विश्व रेबीज दिवस 2026: हर 9 मिनट में एक मौत, WHO ने बताए बचाव के अचूक उपाय
सारांश
मुख्य बातें
विश्व रेबीज दिवस प्रतिवर्ष 28 सितंबर को मनाया जाता है — यह तारीख उस फ्रांसीसी वैज्ञानिक लुई पाश्चर की पुण्यतिथि है, जिन्होंने दुनिया का पहला रेबीज टीका विकसित किया था। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, रेबीज से आज भी हर 9 मिनट में एक व्यक्ति की मौत होती है — जबकि यह बीमारी 100 प्रतिशत रोकी जा सकती है। वैश्विक लक्ष्य है कि 2030 तक कुत्तों से फैलने वाले रेबीज से होने वाली इंसानी मौतें पूरी तरह समाप्त की जाएँ।
WHO की चेतावनी और इस वर्ष का संदेश
इस अवसर पर WHO ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए लिखा: 'हर नौ मिनट में एक व्यक्ति की मौत रेबीज से होती है, जबकि इसे 100 प्रतिशत रोका जा सकता है। अपने कुत्ते को हर वर्ष वैक्सीन लगवाकर खुद को और अपने पालतू जानवर को सुरक्षित रखें। यह भी पक्का करें कि जिन लोगों को काटा गया है, उन्हें जान बचाने वाली वैक्सीन मिल सके।' यह संदेश उन करोड़ों लोगों के लिए महत्त्वपूर्ण है जो कुत्तों और अन्य जानवरों के निकट संपर्क में रहते हैं।
रेबीज: कितना खतरनाक, कहाँ-कहाँ फैला
WHO के अनुसार, रेबीज एक वायरल, जूनोटिक (जानवरों से इंसानों में फैलने वाली) बीमारी है, जो मुख्यतः एशिया और अफ्रीका में सार्वजनिक स्वास्थ्य की गंभीर समस्या बनी हुई है। इस बीमारी से होने वाली मौतों में से 40 प्रतिशत पीड़ित 15 वर्ष से कम आयु के बच्चे होते हैं। इंसानों में रेबीज के 99 प्रतिशत मामले कुत्तों के काटने या खरोंचने से होते हैं। यह बीमारी अंटार्कटिका को छोड़कर सभी महाद्वीपों पर मौजूद है और हर वर्ष लगभग ₹82,448 करोड़ का वैश्विक आर्थिक बोझ डालती है।
रेबीज लार के ज़रिए फैलता है — आमतौर पर काटने, खरोंचने या म्यूकोसा (जैसे आँख, मुँह या खुले घाव) के सीधे संपर्क से। 5 से 14 वर्ष आयु वर्ग के बच्चे इसके सर्वाधिक शिकार होते हैं। वायरस कुत्तों के अलावा बिल्लियों, लोमड़ियों, चमगादड़ों और अन्य जंगली स्तनधारियों से भी फैल सकता है। उल्लेखनीय है कि कृंतकों (जैसे चूहों) के काटने से रेबीज फैलने की अभी तक कोई पुष्ट जानकारी नहीं है।
लक्षण: कैसे पहचानें रेबीज को
WHO के अनुसार, रेबीज के शुरुआती लक्षणों में बुखार, दर्द और घाव वाली जगह पर असामान्य झनझनाहट, चुभन या जलन जैसी अनुभूति होती है। जैसे-जैसे वायरस केंद्रीय तंत्रिका तंत्र (सेंट्रल नर्वस सिस्टम) में फैलता है, मस्तिष्क और रीढ़ की हड्डी में सूजन आने लगती है। एक बार जब वायरस सेंट्रल नर्वस सिस्टम को संक्रमित कर देता है और लक्षण प्रकट हो जाते हैं, तो 100 प्रतिशत मामलों में मृत्यु निश्चित होती है।
बचाव और उपचार: क्या करें, क्या न करें
WHO के मुताबिक, काटे जाने के तुरंत बाद पोस्ट-एक्सपोजर प्रोफिलैक्सिस (PEP) अपनाना जीवन रक्षक कदम है। इसमें घाव को कम-से-कम 15 मिनट तक साबुन और पानी से अच्छी तरह धोना, ह्यूमन रेबीज वैक्सीन का पूरा कोर्स लेना और जरूरत पड़ने पर रेबीज इम्युनोग्लोबुलिन (RIG) या मोनोक्लोनल एंटीबॉडी (RMAB) लेना शामिल है। किसी भी संदिग्ध काटने या खरोंचने के बाद तत्काल चिकित्सक से संपर्क करना अनिवार्य है।
रेबीज रोकथाम का सबसे किफायती और प्रभावी तरीका कुत्तों (पिल्लों सहित) का बड़े पैमाने पर टीकाकरण है। WHO और उसके वैश्विक साझीदार 'वन हेल्थ' दृष्टिकोण अपनाते हैं, जिसमें सामूहिक टीकाकरण, PEP तक सुलभ पहुँच, स्वास्थ्यकर्मियों की ट्रेनिंग, निगरानी और सामुदायिक जागरूकता शामिल हैं।
वैश्विक प्रगति: कौन से देश आगे
17 सितंबर 2026 तक, तीन देशों — भूटान, चिली और मैक्सिको — को WHO ने कुत्तों से फैलने वाले इंसानी रेबीज को सार्वजनिक स्वास्थ्य समस्या के रूप में समाप्त करने की मान्यता दी है। अमेरिका में कुत्तों से फैलने वाला रेबीज काफी हद तक नियंत्रित है, जहाँ अब रक्त पीने वाले चमगादड़ इंसानी रेबीज का प्रमुख स्रोत हैं। यह प्रगति बताती है कि सुनियोजित प्रयासों से 2030 का लक्ष्य हासिल किया जा सकता है।