क्या ट्राइग्लिसराइड चुपचाप दिल को बीमारियों का घर बना सकता है? आयुर्वेद से जानें बचाव के उपाय

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क्या ट्राइग्लिसराइड चुपचाप दिल को बीमारियों का घर बना सकता है? आयुर्वेद से जानें बचाव के उपाय

सारांश

क्या आप जानते हैं कि ट्राइग्लिसराइड आपके दिल को चुपचाप बीमारियों का घर बना सकता है? जानें इसके कारण और आयुर्वेदिक उपचार।

Key Takeaways

  • ट्राइग्लिसराइड का सामान्य स्तर 150 मिलीग्राम प्रति डेसीलीटर से कम होना चाहिए।
  • उच्च ट्राइग्लिसराइड दिल की बीमारियों का कारण बन सकता है।
  • आहार में शुगर और फैटी फूड्स को कम करें।
  • व्यायाम और योग नियमित करें।
  • आयुर्वेदिक उपायों को अपनाएं।

नई दिल्ली, 24 सितंबर (राष्ट्र प्रेस)। आजकल कोलेस्ट्रॉल के साथ-साथ ट्राइग्लिसराइड शब्द भी आम सुनाई देता है। कई लोग इसे केवल कोलेस्ट्रॉल का ही एक प्रकार मान लेते हैं, लेकिन यह वास्तव में एक अलग चीज है और दिल की बीमारियों का एक प्रमुख कारण बन सकता है।

ट्राइग्लिसराइड हमारे रक्त में वसा का एक प्रकार है। जब हम भोजन करते हैं और शरीर उन कैलोरी को तुरंत उपयोग नहीं करता, तब अतिरिक्त कैलोरी वसा कोशिकाओं में ट्राइग्लिसराइड के रूप में जमा हो जाती हैं। आवश्यकता पड़ने पर यह ऊर्जा का स्रोत बन जाती है।

ट्राइग्लिसराइड का सामान्य स्तर 150 मिलीग्राम प्रति डेसीलीटर से कम होता है। सीमा रेखा 150-199 मिलीग्राम प्रति डेसीलीटर, उच्च स्तर 200-499 मिलीग्राम प्रति डेसीलीटर और बहुत अधिक स्तर 500 मिलीग्राम प्रति डेसीलीटर से ऊपर होता है। लगातार उच्च ट्राइग्लिसराइड रहने से दिल की बीमारियों, स्ट्रोक, मोटापा, फैटी लिवर और डायबिटीज़ का खतरा कई गुना बढ़ जाता है।

कई लोग मानते हैं कि केवल तैलीय भोजन ट्राइग्लिसराइड बढ़ाता है, लेकिन असल में शुगर, मैदा और मीठे पेय इसके सबसे बड़े कारण हैं। उच्च ट्राइग्लिसराइड हृदय रोग और स्ट्रोक के जोखिम को एलडीएल कोलेस्ट्रॉल जितना या उससे भी ज्यादा बढ़ा सकता है। यह टाइप-2 डायबिटीज और इंसुलिन प्रतिरोध का भी संकेत है। लंबे समय तक उच्च ट्राइग्लिसराइड जमा होने से फैटी लिवर और गंभीर मामलों में लिवर फेल्योर का खतरा होता है। आनुवंशिक कारणों से भी इसका स्तर ऊँचा हो सकता है।

ट्राइग्लिसराइड का स्तर अक्सर दिखाई नहीं देता और व्यक्ति सामान्य महसूस कर सकता है। इसलिए समय-समय पर लिपिड प्रोफाइल टेस्ट कराना आवश्यक है। व्यायाम और सही जीवनशैली ट्राइग्लिसराइड कम करने में मदद करते हैं। शराब का सेवन इसे तेजी से बढ़ा सकता है, जबकि ओमेगा-3 फैटी एसिड युक्त भोजन जैसे अलसी, अखरोट और मछली का तेल इसे घटाने में प्रभावी हैं।

आयुर्वेदिक उपाय भी सहायक हैं। त्रिफला चूर्ण रात को गुनगुने पानी के साथ लेने से पाचन बेहतर होता है। रोज सुबह लहसुन, अर्जुन की छाल का काढ़ा और मेथी दाना ट्राइग्लिसराइड और कोलेस्ट्रॉल को घटाने में सहायक हैं। ग्रीन टी और दालचीनी एंटीऑक्सीडेंट गुणों के कारण शरीर की अतिरिक्त वसा को कम करते हैं। योग और प्राणायाम, जैसे कपालभाति, अनुलोम-विलोम और सूर्य नमस्कार, वसा संतुलन के लिए सर्वोत्तम हैं।

जीवनशैली में बदलाव भी आवश्यक है। चीनी और मीठे पेय कम करें, तले-भुने और पैकेज्ड फूड से दूरी बनाएं। हरी सब्जियां, साबुत अनाज और फल अधिक खाएं। सप्ताह में कम से कम 5 दिन 30 मिनट की वॉक या योग करें। धूम्रपान और शराब से बचें, पर्याप्त नींद लें और तनाव कम करने का प्रयास करें।

Point of View

जिसका प्रभाव व्यापक हो सकता है। इसे नजरअंदाज करना खतरनाक साबित हो सकता है। उचित जीवनशैली और आयुर्वेदिक उपायों के माध्यम से इसे नियंत्रित किया जा सकता है।
NationPress
15/01/2026

Frequently Asked Questions

ट्राइग्लिसराइड का सामान्य स्तर क्या होता है?
ट्राइग्लिसराइड का सामान्य स्तर 150 मिलीग्राम प्रति डेसीलीटर से कम होता है।
ट्राइग्लिसराइड बढ़ाने के कारण क्या हैं?
ट्राइग्लिसराइड बढ़ाने के मुख्य कारण शुगर, मैदा, और मीठे पेय हैं।
ट्राइग्लिसराइड को कैसे कम किया जा सकता है?
व्यायाम, सही आहार, और आयुर्वेदिक उपाय ट्राइग्लिसराइड को कम करने में मदद करते हैं।
क्या ट्राइग्लिसराइड और कोलेस्ट्रॉल एक ही हैं?
नहीं, ट्राइग्लिसराइड और कोलेस्ट्रॉल अलग होते हैं, हालाँकि दोनों दिल की बीमारियों से जुड़े हैं।
आयुर्वेदिक उपाय क्या हैं?
त्रिफला चूर्ण, लहसुन, और ग्रीन टी जैसे उपाय ट्राइग्लिसराइड को नियंत्रित करने में सहायक हैं।
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