कुरुक्षेत्र में प्राकृतिक खेती प्रशिक्षण लेंगे नेपाल के 50 अधिकारी, भारत-नेपाल कृषि सहयोग मज़बूत
सारांश
मुख्य बातें
भारत-नेपाल कृषि सहयोग के तहत नेपाल के 50 अधिकारियों का एक दल 29 सितंबर से 3 अक्टूबर 2026 तक कुरुक्षेत्र, हरियाणा स्थित गुरुकुल में आयोजित पाँच दिवसीय प्राकृतिक खेती प्रशिक्षण कार्यक्रम में भाग लेने के लिए रवाना हुआ है। काठमांडू स्थित भारतीय दूतावास ने सोमवार, 28 सितंबर को यह जानकारी दी। यह कार्यक्रम पूर्णतः भारत सरकार द्वारा प्रायोजित है।
प्रशिक्षण कार्यक्रम का विवरण
भारतीय दूतावास के बयान के अनुसार, कुरुक्षेत्र के गुरुकुल में आयोजित इस प्रशिक्षण में प्रतिभागियों को प्राकृतिक खेती की तकनीकों का व्यावहारिक अनुभव दिया जाएगा। कार्यक्रम में सतत और पर्यावरण-अनुकूल कृषि पद्धतियों पर ज्ञान-साझाकरण तथा सर्वोत्तम प्रथाओं के आदान-प्रदान पर विशेष ज़ोर रहेगा। यह प्रशिक्षण नेपाल के कृषि क्षेत्र में मानव संसाधन विकास को बढ़ावा देने की व्यापक पहल का हिस्सा है।
तीसरा बैच, लंबी साझेदारी की कहानी
गौरतलब है कि यह इस कार्यक्रम में भाग लेने वाला नेपाली अधिकारियों का तीसरा बैच है। पहले बैच ने सितंबर 2023 में और दूसरे बैच ने अगस्त 2025 में यह प्रशिक्षण पूरा किया था। यह ऐसे समय में आया है जब दोनों देश कृषि, शिक्षा और क्षमता निर्माण के क्षेत्र में अपनी द्विपक्षीय साझेदारी को नई ऊँचाइयों पर ले जाने में जुटे हैं।
भारत-नेपाल कृषि सहयोग का महत्त्व
दूतावास ने अपने बयान में कहा, 'यह पहल दो पड़ोसी देशों के बीच घनिष्ठ और बहुआयामी साझेदारी के हिस्से के रूप में नेपाल में क्षमता निर्माण के लिए भारत के निरंतर समर्थन को भी रेखांकित करती है।' प्राकृतिक खेती को लेकर भारत की बढ़ती विशेषज्ञता — विशेष रूप से हरियाणा और हिमाचल प्रदेश में इसके व्यापक प्रसार के बाद — इसे नेपाल जैसे पर्वतीय कृषि-प्रधान देश के लिए एक प्रासंगिक मॉडल बनाती है।
कानूनी शिक्षा के लिए नई छात्रवृत्ति योजना
कृषि सहयोग के साथ-साथ भारतीय दूतावास ने एक नई कानूनी शिक्षा छात्रवृत्ति योजना की भी घोषणा की है। इस योजना के तहत प्रतिवर्ष 25 नेपाली छात्रों को भारत के शीर्ष 20 लॉ कॉलेजों में से किसी में भी बीए एलएलबी, एलएलबी या एलएलएम पाठ्यक्रम करने के लिए वित्तीय सहायता मिलेगी। छात्रवृत्ति प्रतिपूर्ति के आधार पर दी जाएगी और इसमें ट्यूशन, प्रवेश तथा हॉस्टल फीस शामिल होगी, जो प्रति वर्ष अधिकतम 6,40,000 नेपाली रुपये तक होगी। उम्मीदवारों का चयन उनकी पूर्व या योग्यता परीक्षाओं में प्राप्त अंकों के आधार पर किया जाएगा।
आगे की राह
इस प्रशिक्षण कार्यक्रम की निरंतरता — तीन बैचों में — यह दर्शाती है कि दोनों देश कृषि क्षेत्र में दीर्घकालिक ज्ञान-साझेदारी के प्रति प्रतिबद्ध हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, यदि नेपाली अधिकारी इन तकनीकों को अपने देश की कृषि नीति में समाहित कर सकें, तो रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता घटाने और किसानों की आय बढ़ाने में सार्थक परिणाम मिल सकते हैं।