शांति अधिनियम 2025 के क्रियान्वयन पर नीति आयोग की बड़ी बैठक, परमाणु ऊर्जा नीति पर मंथन
सारांश
मुख्य बातें
नीति आयोग ने 11 जुलाई 2025 को नई दिल्ली स्थित डॉ. अंबेडकर इंटरनेशनल सेंटर के समरसता ऑडिटोरियम में शांति अधिनियम, 2025 के प्रभावी कार्यान्वयन को लेकर एक उच्चस्तरीय हितधारक विचार-विमर्श बैठक आयोजित की। इस बैठक में सरकार, शोध संस्थानों, उद्योग जगत और नियामक निकायों के वरिष्ठ प्रतिनिधियों ने संयुक्त रूप से अधिनियम के संस्थागत ढाँचे और कार्ययोजना पर विस्तृत चर्चा की।
बैठक का नेतृत्व और प्रमुख उपस्थिति
बैठक की अध्यक्षता नीति आयोग के सदस्य प्रो. अभय करंदीकर ने की। इसमें विद्युत मंत्रालय के सचिव पंकज अग्रवाल, केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण के अध्यक्ष घनश्याम प्रसाद, एनटीपीसी लिमिटेड के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक गुरदीप सिंह, नीति आयोग की कार्यक्रम निदेशक डॉ. अंशु भारद्वाज, नीति आयोग के सलाहकार राजनाथ राम, परमाणु ऊर्जा विभाग की एसएसएसडी प्रमुख डॉ. गरिमा शर्मा तथा परमाणु ऊर्जा नियामक बोर्ड के निदेशक हरि कुमार समेत अनेक वरिष्ठ अधिकारी एवं विशेषज्ञ शामिल रहे।
कानूनी और नियामकीय ढाँचे पर चर्चा
बैठक में शांति अधिनियम, 2025 के अंतर्गत तैयार किए जाने वाले नियमों, नियामकीय प्रक्रियाओं और विदेशी निवेश से जुड़े प्रावधानों पर विशेषज्ञों ने अपने सुझाव प्रस्तुत किए। घरेलू हितों की सुरक्षा सुनिश्चित करते हुए विदेशी पूँजी आकर्षित करने के उपायों पर भी विचार-विमर्श हुआ। गौरतलब है कि यह अधिनियम भारत के परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में निजी और विदेशी भागीदारी की राह खोलने की दिशा में एक महत्त्वपूर्ण नीतिगत कदम माना जा रहा है।
वित्तीय व्यवस्था और जोखिम प्रबंधन
परमाणु ऊर्जा परियोजनाओं के लिए वित्तीय व्यवस्था, बीमा प्रावधानों और जोखिम न्यूनीकरण के उपायों पर भी गहन मंथन किया गया। विशेषज्ञों ने दीर्घकालिक परियोजनाओं के लिए सुदृढ़ बीमा तंत्र विकसित करने, जन-जागरूकता अभियान चलाने और स्थानीय समुदायों में विश्वास निर्माण को प्राथमिकता देने की आवश्यकता पर बल दिया।
घरेलू विनिर्माण और मानव संसाधन विकास
हितधारकों ने घरेलू विनिर्माण क्षमता बढ़ाने, परियोजनाओं की परिचालन तैयारियों को सुदृढ़ करने और कुशल मानव संसाधन विकसित करने की ज़रूरत को रेखांकित किया। मज़बूत आपूर्ति शृंखला स्थापित करने, उद्योग के विस्तार को प्रोत्साहन देने और क्षमता निर्माण कार्यक्रमों के ज़रिये प्रशिक्षित कार्यबल तैयार करने पर सहमति बनी।
आगे की राह
नीति आयोग ने स्पष्ट किया कि इस बैठक में प्राप्त सुझावों को शांति अधिनियम, 2025 के लिए तैयार किए जा रहे संस्थागत ढाँचे में समाहित किया जाएगा, जिससे अधिनियम का क्रियान्वयन अधिक प्रभावी और समावेशी हो सके। यह परामर्श प्रक्रिया भारत की परमाणु ऊर्जा महत्त्वाकांक्षाओं को ज़मीनी स्तर पर साकार करने की दिशा में अगला ठोस कदम मानी जा रही है।