11 जुलाई 2026
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शांति अधिनियम 2025 के क्रियान्वयन पर नीति आयोग की बड़ी बैठक, परमाणु ऊर्जा नीति पर मंथन

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शांति अधिनियम 2025 के क्रियान्वयन पर नीति आयोग की बड़ी बैठक, परमाणु ऊर्जा नीति पर मंथन

सारांश

नीति आयोग ने 11 जुलाई को शांति अधिनियम, 2025 के क्रियान्वयन पर उच्चस्तरीय विचार-विमर्श किया। विद्युत मंत्रालय, एनटीपीसी, परमाणु ऊर्जा विभाग और नियामक निकायों के प्रमुख अधिकारियों ने नियामकीय ढाँचे, विदेशी निवेश और मानव संसाधन विकास पर सुझाव दिए।

मुख्य बातें

नीति आयोग ने 11 जुलाई 2025 को डॉ.
अंबेडकर इंटरनेशनल सेंटर, नई दिल्ली में शांति अधिनियम, 2025 के क्रियान्वयन पर हितधारक बैठक आयोजित की।
बैठक की अध्यक्षता नीति आयोग के सदस्य प्रो.
अभय करंदीकर ने की; विद्युत मंत्रालय सचिव पंकज अग्रवाल और एनटीपीसी के CMD गुरदीप सिंह समेत वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।
अधिनियम के तहत नियामकीय प्रक्रियाओं, विदेशी निवेश प्रावधानों और घरेलू हितों की सुरक्षा पर विशेषज्ञों ने सुझाव दिए।
परमाणु ऊर्जा परियोजनाओं के लिए बीमा व्यवस्था, जोखिम प्रबंधन और दीर्घकालिक वित्तीय तंत्र पर विचार-विमर्श हुआ।
हितधारकों ने घरेलू विनिर्माण क्षमता, आपूर्ति शृंखला और प्रशिक्षित कार्यबल विकास को प्राथमिकता देने पर ज़ोर दिया।

नीति आयोग ने 11 जुलाई 2025 को नई दिल्ली स्थित डॉ. अंबेडकर इंटरनेशनल सेंटर के समरसता ऑडिटोरियम में शांति अधिनियम, 2025 के प्रभावी कार्यान्वयन को लेकर एक उच्चस्तरीय हितधारक विचार-विमर्श बैठक आयोजित की। इस बैठक में सरकार, शोध संस्थानों, उद्योग जगत और नियामक निकायों के वरिष्ठ प्रतिनिधियों ने संयुक्त रूप से अधिनियम के संस्थागत ढाँचे और कार्ययोजना पर विस्तृत चर्चा की।

बैठक का नेतृत्व और प्रमुख उपस्थिति

बैठक की अध्यक्षता नीति आयोग के सदस्य प्रो. अभय करंदीकर ने की। इसमें विद्युत मंत्रालय के सचिव पंकज अग्रवाल, केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण के अध्यक्ष घनश्याम प्रसाद, एनटीपीसी लिमिटेड के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक गुरदीप सिंह, नीति आयोग की कार्यक्रम निदेशक डॉ. अंशु भारद्वाज, नीति आयोग के सलाहकार राजनाथ राम, परमाणु ऊर्जा विभाग की एसएसएसडी प्रमुख डॉ. गरिमा शर्मा तथा परमाणु ऊर्जा नियामक बोर्ड के निदेशक हरि कुमार समेत अनेक वरिष्ठ अधिकारी एवं विशेषज्ञ शामिल रहे।

कानूनी और नियामकीय ढाँचे पर चर्चा

बैठक में शांति अधिनियम, 2025 के अंतर्गत तैयार किए जाने वाले नियमों, नियामकीय प्रक्रियाओं और विदेशी निवेश से जुड़े प्रावधानों पर विशेषज्ञों ने अपने सुझाव प्रस्तुत किए। घरेलू हितों की सुरक्षा सुनिश्चित करते हुए विदेशी पूँजी आकर्षित करने के उपायों पर भी विचार-विमर्श हुआ। गौरतलब है कि यह अधिनियम भारत के परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में निजी और विदेशी भागीदारी की राह खोलने की दिशा में एक महत्त्वपूर्ण नीतिगत कदम माना जा रहा है।

वित्तीय व्यवस्था और जोखिम प्रबंधन

परमाणु ऊर्जा परियोजनाओं के लिए वित्तीय व्यवस्था, बीमा प्रावधानों और जोखिम न्यूनीकरण के उपायों पर भी गहन मंथन किया गया। विशेषज्ञों ने दीर्घकालिक परियोजनाओं के लिए सुदृढ़ बीमा तंत्र विकसित करने, जन-जागरूकता अभियान चलाने और स्थानीय समुदायों में विश्वास निर्माण को प्राथमिकता देने की आवश्यकता पर बल दिया।

घरेलू विनिर्माण और मानव संसाधन विकास

हितधारकों ने घरेलू विनिर्माण क्षमता बढ़ाने, परियोजनाओं की परिचालन तैयारियों को सुदृढ़ करने और कुशल मानव संसाधन विकसित करने की ज़रूरत को रेखांकित किया। मज़बूत आपूर्ति शृंखला स्थापित करने, उद्योग के विस्तार को प्रोत्साहन देने और क्षमता निर्माण कार्यक्रमों के ज़रिये प्रशिक्षित कार्यबल तैयार करने पर सहमति बनी।

आगे की राह

नीति आयोग ने स्पष्ट किया कि इस बैठक में प्राप्त सुझावों को शांति अधिनियम, 2025 के लिए तैयार किए जा रहे संस्थागत ढाँचे में समाहित किया जाएगा, जिससे अधिनियम का क्रियान्वयन अधिक प्रभावी और समावेशी हो सके। यह परामर्श प्रक्रिया भारत की परमाणु ऊर्जा महत्त्वाकांक्षाओं को ज़मीनी स्तर पर साकार करने की दिशा में अगला ठोस कदम मानी जा रही है।

संपादकीय दृष्टिकोण

2025 भारत के परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में दशकों पुरानी नीतिगत जड़ता को तोड़ने का प्रयास है, लेकिन परामर्श बैठकों से क्रियान्वयन तक की दूरी भारत में अक्सर लंबी साबित होती है। विदेशी निवेश और घरेलू हितों के बीच संतुलन का सवाल केंद्रीय है — और यही वह बिंदु है जहाँ नीति की मंशा और ज़मीनी हकीकत अलग हो सकती है। नियामकीय ढाँचे की स्पष्टता और बीमा व्यवस्था की पर्याप्तता के बिना, निजी और विदेशी निवेशक सतर्क रहेंगे। असली कसौटी यह है कि बैठक में उठे सुझाव संस्थागत नियमों में कितनी तेज़ी और पारदर्शिता से समाहित होते हैं।
RashtraPress
11 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

शांति अधिनियम, 2025 क्या है?
शांति अधिनियम, 2025 भारत सरकार का एक नीतिगत कदम है जो परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में निजी और विदेशी भागीदारी को सुगम बनाने के लिए बनाया गया है। यह अधिनियम नियामकीय प्रक्रियाओं, विदेशी निवेश प्रावधानों और परियोजना संचालन के लिए संस्थागत ढाँचा तय करता है।
नीति आयोग की इस बैठक में कौन-कौन शामिल हुए?
बैठक में प्रो. अभय करंदीकर (नीति आयोग सदस्य), पंकज अग्रवाल (विद्युत मंत्रालय सचिव), घनश्याम प्रसाद (केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण अध्यक्ष), गुरदीप सिंह (एनटीपीसी CMD), डॉ. गरिमा शर्मा (परमाणु ऊर्जा विभाग) और हरि कुमार (परमाणु ऊर्जा नियामक बोर्ड) समेत वरिष्ठ अधिकारी व विशेषज्ञ उपस्थित रहे।
बैठक में किन प्रमुख विषयों पर चर्चा हुई?
बैठक में शांति अधिनियम के तहत नियामकीय प्रक्रियाएँ, विदेशी निवेश प्रावधान, परमाणु परियोजनाओं के लिए बीमा और वित्तीय व्यवस्था, घरेलू विनिर्माण क्षमता और कुशल मानव संसाधन विकास जैसे विषयों पर विस्तृत मंथन हुआ।
इस बैठक के सुझावों का उपयोग कैसे होगा?
नीति आयोग के अनुसार, बैठक में प्राप्त सुझावों को शांति अधिनियम, 2025 के क्रियान्वयन के लिए तैयार किए जा रहे संस्थागत ढाँचे में शामिल किया जाएगा। इससे अधिनियम का कार्यान्वयन अधिक प्रभावी और समावेशी बनाने का लक्ष्य है।
परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में विदेशी निवेश पर क्या रुख सामने आया?
विशेषज्ञों ने घरेलू हितों की सुरक्षा सुनिश्चित करते हुए विदेशी निवेश आकर्षित करने के उपायों पर सहमति जताई। इसके साथ ही स्थानीय समुदायों में विश्वास निर्माण और जन-जागरूकता को भी आवश्यक बताया गया।
राष्ट्र प्रेस
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