नेपाल के कोशी प्रांत का 21 सदस्यीय दल भारत दौरे पर, NIRDPR में शहरी शासन का प्रशिक्षण
सारांश
मुख्य बातें
नेपाल के कोशी प्रांत से 21 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल 3 अगस्त 2026 को भारत के अध्ययन दौरे पर रवाना हुआ और अब हैदराबाद स्थित राष्ट्रीय ग्रामीण विकास और पंचायती राज संस्थान (NIRDPR) में 10 दिवसीय अंतरराष्ट्रीय प्रशिक्षण कार्यक्रम में भाग ले रहा है। विदेश मंत्रालय की पहल पर आयोजित यह कार्यक्रम 3 से 12 अगस्त 2026 तक चलेगा और इसका केंद्रबिंदु शहरी शासन, कचरा प्रबंधन, इको-टूरिज्म और बुनियादी ढाँचा विकास है।
प्रतिनिधिमंडल में कौन शामिल हैं
इस दल में कोशी प्रांत के इलाम, पंचथर, ताप्लेजुंग और तेरहथुम जिलों के मेयर, नगरपालिका अध्यक्ष और प्रशासनिक अधिकारी शामिल हैं। प्रतिनिधिमंडल के लिए NIRDPR में एक विशेष रूप से तैयार कस्टमाइज़्ड प्रशिक्षण पाठ्यक्रम बनाया गया है, जो इन प्रतिनिधियों की स्थानीय ज़रूरतों के अनुरूप है।
प्रशिक्षण के तीन मुख्य स्तंभ हैं — कृषि और ग्रामीण आजीविका, सतत विकास मॉडल और स्थानीय शासन प्रणाली। इसके अतिरिक्त प्रतिनिधिमंडल को उन क्षेत्रों का प्रत्यक्ष भ्रमण भी कराया जाएगा जहाँ इन पद्धतियों को सफलतापूर्वक लागू किया जा चुका है।
भारत सरकार की क्षमता-निर्माण पहल
यह दौरा भारत सरकार की व्यापक क्षमता-निर्माण पहल के अंतर्गत आयोजित किया गया है। सरकार का मानना है कि इस तरह के आदान-प्रदान कार्यक्रम दोनों देशों के बीच संस्थागत क्षमताओं को मज़बूत करते हैं और दीर्घकालिक द्विपक्षीय संबंधों को गहरा करते हैं।
गौरतलब है कि नेपाल स्थित भारतीय दूतावास ने सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म एक्स पर इस दौरे से जुड़ी तस्वीरें और जानकारी साझा की थी। इसके साथ ही NIRDPR ने भी एक्स पर इस प्रशिक्षण कार्यक्रम की आधिकारिक जानकारी दी।
यह चौथा प्रतिनिधिमंडल — सहयोग की बढ़ती रफ़्तार
यह हाल के समय में नेपाल की स्थानीय सरकार के प्रतिनिधियों का चौथा प्रतिनिधिमंडल है जो भारत के अध्ययन दौरे पर आया है। इससे पहले कोशी प्रांत के संखुवासभा, कर्णाली प्रांत के हुम्ला और सुदूरपश्चिम प्रांत के दादेलधुरा, बैतडी और दार्चुला जिलों के प्रतिनिधि भारत का दौरा कर चुके हैं।
यह ऐसे समय में आया है जब भारत और नेपाल के बीच स्थानीय शासन स्तर पर सहयोग को संस्थागत रूप देने की कोशिशें तेज़ हो रही हैं। इन आदान-प्रदान कार्यक्रमों से नेपाल के सीमावर्ती जिलों को पंचायती राज, ग्रामीण विकास और कृषि योजनाओं के भारतीय मॉडल को समझने का अवसर मिलता है, जिसे वे अपने क्षेत्र में अनुकूलित कर लागू कर सकते हैं।
आगे क्या होगा
12 अगस्त 2026 को प्रशिक्षण कार्यक्रम के समापन के बाद प्रतिनिधिमंडल के नेपाल लौटने की संभावना है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के कार्यक्रम भारत-नेपाल के बीच जमीनी स्तर पर शासन सहयोग का एक मज़बूत आधार तैयार कर रहे हैं, जो राजनयिक संबंधों को नई ऊँचाई देने में सहायक सिद्ध होगा।