IEA का अनुमान: अक्टूबर तक वैश्विक तेल मांग 80 लाख बैरल/दिन बढ़ेगी, खाड़ी में शांति कच्चे तेल बाज़ार की कुंजी
सारांश
मुख्य बातें
अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA) ने अपनी ताज़ा 'ऑयल मार्केट रिपोर्ट' में कहा है कि वैश्विक कच्चे तेल की मांग में सुधार के संकेत मिलने लगे हैं, लेकिन बाज़ार को पूरी तरह स्थिर करने के लिए खाड़ी क्षेत्र में स्थायी शांति अनिवार्य है। मई 2026 में वैश्विक तेल मांग घटकर 9.79 करोड़ बैरल प्रतिदिन रह गई थी — जो एक साल पहले की तुलना में 53 लाख बैरल प्रतिदिन कम थी। एजेंसी के अनुसार, अक्टूबर 2026 तक यह मांग मई के निचले स्तर से 80 लाख बैरल प्रतिदिन से अधिक बढ़ जाएगी और फरवरी के बाद पहली बार 2025 के स्तर को पार कर जाएगी।
मांग सुधार के पीछे क्या कारण हैं
IEA के अनुसार, गर्मियों में यात्रा की बढ़ती रफ़्तार ईंधन की खपत को गति दे रही है। इसके साथ ही, पहले से दबी हुई मांग के बाज़ार में वापस आने से तेल खपत को अतिरिक्त बल मिलने की उम्मीद है। हालाँकि, एजेंसी ने यह भी अनुमान लगाया है कि 2026 में वैश्विक तेल मांग में 10 लाख बैरल प्रतिदिन की कमी आ सकती है, जबकि 2027 में मांग 20 लाख बैरल प्रतिदिन बढ़ने की संभावना है।
खाड़ी संघर्ष और बाज़ार पर असर
IEA ने स्पष्ट किया कि इस सप्ताह खाड़ी क्षेत्र में फिर से हुई गोलीबारी यह दर्शाती है कि बिना स्थायी शांति समझौते के कच्चे तेल के बाज़ार में सामान्य स्थिति बहाल करना कठिन होगा। एजेंसी के अनुसार, साल के अंत तक वैश्विक तेल बाज़ार में आपूर्ति मांग से अधिक हो सकती है — लेकिन यह अनुमान इस बात पर निर्भर करेगा कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से तेल टैंकरों की आवाजाही धीरे-धीरे सामान्य होती है या नहीं।
यदि यह मार्ग सुगम होता है, तो तेल उत्पादक देश उत्पादन बढ़ा सकेंगे और मध्य पूर्व समेत अन्य क्षेत्रों की रिफाइनरियाँ पेट्रोलियम उत्पादों की सप्लाई सामान्य रूप से शुरू कर सकेंगी।
वैश्विक तेल भंडार की स्थिति
जून 2026 में वैश्विक तेल भंडार चार महीने बाद पहली बार 2.1 करोड़ बैरल बढ़ा, जो मुख्यतः समुद्र में मौजूद तेल की मात्रा बढ़ने से हुआ। इससे जमीन पर मौजूद भंडार में आई कमी की भरपाई हो सकी।
गौरतलब है कि मई में 7.3 करोड़ बैरल की गिरावट के बाद जून में OECD देशों के कुल तेल भंडार में 6.2 करोड़ बैरल की और कमी आई — जिसमें से लगभग 4.4 करोड़ बैरल सरकारी भंडार से तेल जारी किए जाने के कारण रही। गैर-OECD देशों के कच्चे तेल के भंडार में भी 3.7 करोड़ बैरल की गिरावट दर्ज हुई, जिसमें अकेले चीन में 4.1 करोड़ बैरल की कमी शामिल रही।
कीमतों में उतार-चढ़ाव
IEA के अनुसार, जून में बेंचमार्क कच्चे तेल की कीमतों में लगातार गिरावट जारी रही और युद्ध के दौरान हुई पूरी बढ़त समाप्त हो गई। नॉर्थ सी डेटेड क्रूड की कीमत एक महीने में 22 डॉलर प्रति बैरल गिरकर लगभग 68 डॉलर प्रति बैरल रह गई। हालाँकि, 7-8 जुलाई को युद्धविराम के उल्लंघन के बाद कीमतों में फिर से तेज़ी आई और रिपोर्ट तैयार होने के समय यह लगभग 77 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रही थी।
रिफाइनरी संचालन और रूस का दबाव
IEA ने कहा कि भले ही बाज़ार में कच्चे तेल की आपूर्ति बढ़ी है, रिफाइनरियों का संचालन और पेट्रोलियम उत्पादों की सप्लाई अभी भी धीमी गति से सामान्य हो रही है। जून में खाड़ी देशों से रिफाइंड पेट्रोलियम उत्पादों और LPG का निर्यात युद्ध से पहले के स्तर के आधे से भी कम रहा, जबकि कच्चे तेल का निर्यात फरवरी के स्तर के लगभग तीन-चौथाई तक पहुँचा।
इसके अलावा, यूक्रेन द्वारा रूस की रिफाइनरियों और निर्यात ढाँचे पर बढ़ते हमलों ने वैश्विक पेट्रोलियम उत्पाद बाज़ार पर अतिरिक्त दबाव बना दिया है, जिससे रूस के निर्यात और घरेलू ईंधन आपूर्ति दोनों प्रभावित हुई हैं। आने वाले महीनों में खाड़ी की प्रमुख निर्यात रिफाइनरियों से लोडिंग की बहाली और भू-राजनीतिक स्थिरता ही वैश्विक ऊर्जा बाज़ार की दिशा तय करेगी।