चीन का 15वीं पंचवर्षीय योजना में बिजली ग्रिड पर 50 खरब युआन से अधिक निवेश का ऐलान
सारांश
मुख्य बातें
चीनी राष्ट्रीय ऊर्जा प्रशासन के विद्युत विभाग के उप निदेशक थान होंगच्यांग ने कहा है कि 15वीं पंचवर्षीय योजना (2026-2030) के अंतर्गत चीन नए बिजली ग्रिडों के निर्माण में 50 खरब युआन से अधिक का निवेश करेगा — जो 14वीं पंचवर्षीय योजना (2021-2025) के दौरान हुए निवेश के पैमाने से काफी अधिक है। यह घोषणा बीजिंग से जारी एक विशेष साक्षात्कार में की गई।
नई ऊर्जा खपत का बड़ा लक्ष्य
अधिकारियों के अनुसार, वर्ष 2030 तक चीन एक नई पीढ़ी के विद्युत ग्रिड की प्रारंभिक स्थापना पूरी कर लेगा। यह ग्रिड 2.8 अरब किलोवाट से अधिक नई ऊर्जा की खपत को कुशलतापूर्वक समर्थन देने में सक्षम होगा और आर्थिक तथा सामाजिक विकास की बिजली संबंधी माँग की प्रभावी गारंटी देगा।
यह ऐसे समय में आया है जब चीन अपनी नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता को तेज़ी से बढ़ा रहा है और जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता कम करने के वैश्विक दबाव का सामना कर रहा है।
पारेषण ढाँचे का विस्तार
थान होंगच्यांग के अनुसार, 15वीं पंचवर्षीय योजना के दौरान 15 से अधिक विद्युत पारेषण चैनलों के निर्माण और संचालन पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा। 2030 तक 'पश्चिम से पूर्व विद्युत पारेषण' का कुल पैमाना 42 करोड़ किलोवाट से अधिक हो जाएगा, जो देश के ऊर्जा संतुलन में बड़ा बदलाव लाएगा।
गौरतलब है कि चीन का पश्चिमी हिस्सा सौर और पवन ऊर्जा उत्पादन में समृद्ध है, जबकि औद्योगिक और जनसंख्या केंद्र पूर्वी तट पर हैं — यह पारेषण विस्तार उसी असमानता को दूर करने की दिशा में है।
अंतर-प्रांतीय साझाकरण और वितरण नेटवर्क
योजना अवधि में अंतर-प्रांतीय विद्युत साझाकरण क्षमता में 4 करोड़ किलोवाट की वृद्धि का लक्ष्य रखा गया है। साथ ही, वितरण नेटवर्क की विश्वसनीयता और वहन क्षमता को उन्नत किया जाएगा — 2030 तक इसकी समग्र वहन क्षमता दोगुनी की जाएगी और 90 करोड़ किलोवाट के वितरित नई ऊर्जा स्रोतों के एकीकरण को सक्षम बनाया जाएगा।
स्मार्ट ग्रिड और चार्जिंग बुनियादी ढाँचा
थान होंगच्यांग ने बताया कि इस योजना में स्मार्ट माइक्रोग्रिड विकास, सिस्टम विनियमन क्षमता में सुधार, चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर नेटवर्क का विस्तार, और नई पावर ग्रिड सेवाओं को बेहतर बनाने पर भी ध्यान दिया जाएगा। इसका सीधा लाभ आम नागरिकों की बिजली सेवाओं में सुधार के रूप में मिलेगा।
आने वाले वर्षों में इन लक्ष्यों की प्राप्ति न केवल चीन की ऊर्जा सुरक्षा तय करेगी, बल्कि वैश्विक हरित ऊर्जा परिवर्तन की गति पर भी उसका असर पड़ेगा।