26 जुलाई 2026
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वडोदरा में सीपीएसई परामर्श सम्मेलन 2026: ऊर्जा-खनन कंपनियों ने परियोजना क्रियान्वयन सुधार का रोडमैप तैयार किया

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वडोदरा में सीपीएसई परामर्श सम्मेलन 2026: ऊर्जा-खनन कंपनियों ने परियोजना क्रियान्वयन सुधार का रोडमैप तैयार किया

सारांश

वडोदरा में सीपीएसई परामर्श सम्मेलन 2026 में एनटीपीसी, कोल इंडिया, ओएनजीसी समेत 19 सार्वजनिक उपक्रमों के 39 प्रतिनिधि एक मंच पर आए। लक्ष्य स्पष्ट था — परियोजना देरी की जड़ें पहचानना और विकसित भारत 2047 की दिशा में एक कार्यान्वयन योग्य सुधार एजेंडा तैयार करना।

मुख्य बातें

सीपीएसई परामर्श सम्मेलन 2026 का आयोजन 26 जुलाई 2026 को वडोदरा में किया गया।
सम्मेलन का संयुक्त आयोजन क्षमता विकास आयोग (सीबीसी) और सार्वजनिक उद्यम विभाग (डीपीई) ने किया; गति शक्ति विश्वविद्यालय (जीएसवी) नॉलेज पार्टनर रहा।
ऊर्जा और खनन क्षेत्र की 19 सीपीएसई के 39 प्रतिनिधियों ने भाग लिया, जिनमें एनटीपीसी, कोल इंडिया, ओएनजीसी, इंडियन ऑयल, गेल और पावर ग्रिड शामिल हैं।
चर्चा के प्रमुख विषय: डीपीआर , भूमि अधिग्रहण , डीप टेक और पीएम गति शक्ति प्लेटफॉर्म का उपयोग।
सीबीसी और जीएसवी मिलकर सम्मेलन के सुझावों पर आधारित 'भारत सीपीएसई संकलन' प्रकाशित करेंगे।

वडोदरा में 26 जुलाई 2026 को आयोजित सीपीएसई परामर्श सम्मेलन 2026 में ऊर्जा और खनन क्षेत्र के केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यमों (सीपीएसई) ने परियोजना क्रियान्वयन, परिसंपत्ति प्रबंधन और संगठनात्मक उत्कृष्टता को सुदृढ़ करने पर विस्तृत विचार-विमर्श किया। एनटीपीसी, कोल इंडिया, ओएनजीसी और इंडियन ऑयल सहित 19 प्रमुख सीपीएसई के कुल 39 प्रतिनिधियों ने इस सम्मेलन में भाग लिया।

सम्मेलन का आयोजन और साझेदारी

इस सम्मेलन का संयुक्त आयोजन क्षमता विकास आयोग (सीबीसी) और सार्वजनिक उद्यम विभाग (डीपीई), वित्त मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा किया गया। गति शक्ति विश्वविद्यालय (जीएसवी) इस आयोजन का स्ट्रैटेजिक नॉलेज पार्टनर रहा। यह आयोजन सीबीसी और जीएसवी के बीच हुए समझौता ज्ञापन (एमओयू) के अंतर्गत दीर्घकालिक साझेदारी की निरंतरता का हिस्सा है।

मुख्य चर्चा बिंदु

सम्मेलन में योजना निर्माण, विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर), अनुबंध प्रबंधन, भूमि अधिग्रहण, परिसंपत्ति की अवधि प्रबंधन, डीप टेक प्रौद्योगिकी को अपनाने और पीएम गति शक्ति प्लेटफॉर्म के उपयोग पर केंद्रित चर्चाएँ हुईं। इन विषयों पर एक कार्यान्वयन योग्य सीपीएसई सुधार एजेंडा तैयार करने की दिशा में ठोस विमर्श किया गया। नीति निर्माताओं, उद्योग जगत के प्रमुखों, शिक्षाविदों और वरिष्ठ सीपीएसई अधिकारियों ने सर्वोत्तम कार्यप्रणालियों के आदान-प्रदान के साथ विकसित भारत 2047 के लक्ष्यों की दिशा में आगे की राह तय की।

विशेषज्ञों की राय

जीएसवी के कुलपति प्रोफेसर मनोज चौधरी ने कहा कि इस सम्मेलन ने सहयोगात्मक शिक्षण को मजबूत गति दी है और डेटा-आधारित निर्णय लेने की संस्कृति को प्रोत्साहित किया है। उन्होंने रेलवे, राजमार्ग, विमानन, समुद्री, रसद और अन्य अवसंरचना क्षेत्रों में क्षमता विकास में जीएसवी की बढ़ती भूमिका को रेखांकित किया।

सीबीसी की सदस्य (प्रशासन) डॉ. अलका मित्तल ने वक्ताओं, उद्योग विशेषज्ञों और सीपीएसई प्रतिभागियों के बीच हुई स्पष्ट चर्चाओं पर संतोष व्यक्त किया। उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि परियोजनाओं में देरी के कारणों की पहचान करना और संस्कृति, अनुशासन, नीतिगत सहयोग तथा प्रौद्योगिकी के माध्यम से उन्हें सुधारना इस सम्मेलन का केंद्रीय उद्देश्य था।

आगे की योजना

डॉ. मित्तल ने घोषणा की कि सीबीसी, जीएसवी के साथ मिलकर इस सम्मेलन में प्राप्त सुझावों के आधार पर सर्वोत्तम कार्यप्रणालियों का एक 'भारत सीपीएसई संकलन' प्रकाशित करेगा। यह संकलन भविष्य में सीपीएसई सुधारों के लिए एक संदर्भ दस्तावेज़ के रूप में काम करेगा। गौरतलब है कि यह ऐसे समय में आया है जब सरकार सार्वजनिक उपक्रमों की परिचालन दक्षता और जवाबदेही बढ़ाने पर विशेष बल दे रही है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि 'भारत सीपीएसई संकलन' जैसे दस्तावेज़ केवल अलमारियों की शोभा बनते हैं या वास्तव में परियोजना देरी की संस्कृति को बदलते हैं। भारत के बड़े सार्वजनिक उपक्रमों में भूमि अधिग्रहण और अनुबंध प्रबंधन की समस्याएँ दशकों पुरानी हैं और इन पर पहले भी कई समितियाँ बन चुकी हैं। जब तक सुझावों को बाध्यकारी प्रदर्शन मानकों से नहीं जोड़ा जाता, तब तक ये सम्मेलन सुधार की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम तो हैं, पर पर्याप्त नहीं।
RashtraPress
26 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सीपीएसई परामर्श सम्मेलन 2026 क्या था और इसका उद्देश्य क्या था?
यह 26 जुलाई 2026 को वडोदरा में आयोजित एक राष्ट्रीय स्तर का सम्मेलन था, जिसका उद्देश्य ऊर्जा और खनन क्षेत्र के सीपीएसई में परियोजना क्रियान्वयन, परिसंपत्ति प्रबंधन और संगठनात्मक उत्कृष्टता को सुदृढ़ करना था। इसमें विकसित भारत 2047 के लक्ष्यों के अनुरूप एक कार्यान्वयन योग्य सुधार एजेंडा तैयार करने पर ध्यान केंद्रित किया गया।
इस सम्मेलन का आयोजन किसने किया और कौन-कौन से संगठन शामिल थे?
सम्मेलन का संयुक्त आयोजन क्षमता विकास आयोग (सीबीसी) और सार्वजनिक उद्यम विभाग (डीपीई), वित्त मंत्रालय ने किया। गति शक्ति विश्वविद्यालय (जीएसवी) स्ट्रैटेजिक नॉलेज पार्टनर था। एनटीपीसी, कोल इंडिया, ओएनजीसी, इंडियन ऑयल, गेल, सेल और पावर ग्रिड सहित 19 सीपीएसई के 39 प्रतिनिधियों ने भाग लिया।
सम्मेलन में किन प्रमुख विषयों पर चर्चा हुई?
सम्मेलन में योजना निर्माण, विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर), अनुबंध प्रबंधन, भूमि अधिग्रहण, परिसंपत्ति की अवधि प्रबंधन, डीप टेक प्रौद्योगिकी को अपनाने और पीएम गति शक्ति प्लेटफॉर्म के उपयोग पर विस्तृत चर्चा हुई। परियोजनाओं में देरी के कारणों और उनके समाधान पर विशेष ध्यान दिया गया।
सीबीसी और जीएसवी आगे क्या कदम उठाएँगे?
सीबीसी की सदस्य (प्रशासन) डॉ. अलका मित्तल ने घोषणा की कि सीबीसी और जीएसवी मिलकर सम्मेलन में प्राप्त सुझावों के आधार पर सर्वोत्तम कार्यप्रणालियों का एक 'भारत सीपीएसई संकलन' प्रकाशित करेंगे। यह संकलन भविष्य में सीपीएसई सुधारों के लिए एक संदर्भ दस्तावेज़ के रूप में काम करेगा।
यह सम्मेलन विकसित भारत 2047 के लक्ष्यों से कैसे जुड़ा है?
सम्मेलन में नीति निर्माताओं और उद्योग विशेषज्ञों ने विकसित भारत 2047 के समर्थन में सर्वोत्तम व्यवस्थाओं का आदान-प्रदान किया और आगे की राह तय की। सार्वजनिक उपक्रमों की परिचालन दक्षता और जवाबदेही को बढ़ाना इस लक्ष्य की प्राप्ति में अहम भूमिका निभाता है।
राष्ट्र प्रेस
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