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क्या मन को शांति चाहिए? रोजाना करें नाड़ी शोधन प्राणायाम, तनाव होगा दूर

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क्या मन को शांति चाहिए? रोजाना करें नाड़ी शोधन प्राणायाम, तनाव होगा दूर

सारांश

आज के तनाव भरे जीवन में नाड़ी शोधन प्राणायाम एक प्रभावी उपाय है। यह न केवल मानसिक शांति लाता है, बल्कि शरीर को भी स्वस्थ रखता है। जानिए इसके लाभ और सही तरीके से इसे कैसे करें।

मुख्य बातें

तनाव कम करने में मदद करता है।
शारीरिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाता है।
सही रक्त संचार में सहायक है।
फेफड़ों को मजबूत बनाता है।
पाचन तंत्र को सुधारता है।

नई दिल्ली, 20 जुलाई (राष्ट्र प्रेस)। आजकल तनाव, थकान और अनेक बीमारियों का सामना करना आम बात हो गई है। ऐसे में योग और प्राणायाम का अभ्यास हमारे लिए अत्यधिक लाभकारी हो सकता है। नाड़ी शोधन प्राणायाम एक सरल और प्रभावी तकनीक है, जो हमारे शरीर और मन दोनों को स्वस्थ रखता है। यह प्राणायाम सांस लेने की एक विशेष विधि है, जिसमें हम नाक के दोनों नथुनों से बारी-बारी से सांस लेते हैं, जिसे आमतौर पर अनुलोम-विलोम के नाम से जाना जाता है। यह प्राणायाम हमारे शरीर की ऊर्जा को बढ़ाता है और हमें तनाव मुक्त महसूस करने में मदद करता है। इसका नियमित अभ्यास न केवल शरीर को स्वस्थ रखता है, बल्कि मन को भी शांति प्रदान करता है।

आयुष मंत्रालय के अनुसार, नाड़ी शोधन प्राणायाम के कई लाभ हैं। यह मानसिक शांति और तनाव को कम करने में सहायक है। जब हम इसका अभ्यास करते हैं, तो हमारे मस्तिष्क में ऑक्सीजन का स्तर बढ़ता है, जिससे दिमाग शांत रहता है और तनाव कम होता है। साथ ही, यह याददाश्त और ध्यान लगाने की क्षमता को भी बढ़ाता है।

यह प्राणायाम शरीर की रोग-प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाता है, जिससे गंभीर बीमारियों का खतरा कम होता है। इसके माध्यम से सर्दी, जुकाम और खांसी जैसी सामान्य बीमारियां जल्दी ठीक हो जाती हैं। शरीर में ताकत बनी रहने से हम लंबे समय तक स्वस्थ रह सकते हैं।

नाड़ी शोधन प्राणायाम रक्त संचार में सुधार करता है। जब हम गहरी और सही तरीके से सांस लेते हैं, तो हमारे शरीर में रक्त का प्रवाह सही तरीके से होता है। यह दिल को स्वस्थ रखने में सहायक है और रक्तचाप को नियंत्रित रखता है। इससे शरीर के हर हिस्से में पोषण और ऑक्सीजन अच्छी तरह पहुँचती है।

यह फेफड़ों को मजबूत बनाता है। नाड़ी शोधन प्राणायाम के अभ्यास से हमारे फेफड़े स्वस्थ और मजबूत होते हैं, जिससे सांस लेने में आसानी होती है और दमा या एलर्जी जैसी समस्याओं से राहत मिलती है। फेफड़ों की अच्छी सेहत से पूरे शरीर को आवश्यक ऑक्सीजन मिलती रहती है।

यह प्राणायाम हमारे पाचन तंत्र को भी मजबूत करता है। इससे कब्ज, गैस और एसिडिटी जैसी समस्याएं दूर होती हैं। जब पाचन सही रहता है, तो हमारा पूरा शरीर स्वस्थ और हल्का महसूस करता है।

नाड़ी शोधन प्राणायाम करने के लिए सबसे पहले आराम से पद्मासन या सुखासन में बैठ जाएं और अपनी पीठ को सीधा रखें। फिर दाहिने हाथ की अंगुलियों से विष्णु मुद्रा बनाएं, जिसमें अंगूठे से दाहिने नथुने को बंद करें और मध्यमा उंगलियों से बाएं नथुने को। अब दाहिने नथुने को बंद करते हुए बाएं नथुने से गहरी सांस लें, इसे कुछ सेकंड तक रोकें, जितना आप सहज महसूस करें। फिर बाएं नथुने को बंद कर दाहिने नथुने से धीरे-धीरे सांस छोड़ें। इसके बाद, दाहिने नथुने से सांस लें, इसे रोकें और फिर बाएं नथुने से सांस छोड़ें। इस प्रक्रिया को लगातार 10 से 15 मिनट तक दोहराएं।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि यह आज के तनावपूर्ण जीवन में आवश्यक है। यदि हम इसे नियमित रूप से अपनाते हैं, तो यह न केवल हमारे मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाता है, बल्कि शारीरिक स्वास्थ्य को भी सुदृढ़ करता है।
RashtraPress
26 जून 2026
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