें बंद हो जाती हैं, जिससे आपात चिकित्सा सेवाएँ पहुँचाना अत्यंत कठिन हो जाता है। यह पहली बार नहीं है जब इस क्षेत्र में मौसम की वजह से किसी गंभीर मरीज को समय पर इलाज नहीं मिल पाया हो। विशेषज्ञ लंबे समय से इन क्षेत्रों में हेलीकॉप्टर एम्बुलेंस और उन्नत स्वास्थ्य केंद्रों की माँग करते रहे हैं।
आगे के निवारक उपाय
उपायुक्त कंवल ने बताया कि आगामी सर्दियों के लिए प्रशासन ने यह सुनिश्चित करने की व्यवस्था की है कि उच्च जोखिम वाली गर्भवती महिलाओं को प्रसव से पहले ही जिला अस्पताल में स्थानांतरित किया जाए, ताकि ऐसी किसी और त्रासदी से बचा जा सके। हालाँकि, आलोचकों का कहना है कि हर बार ऐसी घटना के बाद आश्वासन दिए जाते हैं, लेकिन ज़मीनी स्तर पर बदलाव बेहद धीमा रहा है। अब देखना यह होगा कि स्वास्थ्य सेवा निदेशक संबंधित डॉक्टर के खिलाफ क्या और कब तक कार्रवाई करते हैं।