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स्ट्रोक के शुरुआती संकेत: सिरदर्द, चक्कर और कमजोरी को न करें नजरअंदाज, WHO की चेतावनी

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स्ट्रोक के शुरुआती संकेत: सिरदर्द, चक्कर और कमजोरी को न करें नजरअंदाज, WHO की चेतावनी

सारांश

सिरदर्द, चक्कर और शरीर के एक तरफ कमजोरी — ये लक्षण थकान नहीं, स्ट्रोक की चेतावनी हो सकते हैं। WHO के अनुसार 2022 में 1.98 करोड़ लोगों की हृदय रोगों से मौत हुई, जिनमें 85% हार्ट अटैक व स्ट्रोक से थीं। समय पर पहचान जीवन बचा सकती है।

मुख्य बातें

WHO के अनुसार वर्ष 2022 में 1.98 करोड़ लोगों की मौत हृदय संबंधी बीमारियों से हुई, जिनमें 85% मौतें हार्ट अटैक और स्ट्रोक से थीं।
स्ट्रोक तब होता है जब मस्तिष्क में रक्त आपूर्ति बाधित हो जाती है या रक्त वाहिका फट जाती है, जिससे मस्तिष्क कोशिकाएँ क्षतिग्रस्त होती हैं।
प्रमुख लक्षणों में शरीर के एक तरफ कमजोरी , बोलने में कठिनाई , धुंधला दिखना , अचानक तेज़ सिरदर्द और संतुलन बिगड़ना शामिल हैं।
ट्रांजिएंट इस्केमिक अटैक (TIA) यानी मिनी स्ट्रोक के लक्षण अपने आप ठीक हो जाते हैं, लेकिन यह बड़े स्ट्रोक की गंभीर चेतावनी होती है।
हाई ब्लड प्रेशर , डायबिटीज , मोटापा , तंबाकू और शराब स्ट्रोक के प्रमुख जोखिम कारक हैं।
लक्षण दिखने पर तुरंत एंबुलेंस बुलाएँ , लक्षणों का समय नोट करें और बिना डॉक्टर की सलाह के दवा न दें ।

स्ट्रोक — जिसे ब्रेन अटैक भी कहा जाता है — एक गंभीर चिकित्सा आपात स्थिति है, और विशेषज्ञों के अनुसार इसके शुरुआती लक्षणों को अक्सर साधारण थकान या कमजोरी समझकर अनदेखा कर दिया जाता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के आँकड़ों के अनुसार, वर्ष 2022 में दुनियाभर में 1.98 करोड़ से अधिक लोगों की मौत हृदय संबंधी बीमारियों के कारण हुई, जिनमें लगभग 85 प्रतिशत मौतें हार्ट अटैक और स्ट्रोक की वजह से थीं। यह ऐसे समय में और भी चिंताजनक है, जब आधुनिक जीवनशैली से जुड़े जोखिम कारक तेज़ी से बढ़ रहे हैं।

स्ट्रोक क्या होता है और यह कैसे होता है

स्ट्रोक तब होता है जब मस्तिष्क के किसी हिस्से में रक्त आपूर्ति बाधित हो जाती है या मस्तिष्क की कोई रक्त वाहिका फट जाती है। इस स्थिति में मस्तिष्क की कोशिकाओं को पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं मिल पाती और वे तेज़ी से क्षतिग्रस्त होने लगती हैं। WHO के अनुसार, हृदय संबंधी बीमारियाँ दुनियाभर में मृत्यु का सबसे बड़ा कारण हैं, और स्ट्रोक इनमें प्रमुख भूमिका निभाता है।

स्ट्रोक के मुख्य शुरुआती लक्षण

चिकित्सकों के अनुसार, स्ट्रोक का सबसे सामान्य और पहचानने योग्य संकेत है — चेहरे, हाथ या पैर में अचानक कमजोरी आना, विशेषकर शरीर के एक तरफ। कई बार चेहरा एक तरफ झुकने लगता है या मुस्कुराने पर चेहरे के दोनों हिस्से सामान्य रूप से काम नहीं करते।

इसके अतिरिक्त, अचानक बोलने में कठिनाई, जुबान लड़खड़ाना, या सामने वाले की बात समझने में दिक्कत होना भी स्ट्रोक के चेतावनी संकेत हो सकते हैं। एक या दोनों आँखों से अचानक धुंधला दिखना, चलने में परेशानी या शरीर का संतुलन बिगड़ना भी इन संकेतों में शामिल हैं — इन्हें साधारण थकान मानकर टालना खतरनाक हो सकता है।

मिनी स्ट्रोक: खतरे की बड़ी चेतावनी

कुछ मामलों में बिना किसी स्पष्ट कारण के अचानक बहुत तेज़ सिरदर्द होना भी स्ट्रोक का संकेत हो सकता है। इसके साथ उल्टी, बेहोशी या शरीर के किसी हिस्से में सुन्नपन महसूस हो सकता है। गौरतलब है कि कई बार ये लक्षण कुछ ही मिनटों में अपने आप ठीक भी हो जाते हैं।

हालाँकि, चिकित्सकों का कहना है कि लक्षण अपने आप ठीक हो जाने का अर्थ यह कदापि नहीं कि खतरा टल गया। यह स्थिति ट्रांजिएंट इस्केमिक अटैक (TIA) यानी मिनी स्ट्रोक हो सकती है, जो भविष्य में बड़े स्ट्रोक की गंभीर चेतावनी है।

स्ट्रोक का खतरा किन कारणों से बढ़ता है

स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, अस्वस्थ खानपान, शारीरिक निष्क्रियता, तंबाकू का सेवन, अत्यधिक शराब और मोटापा स्ट्रोक के प्रमुख जोखिम कारक हैं। इसके अलावा उच्च रक्तचाप (हाई ब्लड प्रेशर), डायबिटीज और बढ़ा हुआ कोलेस्ट्रॉल रक्त वाहिकाओं को नुकसान पहुँचाकर स्ट्रोक की आशंका को और बढ़ा देते हैं।

इसीलिए विशेषज्ञ नियमित स्वास्थ्य जाँच और जीवनशैली में सुधार को अनिवार्य मानते हैं, विशेषकर ऐसे लोगों के लिए जिनके परिवार में हृदय रोग का इतिहास रहा हो।

स्ट्रोक में तुरंत क्या करें

WHO का स्पष्ट निर्देश है कि यदि किसी व्यक्ति में स्ट्रोक के लक्षण दिखाई दें, तो बिना देर किए उसे अस्पताल की इमरजेंसी में पहुँचाएँ या एंबुलेंस बुलाएँ। लक्षण शुरू होने का समय नोट करना भी ज़रूरी है, क्योंकि उपचार के दौरान यह जानकारी डॉक्टरों के लिए बेहद उपयोगी होती है। डॉक्टर की सलाह के बिना कोई दवा न दें।

स्ट्रोक के मामले में हर मिनट महत्त्वपूर्ण है — जितनी जल्दी उपचार मिले, उतनी अधिक संभावना है कि मस्तिष्क की क्षति को सीमित किया जा सके और जीवन बचाया जा सके।

संपादकीय दृष्टिकोण

जबकि चिकित्सा विज्ञान यह स्थापित कर चुका है कि लक्षण शुरू होने के पहले साढ़े चार घंटे के भीतर उपचार मिलने पर क्षति काफी हद तक रोकी जा सकती है। WHO के आँकड़े बताते हैं कि 85% हृदय मौतें रोकी जा सकती थीं यदि जोखिम कारकों पर समय रहते ध्यान दिया जाता। असली सवाल यह है कि भारत में सार्वजनिक स्वास्थ्य अभियान हृदय रोग की तुलना में स्ट्रोक को कहीं कम प्राथमिकता देते हैं, जबकि बोझ लगभग बराबर है। मिनी स्ट्रोक (TIA) को गंभीरता से न लेने की सांस्कृतिक प्रवृत्ति इस खाई को और चौड़ा करती है।
RashtraPress
4 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

स्ट्रोक क्या होता है और यह क्यों खतरनाक है?
स्ट्रोक एक गंभीर चिकित्सा आपात स्थिति है, जिसमें मस्तिष्क के किसी हिस्से में रक्त आपूर्ति बाधित हो जाती है या रक्त वाहिका फट जाती है, जिससे मस्तिष्क की कोशिकाएँ ऑक्सीजन के अभाव में क्षतिग्रस्त होने लगती हैं। समय पर इलाज न मिलने पर व्यक्ति की जान जा सकती है या स्थायी विकलांगता हो सकती है।
स्ट्रोक के शुरुआती लक्षण कौन से हैं?
स्ट्रोक के प्रमुख शुरुआती लक्षणों में शरीर के एक तरफ (चेहरे, हाथ या पैर में) अचानक कमजोरी, बोलने में कठिनाई या जुबान लड़खड़ाना, एक या दोनों आँखों से धुंधला दिखना, अचानक बहुत तेज़ सिरदर्द और संतुलन बिगड़ना शामिल हैं। इनमें से कोई भी लक्षण दिखे तो तुरंत चिकित्सा सहायता लें।
मिनी स्ट्रोक (TIA) क्या है और क्या यह खतरनाक है?
ट्रांजिएंट इस्केमिक अटैक (TIA) को मिनी स्ट्रोक कहते हैं, जिसमें स्ट्रोक जैसे लक्षण कुछ मिनटों में अपने आप ठीक हो जाते हैं। हालाँकि लक्षण ठीक हो जाने का अर्थ खतरा टलना नहीं है — TIA भविष्य में बड़े स्ट्रोक की गंभीर चेतावनी होती है और तुरंत डॉक्टर से परामर्श लेना ज़रूरी है।
स्ट्रोक होने पर तुरंत क्या करना चाहिए?
WHO के अनुसार, स्ट्रोक के लक्षण दिखते ही बिना देर किए मरीज़ को अस्पताल की इमरजेंसी में पहुँचाएँ या एंबुलेंस बुलाएँ। लक्षण शुरू होने का सटीक समय नोट करें, क्योंकि यह जानकारी डॉक्टरों के लिए उपचार में बेहद उपयोगी होती है। डॉक्टर की सलाह के बिना मरीज़ को कोई दवा न दें।
स्ट्रोक का खतरा किन लोगों को अधिक होता है?
उच्च रक्तचाप, डायबिटीज, बढ़ा हुआ कोलेस्ट्रॉल, मोटापा, तंबाकू का सेवन और अत्यधिक शराब पीने वाले लोगों में स्ट्रोक का खतरा अधिक होता है। शारीरिक निष्क्रियता और अस्वस्थ खानपान भी जोखिम बढ़ाते हैं। नियमित स्वास्थ्य जाँच और जीवनशैली में सुधार इस खतरे को कम कर सकते हैं।
राष्ट्र प्रेस
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