क्या उयिर तातुक्कल हैं शरीर की तीन आवश्यक शक्तियाँ, जो सेहत का ध्यान रखती हैं?
सारांश
Key Takeaways
- उयिर तातुक्कल का संतुलन स्वास्थ्य के लिए आवश्यक है।
- वली, अजल और अयम शरीर की तीन मूल शक्तियाँ हैं।
- सिद्ध चिकित्सा व्यक्ति की शारीरिक स्थिति के अनुसार उपचार करती है।
- इन शक्तियों का असंतुलन बीमारियों का कारण बन सकता है।
- योग्य चिकित्सक से परामर्श लेना महत्वपूर्ण है।
नई दिल्ली, 6 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। सिद्ध चिकित्सा प्रणाली भारत की प्राचीन पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों में से एक मानी जाती है। इस प्रणाली का केंद्रीय तत्व उयिर तातुक्कल है, जिसका अर्थ है जीवन की मूल शक्तियाँ या जैविक प्रक्रियाओं को नियंत्रित करने वाली तीन आवश्यक ताकतें। ये शक्तियाँ हैं - वली, अजल और अयम.
भारत सरकार के आयुष मंत्रालय के अनुसार, ये तीनों तत्व मिलकर मानव शरीर के सभी कार्यों को नियंत्रित करते हैं। इसके साथ ही, ये किसी व्यक्ति की शारीरिक बनावट और स्वभाव को भी निर्धारित करते हैं। इनका संतुलन बनाए रखना शरीर के प्रदर्शन को बेहतर बनाता है और सम्पूर्ण स्वास्थ्य को सुनिश्चित करता है।
ये तीन तत्व पांच महाभूतों आकाश, वायु, अग्नि, जल और पृथ्वी से मिलकर बने होते हैं। वली का संबंध मुख्य रूप से वायु और आकाश से है, अजल अग्नि से संबंधित है और अयम जल एवं पृथ्वी से जुड़ा हुआ है।
सिद्ध चिकित्सा में वली, अजल और अयम का तालमेल अत्यंत महत्वपूर्ण होता है। जब ये तीनों संतुलित होते हैं, तो व्यक्ति स्वस्थ और ऊर्जावान रहता है। लेकिन असंतुलन होने पर कई प्रकार की बीमारियाँ उत्पन्न हो सकती हैं। सिद्ध प्रणाली में उपचार का मुख्य उद्देश्य इन्हीं तीन शक्तियों को संतुलित करना होता है।
वली मुख्य रूप से शरीर की गति और तंत्रिका तंत्र से संबंधित कार्यों को संभालता है। यह हलचल, मूवमेंट और न्यूरोलॉजिकल प्रक्रियाओं को नियंत्रित करता है। आधुनिक विज्ञान में इसे नर्वस सिस्टम से जोड़ा जाता है, जो शरीर की हरकतों और संवेदनाओं का प्रबंधन करता है।
दूसरी शक्ति अजल है, जो पाचन प्रक्रिया और शरीर की गर्मी को नियंत्रित करती है। यह मेटाबॉलिज्म को बनाए रखती है, भोजन को पचाती है और शरीर के तापमान को संतुलित रखती है। अजल के कारण ही शरीर में ऊर्जा का उत्पादन होता है और पाचन तंत्र सुचारू रूप से काम करता है।
तीसरी शक्ति अयम है, जो शरीर की संरचनात्मक मजबूती और स्थिरता प्रदान करती है। यह हड्डियों, मांसपेशियों और जोड़ों को मजबूत बनाती है। अयम शरीर को स्थिरता देता है और तरल पदार्थों का संतुलन बनाए रखता है।
सिद्ध चिकित्सा बीमारियों का उपचार व्यक्ति की उम्र, आदतें, पर्यावरण और शारीरिक स्थिति को ध्यान में रखकर करती है। उयिर तातुक्कल को समझकर हम अपनी जीवनशैली में सुधार कर सकते हैं और बेहतर स्वास्थ्य प्राप्त कर सकते हैं।
विशेषज्ञों की सलाह है कि किसी भी उपचार से पहले योग्य चिकित्सक से परामर्श अवश्य लें।