16 अक्टूबर 2026
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गुरेज में गर्भवती महिला-शिशु की मौत: डॉक्टर पर कार्रवाई की सिफारिश, प्रशासन ने माना चूक

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गुरेज में गर्भवती महिला-शिशु की मौत: डॉक्टर पर कार्रवाई की सिफारिश, प्रशासन ने माना चूक

सारांश

गुरेज के सुदूर सीमावर्ती गाँव में एक गर्भवती महिला और उसके शिशु की मौत — रजदान दर्रे पर बर्फबारी, कम हीमोग्लोबिन और कथित चिकित्सकीय लापरवाही का घातक संयोग। प्रशासन ने डॉक्टर पर कार्रवाई की सिफारिश की, लेकिन सवाल यह है कि सर्दियों से पहले ये आश्वासन कितने टिकाऊ हैं।

मुख्य बातें

हसीन बेगम (मजगुंड गाँव, तुलैल) और उनके शिशु की मौत के बाद बांदीपोरा उपायुक्त इंदु कंवल ने 15 अक्टूबर 2026 को जाँच रिपोर्ट सार्वजनिक की।
संबंधित डॉक्टर के खिलाफ कार्रवाई का प्रस्ताव स्वास्थ्य सेवा निदेशक को सौंपा गया; मुख्यमंत्री कार्यालय की रिपोर्ट भी भेजी गई।
महिला की नाल नीचे की ओर थी और हीमोग्लोबिन स्तर केवल 5 था — उच्च जोखिम वाली गर्भावस्था के रूप में वर्गीकृत।
रजदान दर्रे पर भारी हिमपात के कारण बांदीपोरा जिला अस्पताल तक रेफरल में देरी हुई।
गुरेज के दावर में बाज़ार बंद रहे; निवासियों ने विरोध प्रदर्शन किया।
परिवार को रेड क्रॉस के माध्यम से सहायता; प्रशासन ने आगामी सर्दियों में उच्च जोखिम गर्भवती महिलाओं के समय पर रेफरल की व्यवस्था का आश्वासन दिया।

जम्मू-कश्मीर के बांदीपोरा जिले के सुदूर सीमावर्ती क्षेत्र गुरेज में एक गर्भवती महिला और उसके शिशु की मृत्यु के मामले में प्रारंभिक जांच के बाद संबंधित डॉक्टर के खिलाफ कार्रवाई की सिफारिश की गई है। बांदीपोरा की उपायुक्त इंदु कंवल ने गुरुवार, 15 अक्टूबर 2026 को यह जानकारी दी। तुलैल के मजगुंड गाँव की निवासी हसीन बेगम — जो शौकत हमीद लोन की पत्नी हैं — और उनके नवजात शिशु की मौत के बाद क्षेत्र में व्यापक आक्रोश देखा गया।

घटनाक्रम: कैसे हुई त्रासदी

हसीन बेगम को पहले स्थानीय स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया, जहाँ से उन्हें गुरेज उप-जिला अस्पताल रेफर किया गया। चिकित्सकों ने उनकी गंभीर स्थिति — जिसमें नाल का नीचे की ओर होना (प्लेसेंटा प्रेविया) और हीमोग्लोबिन स्तर मात्र 5 — को देखते हुए उन्हें बांदीपोरा जिला अस्पताल स्थानांतरित करने की सलाह दी। हालाँकि, रजदान दर्रे के आसपास हुई भारी हिमपात और प्रतिकूल मौसम ने समय पर रेफरल को असंभव बना दिया। प्रशासन को मिली चिकित्सा जानकारी के अनुसार, जब महिला को इलाज के लिए लाया गया, तब तक गर्भ में ही शिशु की मृत्यु हो चुकी थी।

प्रशासन की प्रतिक्रिया

उपायुक्त इंदु कंवल ने बताया कि मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) और उप-मंडल मजिस्ट्रेट (एसडीएम) की रिपोर्टें प्राप्त होने के बाद संबंधित डॉक्टर के खिलाफ कार्रवाई का प्रस्ताव स्वास्थ्य सेवा निदेशक को सौंप दिया गया है। उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि महिला और संबंधित डॉक्टरों के बीच विवाद भी हुआ था। मुख्यमंत्री कार्यालय की रिपोर्ट भी स्वास्थ्य सेवा निदेशक को भेजी गई है, क्योंकि आगे की कार्रवाई उसी स्तर पर होनी है।

स्थानीय आक्रोश और विरोध

इस दर्दनाक मामले के बाद गुरेज के मुख्य शहर दावर में बुधवार को बाज़ार बंद रहे और निवासियों ने सड़कों पर उतरकर विरोध प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों का आरोप था कि रजदान दर्रे पर भारी हिमपात के कारण गंभीर रूप से बीमार महिला को समय पर बांदीपोरा अस्पताल नहीं पहुँचाया जा सका, जिससे यह त्रासदी हुई। शोकाकुल परिवार को रेड क्रॉस के माध्यम से वित्तीय सहायता प्रदान की गई है, हालाँकि उपायुक्त ने खुद स्वीकार किया कि कोई भी मुआवज़ा माँ और बच्चे की जान की भरपाई नहीं कर सकता।

सीमावर्ती क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवा की चुनौती

गौरतलब है कि बांदीपोरा, कुपवारा और बारामूला जिलों के कई सीमावर्ती इलाकों में सर्दियों के दौरान भारी बर्फबारी से सड़कें बंद हो जाती हैं, जिससे आपात चिकित्सा सेवाएँ पहुँचाना अत्यंत कठिन हो जाता है। यह पहली बार नहीं है जब इस क्षेत्र में मौसम की वजह से किसी गंभीर मरीज को समय पर इलाज नहीं मिल पाया हो। विशेषज्ञ लंबे समय से इन क्षेत्रों में हेलीकॉप्टर एम्बुलेंस और उन्नत स्वास्थ्य केंद्रों की माँग करते रहे हैं।

आगे के निवारक उपाय

उपायुक्त कंवल ने बताया कि आगामी सर्दियों के लिए प्रशासन ने यह सुनिश्चित करने की व्यवस्था की है कि उच्च जोखिम वाली गर्भवती महिलाओं को प्रसव से पहले ही जिला अस्पताल में स्थानांतरित किया जाए, ताकि ऐसी किसी और त्रासदी से बचा जा सके। हालाँकि, आलोचकों का कहना है कि हर बार ऐसी घटना के बाद आश्वासन दिए जाते हैं, लेकिन ज़मीनी स्तर पर बदलाव बेहद धीमा रहा है। अब देखना यह होगा कि स्वास्थ्य सेवा निदेशक संबंधित डॉक्टर के खिलाफ क्या और कब तक कार्रवाई करते हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि जम्मू-कश्मीर के सीमावर्ती क्षेत्रों में दशकों से चली आ रही स्वास्थ्य बुनियादी ढाँचे की विफलता की एक और कड़ी है। हर सर्दी से पहले 'निवारक उपायों' के आश्वासन दिए जाते हैं, फिर भी रजदान जैसे दर्रे बंद होते ही मरीज़ व्यवस्था की दरारों में खो जाते हैं। डॉक्टर पर सिफारिश ज़रूरी है, लेकिन असली जवाबदेही उस नीति-निर्माण से माँगी जानी चाहिए जो दशकों से इन क्षेत्रों में हेलीकॉप्टर एम्बुलेंस और टेलीमेडिसिन को प्राथमिकता देने में विफल रही है। एक डॉक्टर का तबादला समस्या का समाधान नहीं — ढाँचागत बदलाव के बिना अगली सर्दी में यही त्रासदी दोहराई जाएगी।
RashtraPress
16 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

गुरेज में गर्भवती महिला और शिशु की मौत कैसे हुई?
तुलैल के मजगुंड गाँव की निवासी हसीन बेगम को उच्च जोखिम वाली गर्भावस्था (नाल नीचे की ओर, हीमोग्लोबिन स्तर 5) के कारण बांदीपोरा जिला अस्पताल रेफर किया जाना था, लेकिन रजदान दर्रे पर भारी हिमपात के चलते समय पर स्थानांतरण संभव नहीं हो पाया। प्रशासनिक जानकारी के अनुसार, जब महिला को इलाज के लिए लाया गया तब तक गर्भ में शिशु की मृत्यु हो चुकी थी।
डॉक्टर के खिलाफ क्या कार्रवाई की सिफारिश की गई है?
बांदीपोरा उपायुक्त इंदु कंवल ने बताया कि सीएमओ और एसडीएम की रिपोर्टों के आधार पर संबंधित डॉक्टर के खिलाफ कार्रवाई का प्रस्ताव स्वास्थ्य सेवा निदेशक को सौंपा गया है। मुख्यमंत्री कार्यालय की रिपोर्ट भी उन्हें भेजी गई है और आगे की कार्रवाई उसी स्तर पर होनी है।
गुरेज के निवासियों ने विरोध प्रदर्शन क्यों किया?
मुख्य शहर दावर में बुधवार को बाज़ार बंद रहे और नागरिक सड़कों पर उतरे, क्योंकि उनका आरोप था कि रजदान दर्रे पर बर्फबारी की वजह से गंभीर रूप से बीमार हसीन बेगम को समय पर बांदीपोरा अस्पताल नहीं पहुँचाया गया। उनकी माँग है कि ऐसी स्थितियों में चिकित्सा सेवाओं के लिए ठोस वैकल्पिक व्यवस्था हो।
सर्दियों में सीमावर्ती क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवा की क्या चुनौतियाँ हैं?
बांदीपोरा, कुपवारा और बारामूला के कई सीमावर्ती क्षेत्रों में भारी हिमपात से सड़कें बंद हो जाती हैं, जिससे गंभीर मरीज़ों को जिला अस्पताल तक पहुँचाना बेहद कठिन हो जाता है। यह समस्या हर साल दोहराई जाती है और हेलीकॉप्टर एम्बुलेंस व टेलीमेडिसिन सुविधाओं की कमी इसे और गंभीर बना देती है।
प्रशासन ने भविष्य में ऐसी घटनाओं से बचाव के लिए क्या कदम उठाए हैं?
उपायुक्त इंदु कंवल के अनुसार, आगामी सर्दियों के लिए उच्च जोखिम वाली गर्भवती महिलाओं को प्रसव से पहले ही जिला अस्पताल स्थानांतरित करने की विशेष व्यवस्था की जाएगी। शोकाकुल परिवार को रेड क्रॉस के माध्यम से वित्तीय सहायता भी प्रदान की गई है।
राष्ट्र प्रेस
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