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त्राटक साधना: अनिद्रा और तनाव से मुक्ति का प्राचीन योगिक मार्ग, आयुष मंत्रालय ने माना लाभकारी

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त्राटक साधना: अनिद्रा और तनाव से मुक्ति का प्राचीन योगिक मार्ग, आयुष मंत्रालय ने माना लाभकारी

सारांश

भागदौड़ भरे जीवन में मानसिक शांति की तलाश? हठयोग की प्राचीन त्राटक क्रिया — जिसमें दीये की लौ को एकटक देखा जाता है — अनिद्रा, तनाव और मानसिक अशांति के विरुद्ध एक सिद्ध उपाय मानी जाती है। आयुष मंत्रालय ने भी इसे मानसिक स्पष्टता और नेत्र स्वास्थ्य के लिए लाभकारी स्वीकार किया है।

मुख्य बातें

त्राटक हठयोग की षट्कर्म क्रियाओं में से एक प्राचीन शुद्धिकरण साधना है, जिसमें किसी बिंदु या दीपक की लौ पर बिना पलक झपकाए एकाग्रता से देखा जाता है।
आयुष मंत्रालय ने त्राटक को मानसिक स्पष्टता और नेत्र स्वास्थ्य के लिए लाभकारी योगिक अभ्यास के रूप में मान्यता दी है।
नियमित त्राटक अभ्यास से मेलाटोनिन हार्मोन सक्रिय होता है, जो गहरी नींद और तनाव-मुक्ति में सहायक है।
रोज़ मात्र 10 मिनट के अभ्यास से अनिद्रा में राहत मिल सकती है — हालाँकि इसे चिकित्सकीय उपचार का विकल्प नहीं माना जाना चाहिए।
सूर्य त्राटक या तीव्र क्रियाएँ बिना किसी योग्य गुरु के मार्गदर्शन के न करें; आँखों में जलन होने पर अभ्यास तुरंत बंद करें।

त्राटक — हठयोग की यह सदियों पुरानी शुद्धिकरण क्रिया — आज के तनावग्रस्त युग में मानसिक शांति और एकाग्रता की तलाश कर रहे लोगों के लिए एक प्रभावी विकल्प के रूप में उभर रही है। भारत सरकार के आयुष मंत्रालय के अनुसार, यह योगिक अभ्यास मानसिक स्पष्टता और नेत्र स्वास्थ्य दोनों के लिए बेहद लाभकारी है। आधुनिक जीवनशैली में जहाँ मस्तिष्क हर पल सैकड़ों विचारों के बोझ तले दबा रहता है, वहाँ त्राटक मन को एक बिंदु पर केंद्रित करने का वैज्ञानिक और आध्यात्मिक दोनों दृष्टियों से सिद्ध मार्ग है।

त्राटक क्या है और इसे कैसे किया जाता है

त्राटक एक ऐसी योगिक क्रिया है जिसमें किसी निश्चित बिंदु, दीपक की लौ, मूर्ति या प्रतीक पर बिना पलक झपकाए लगातार एकाग्रचित्त होकर टकटकी लगाई जाती है। यह केवल आंखों का व्यायाम नहीं, बल्कि मानसिक ऊर्जा को जागृत करने और आंतरिक शांति अर्जित करने का एक समग्र मार्ग है।

अभ्यासकर्ता सुविधाजनक आसन में बैठकर किसी स्थिर वस्तु — प्रायः घी के दीये की लौ — को एकटक देखता है। प्रारंभ में 5 से 10 मिनट का अभ्यास पर्याप्त माना जाता है, जिसे धीरे-धीरे बढ़ाया जा सकता है। गौरतलब है कि यह हठयोग की षट्कर्म (छह शुद्धिकरण क्रियाओं) में से एक है।

अनिद्रा और तनाव पर प्रभाव

त्राटक अनिद्रा, तनाव और मानसिक अशांति को कम करने में विशेष रूप से प्रभावी बताया जाता है। रात को सोने से पहले दिनभर के विचारों की भीड़ जब नींद की गुणवत्ता घटाती है, तब त्राटक का अभ्यास मस्तिष्क को क्रमशः शांत करने में सहायक होता है।

विशेषज्ञों के अनुसार, आँखों की नसों का सीधा संबंध मस्तिष्क से होता है। दीये की लौ को एकाग्रता से देखते रहने पर शरीर में मेलाटोनिन हार्मोन सक्रिय होता है, जो गहरी नींद लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। दावा किया जाता है कि रोज़ 10 मिनट के नियमित अभ्यास से नींद की गोलियों पर निर्भरता घट सकती है — हालाँकि इस दावे को किसी विशिष्ट नैदानिक परीक्षण का संदर्भ स्रोत में नहीं दिया गया है।

आयुष मंत्रालय की स्वीकृति और महत्व

भारत सरकार के आयुष मंत्रालय ने त्राटक को एक महत्वपूर्ण योगिक अभ्यास के रूप में मान्यता दी है। मंत्रालय के अनुसार, इसके नियमित अभ्यास से आँखों की रोशनी में सुधार, बेहतर नींद और मन की शांति — तीनों लाभ एक साथ मिल सकते हैं। यह ऐसे समय में विशेष प्रासंगिक है जब शहरी भारत में अनिद्रा और मानसिक तनाव की समस्याएँ तेज़ी से बढ़ रही हैं।

सावधानियाँ और विशेषज्ञ परामर्श

त्राटक के अभ्यास में कुछ आवश्यक सावधानियाँ बरतनी चाहिए। चश्मा पहनकर या रात के समय सूर्य त्राटक जैसी तीव्र क्रियाएँ किसी योग्य गुरु के मार्गदर्शन के बिना कदापि न करें। यदि अभ्यास के दौरान आँखों में अत्यधिक जलन या कोई गंभीर समस्या हो, तो तुरंत अभ्यास रोककर विशेषज्ञ से परामर्श लें।

विशेषज्ञों की सलाह है कि नवसाधक पहले किसी प्रशिक्षित योग प्रशिक्षक के सानिध्य में इसे सीखें, उसके बाद ही स्वतंत्र रूप से अभ्यास करें। भविष्य में त्राटक पर अधिक नैदानिक शोध से इसके लाभों की वैज्ञानिक पुष्टि और व्यापक हो सकती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन 'नींद की गोली की ज़रूरत कम होगी' जैसे दावे तब तक सावधानी से पेश किए जाने चाहिए जब तक बड़े यादृच्छिक नैदानिक परीक्षण उपलब्ध न हों। भारत में मानसिक स्वास्थ्य संकट गहरा रहा है और योग-आधारित हस्तक्षेपों की माँग बढ़ रही है — ऐसे में जनता को साक्ष्य-आधारित जानकारी देना और अतिरंजित दावों से बचना दोनों ज़रूरी हैं। पारंपरिक ज्ञान और आधुनिक विज्ञान का संतुलन ही आयुष की दीर्घकालिक विश्वसनीयता की नींव बनेगा।
RashtraPress
26 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

त्राटक साधना क्या है और इसे कैसे करते हैं?
त्राटक हठयोग की एक प्राचीन शुद्धिकरण क्रिया है जिसमें किसी एक बिंदु, दीपक की लौ, मूर्ति या प्रतीक पर बिना पलक झपकाए एकाग्रचित्त होकर देखा जाता है। अभ्यास के लिए शांत स्थान पर सुविधाजनक आसन में बैठकर प्रारंभ में 5-10 मिनट किया जा सकता है, जिसे धीरे-धीरे बढ़ाया जाता है।
त्राटक अनिद्रा में कैसे मदद करता है?
त्राटक के दौरान दीये की लौ को एकाग्रता से देखने पर मस्तिष्क में मेलाटोनिन हार्मोन सक्रिय होता है, जो गहरी और बेहतर नींद लाने में सहायक माना जाता है। इससे रात के समय दिमाग में उठने वाले अनावश्यक विचारों की भीड़ धीरे-धीरे शांत होती है।
क्या आयुष मंत्रालय ने त्राटक को मान्यता दी है?
हाँ, भारत सरकार के आयुष मंत्रालय ने त्राटक को एक महत्वपूर्ण योगिक अभ्यास के रूप में मान्यता दी है। मंत्रालय के अनुसार, इसके नियमित अभ्यास से मानसिक स्पष्टता और नेत्र स्वास्थ्य दोनों में लाभ मिलता है।
त्राटक करते समय कौन-सी सावधानियाँ बरतनी चाहिए?
चश्मा पहनकर या बिना योग्य गुरु के मार्गदर्शन के सूर्य त्राटक जैसी तीव्र क्रियाएँ नहीं करनी चाहिए। आँखों में अत्यधिक जलन या कोई गंभीर समस्या होने पर अभ्यास तुरंत बंद कर विशेषज्ञ से परामर्श लेना चाहिए।
त्राटक से तनाव कम होने में कितना समय लगता है?
नियमित रूप से प्रतिदिन 10 मिनट का अभ्यास करने पर कुछ हफ्तों में मानसिक शांति और तनाव में कमी अनुभव की जा सकती है। हालाँकि परिणाम व्यक्ति की मानसिक स्थिति और अभ्यास की नियमितता पर निर्भर करते हैं; गंभीर मानसिक समस्याओं में चिकित्सकीय परामर्श अनिवार्य है।
राष्ट्र प्रेस
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