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वृश्चिकासन: रीढ़ की हड्डी, पाचन और मानसिक संतुलन के लिए आयुष-अनुमोदित उन्नत योगासन

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वृश्चिकासन: रीढ़ की हड्डी, पाचन और मानसिक संतुलन के लिए आयुष-अनुमोदित उन्नत योगासन

सारांश

वृश्चिकासन महज़ एक कठिन मुद्रा नहीं — यह रीढ़, पाचन और मन तीनों को एक साथ साधने का उन्नत योग विज्ञान है। आयुष मंत्रालय द्वारा मान्यता प्राप्त इस आसन को सही मार्गदर्शन में अपनाने से शरीर में शक्ति और मानसिक संतुलन दोनों मिलते हैं।

मुख्य बातें

वृश्चिकासन को भारत सरकार के आयुष मंत्रालय ने उन्नत स्तर के योग आसनों में वर्गीकृत किया है।
यह आसन रीढ़ की हड्डी का लचीलापन बढ़ाता है और कमर दर्द में राहत दिला सकता है।
पेट की मांसपेशियों पर खिंचाव से पाचन तंत्र बेहतर होता है और शरीर में ऊर्जा का संचार बढ़ता है।
इसे केवल पिंचा मयूरासन में दक्षता प्राप्त करने के बाद ही करें; शुरुआती अभ्यासकर्ता दीवार के सहारे और योग शिक्षक की देखरेख में अभ्यास करें।
उच्च रक्तचाप , हृदय रोग , गर्दन या पीठ की गंभीर चोट की स्थिति में यह आसन वर्जित है।

वृश्चिकासन — जिसे अंग्रेज़ी में स्कॉर्पियन पोज कहते हैं — योग की उन्नत श्रेणी का एक शक्तिशाली इनवर्टेड बैकबेंड आसन है, जिसे भारत सरकार के आयुष मंत्रालय ने उन्नत स्तर के आसनों में स्थान दिया है। नई दिल्ली स्थित योग विशेषज्ञों के अनुसार, इस आसन के नियमित अभ्यास से रीढ़ की हड्डी का लचीलापन, पाचन तंत्र की कार्यक्षमता और मानसिक एकाग्रता में उल्लेखनीय सुधार हो सकता है। यह आसन शरीर, मन और आत्मा के बीच गहरा संतुलन स्थापित करने की दिशा में एक प्रभावी कदम माना जाता है।

वृश्चिकासन क्या है और इसका नाम कैसे पड़ा

इस आसन का नाम संस्कृत शब्द 'वृश्चिक' यानी बिच्छू से लिया गया है। अभ्यास के दौरान शरीर की आकृति ठीक उसी प्रकार बनती है जैसे एक बिच्छू अपना डंक ऊपर उठाए खड़ा होता है। इस आसन में कोहनियों पर संतुलन बनाते हुए पैरों को सिर की दिशा में मोड़ा जाता है, जिससे पूरी पीठ एक गहरे चाप में आ जाती है।

आयुष मंत्रालय के वर्गीकरण के अनुसार, यह आसन शक्ति, संतुलन और लचीलेपन का असाधारण संयोजन प्रस्तुत करता है। विशेषज्ञों का कहना है कि इसे केवल तभी आज़माना चाहिए जब साधक पिंचा मयूरासन में पर्याप्त दक्षता प्राप्त कर चुका हो।

शरीर पर प्रभाव और स्वास्थ्य लाभ

योग विशेषज्ञों के अनुसार, वृश्चिकासन के नियमित अभ्यास से कंधे, बाज़ू, पीठ और कोर मांसपेशियाँ मजबूत होती हैं। रीढ़ की हड्डी में लचीलापन आने से कमर दर्द और पीठ से जुड़ी समस्याओं में राहत मिलती है।

इसके अतिरिक्त, यह आसन पेट की मांसपेशियों पर खिंचाव डालता है, जिससे पाचन तंत्र बेहतर ढंग से काम करता है और शरीर में ऊर्जा का प्रवाह सुचारू होता है। विशेषज्ञों का यह भी कहना है कि इस आसन के अभ्यास से एकाग्रता और आत्मविश्वास में भी वृद्धि होती है।

सावधानियाँ और किन्हें बचना चाहिए

यह एक अत्यंत कठिन आसन है, इसलिए इसे बिना तैयारी के आज़माना उचित नहीं है। शुरुआती अभ्यासकर्ताओं को सलाह दी जाती है कि वे दीवार के सहारे अभ्यास करें और यदि संभव हो तो किसी प्रशिक्षित योग शिक्षक की देखरेख में ही इसे करें।

निम्नलिखित स्थितियों में इस आसन से बचना चाहिए:

उच्च रक्तचाप, हृदय रोग, चक्कर आने की समस्या अथवा गर्दन या पीठ में गंभीर चोट होने पर वृश्चिकासन का अभ्यास वर्जित है। किसी भी स्वास्थ्य समस्या की स्थिति में चिकित्सक से परामर्श लेना आवश्यक है।

अभ्यास के लिए सही दृष्टिकोण

योग विशेषज्ञ इस बात पर जोर देते हैं कि वृश्चिकासन को उचित मार्गदर्शन और क्रमिक अभ्यास के साथ ही सीखा जाना चाहिए। पहले पिंचा मयूरासन में निपुणता हासिल करें, उसके बाद ही इस आसन की ओर बढ़ें। नियमित और सही अभ्यास से मांसपेशियों की मजबूती के साथ-साथ मानसिक दृढ़ता भी विकसित होती है।

योग केवल शारीरिक व्यायाम नहीं, बल्कि जीवन जीने की एक समग्र कला है — और वृश्चिकासन इस कला की उन्नत अभिव्यक्ति है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन उन्नत आसनों को लेकर जागरूकता अभी भी सीमित है। आयुष मंत्रालय का वर्गीकरण महत्वपूर्ण है, पर यह भी ध्यान देने योग्य है कि बिना प्रशिक्षित मार्गदर्शन के उन्नत आसनों के अभ्यास से चोट के मामले बढ़ रहे हैं। मुख्यधारा की कवरेज अक्सर लाभों को उजागर करती है, लेकिन जोखिम और पूर्व-शर्तों — जैसे पिंचा मयूरासन में दक्षता — को वह गंभीरता नहीं मिलती जो मिलनी चाहिए।
RashtraPress
3 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

वृश्चिकासन क्या है और इसे स्कॉर्पियन पोज क्यों कहते हैं?
वृश्चिकासन एक उन्नत इनवर्टेड बैकबेंड योगासन है जिसमें कोहनियों पर संतुलन बनाते हुए पैरों को सिर की दिशा में मोड़ा जाता है। इस अवस्था में शरीर की आकृति डंक उठाए हुए बिच्छू जैसी बनती है, इसीलिए इसे स्कॉर्पियन पोज कहते हैं।
वृश्चिकासन से रीढ़ की हड्डी और पाचन को कैसे फायदा होता है?
विशेषज्ञों के अनुसार, इस आसन से रीढ़ की हड्डी में लचीलापन आता है जिससे कमर दर्द और पीठ की समस्याओं में राहत मिलती है। साथ ही, पेट की मांसपेशियों पर पड़ने वाले खिंचाव से पाचन तंत्र की कार्यक्षमता बेहतर होती है।
वृश्चिकासन करने से पहले कौन-सा आसन सीखना ज़रूरी है?
विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि वृश्चिकासन का प्रयास तभी करें जब आप पिंचा मयूरासन में पर्याप्त दक्षता हासिल कर चुके हों। शुरुआती अभ्यासकर्ताओं को दीवार के सहारे और किसी प्रशिक्षित योग शिक्षक की देखरेख में अभ्यास करना चाहिए।
किन लोगों को वृश्चिकासन नहीं करना चाहिए?
उच्च रक्तचाप, हृदय रोग, चक्कर आने की समस्या, या गर्दन व पीठ में गंभीर चोट होने पर यह आसन वर्जित है। किसी भी स्वास्थ्य समस्या की स्थिति में इसे आज़माने से पहले चिकित्सक से परामर्श अवश्य लें।
आयुष मंत्रालय ने वृश्चिकासन को किस श्रेणी में रखा है?
भारत सरकार के आयुष मंत्रालय ने वृश्चिकासन को उन्नत स्तर के योग आसनों में वर्गीकृत किया है। मंत्रालय के अनुसार, इसके नियमित अभ्यास से शरीर में शक्ति, संतुलन और लचीलेपन का असाधारण संयोजन प्राप्त होता है।
राष्ट्र प्रेस
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