11 जुलाई 2026
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IEA का अनुमान: अक्टूबर तक वैश्विक तेल मांग 80 लाख बैरल/दिन बढ़ेगी, खाड़ी में शांति कच्चे तेल बाज़ार की कुंजी

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IEA का अनुमान: अक्टूबर तक वैश्विक तेल मांग 80 लाख बैरल/दिन बढ़ेगी, खाड़ी में शांति कच्चे तेल बाज़ार की कुंजी

सारांश

IEA की ताज़ा रिपोर्ट एक विरोधाभासी तस्वीर पेश करती है — मांग सुधर रही है, लेकिन खाड़ी में गोलीबारी जारी है। अक्टूबर तक 80 लाख बैरल/दिन की बढ़त का अनुमान है, पर बिना स्थायी युद्धविराम के यह संख्या महज़ एक अनुमान ही रहेगी।

मुख्य बातें

IEA के अनुसार मई 2026 में वैश्विक तेल मांग 9.79 करोड़ बैरल प्रतिदिन — एक साल पहले से 53 लाख बैरल/दिन कम।
अक्टूबर 2026 तक मांग 80 लाख बैरल/दिन से अधिक बढ़ने का अनुमान; फरवरी के बाद पहली बार 2025 स्तर से ऊपर।
जून 2026 में वैश्विक तेल भंडार चार महीने बाद पहली बार 2.1 करोड़ बैरल बढ़ा।
नॉर्थ सी डेटेड क्रूड एक महीने में 22 डॉलर/बैरल गिरकर 68 डॉलर पर आया; 7-8 जुलाई के बाद 77 डॉलर पर वापस।
खाड़ी से रिफाइंड उत्पाद निर्यात युद्ध-पूर्व स्तर के आधे से कम ; कच्चे तेल का निर्यात तीन-चौथाई स्तर पर।
यूक्रेन के रूस की रिफाइनरियों पर हमलों से वैश्विक पेट्रोलियम उत्पाद बाज़ार पर अतिरिक्त दबाव।

अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA) ने अपनी ताज़ा 'ऑयल मार्केट रिपोर्ट' में कहा है कि वैश्विक कच्चे तेल की मांग में सुधार के संकेत मिलने लगे हैं, लेकिन बाज़ार को पूरी तरह स्थिर करने के लिए खाड़ी क्षेत्र में स्थायी शांति अनिवार्य है। मई 2026 में वैश्विक तेल मांग घटकर 9.79 करोड़ बैरल प्रतिदिन रह गई थी — जो एक साल पहले की तुलना में 53 लाख बैरल प्रतिदिन कम थी। एजेंसी के अनुसार, अक्टूबर 2026 तक यह मांग मई के निचले स्तर से 80 लाख बैरल प्रतिदिन से अधिक बढ़ जाएगी और फरवरी के बाद पहली बार 2025 के स्तर को पार कर जाएगी।

मांग सुधार के पीछे क्या कारण हैं

IEA के अनुसार, गर्मियों में यात्रा की बढ़ती रफ़्तार ईंधन की खपत को गति दे रही है। इसके साथ ही, पहले से दबी हुई मांग के बाज़ार में वापस आने से तेल खपत को अतिरिक्त बल मिलने की उम्मीद है। हालाँकि, एजेंसी ने यह भी अनुमान लगाया है कि 2026 में वैश्विक तेल मांग में 10 लाख बैरल प्रतिदिन की कमी आ सकती है, जबकि 2027 में मांग 20 लाख बैरल प्रतिदिन बढ़ने की संभावना है।

खाड़ी संघर्ष और बाज़ार पर असर

IEA ने स्पष्ट किया कि इस सप्ताह खाड़ी क्षेत्र में फिर से हुई गोलीबारी यह दर्शाती है कि बिना स्थायी शांति समझौते के कच्चे तेल के बाज़ार में सामान्य स्थिति बहाल करना कठिन होगा। एजेंसी के अनुसार, साल के अंत तक वैश्विक तेल बाज़ार में आपूर्ति मांग से अधिक हो सकती है — लेकिन यह अनुमान इस बात पर निर्भर करेगा कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से तेल टैंकरों की आवाजाही धीरे-धीरे सामान्य होती है या नहीं।

यदि यह मार्ग सुगम होता है, तो तेल उत्पादक देश उत्पादन बढ़ा सकेंगे और मध्य पूर्व समेत अन्य क्षेत्रों की रिफाइनरियाँ पेट्रोलियम उत्पादों की सप्लाई सामान्य रूप से शुरू कर सकेंगी।

वैश्विक तेल भंडार की स्थिति

जून 2026 में वैश्विक तेल भंडार चार महीने बाद पहली बार 2.1 करोड़ बैरल बढ़ा, जो मुख्यतः समुद्र में मौजूद तेल की मात्रा बढ़ने से हुआ। इससे जमीन पर मौजूद भंडार में आई कमी की भरपाई हो सकी।

गौरतलब है कि मई में 7.3 करोड़ बैरल की गिरावट के बाद जून में OECD देशों के कुल तेल भंडार में 6.2 करोड़ बैरल की और कमी आई — जिसमें से लगभग 4.4 करोड़ बैरल सरकारी भंडार से तेल जारी किए जाने के कारण रही। गैर-OECD देशों के कच्चे तेल के भंडार में भी 3.7 करोड़ बैरल की गिरावट दर्ज हुई, जिसमें अकेले चीन में 4.1 करोड़ बैरल की कमी शामिल रही।

कीमतों में उतार-चढ़ाव

IEA के अनुसार, जून में बेंचमार्क कच्चे तेल की कीमतों में लगातार गिरावट जारी रही और युद्ध के दौरान हुई पूरी बढ़त समाप्त हो गई। नॉर्थ सी डेटेड क्रूड की कीमत एक महीने में 22 डॉलर प्रति बैरल गिरकर लगभग 68 डॉलर प्रति बैरल रह गई। हालाँकि, 7-8 जुलाई को युद्धविराम के उल्लंघन के बाद कीमतों में फिर से तेज़ी आई और रिपोर्ट तैयार होने के समय यह लगभग 77 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रही थी।

रिफाइनरी संचालन और रूस का दबाव

IEA ने कहा कि भले ही बाज़ार में कच्चे तेल की आपूर्ति बढ़ी है, रिफाइनरियों का संचालन और पेट्रोलियम उत्पादों की सप्लाई अभी भी धीमी गति से सामान्य हो रही है। जून में खाड़ी देशों से रिफाइंड पेट्रोलियम उत्पादों और LPG का निर्यात युद्ध से पहले के स्तर के आधे से भी कम रहा, जबकि कच्चे तेल का निर्यात फरवरी के स्तर के लगभग तीन-चौथाई तक पहुँचा।

इसके अलावा, यूक्रेन द्वारा रूस की रिफाइनरियों और निर्यात ढाँचे पर बढ़ते हमलों ने वैश्विक पेट्रोलियम उत्पाद बाज़ार पर अतिरिक्त दबाव बना दिया है, जिससे रूस के निर्यात और घरेलू ईंधन आपूर्ति दोनों प्रभावित हुई हैं। आने वाले महीनों में खाड़ी की प्रमुख निर्यात रिफाइनरियों से लोडिंग की बहाली और भू-राजनीतिक स्थिरता ही वैश्विक ऊर्जा बाज़ार की दिशा तय करेगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि एक भू-राजनीतिक समझौते पर टिकी है। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज — जिससे दुनिया की लगभग 20% तेल आपूर्ति गुज़रती है — की अनिश्चितता को देखते हुए 'अक्टूबर तक सामान्यीकरण' का अनुमान बेहद आशावादी लगता है। इसके साथ ही यूक्रेन-रूस संघर्ष का रिफाइनरी बुनियादी ढाँचे पर असर एक ऐसा कारक है जिसे बाज़ार अभी पूरी तरह नहीं आँक रहा। भारत जैसे बड़े तेल आयातक देशों के लिए यह दोहरा भू-राजनीतिक जोखिम — खाड़ी और रूस दोनों तरफ से — ऊर्जा सुरक्षा की रणनीति पर पुनर्विचार की माँग करता है।
RashtraPress
11 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

IEA की ताज़ा ऑयल मार्केट रिपोर्ट में क्या कहा गया है?
IEA ने कहा है कि वैश्विक कच्चे तेल की मांग में सुधार शुरू हो गया है और अक्टूबर 2026 तक मांग मई के निचले स्तर से 80 लाख बैरल प्रतिदिन से अधिक बढ़ जाएगी। साथ ही एजेंसी ने स्पष्ट किया कि बाज़ार को पूरी तरह स्थिर करने के लिए खाड़ी क्षेत्र में स्थायी शांति ज़रूरी है।
खाड़ी क्षेत्र में शांति का कच्चे तेल बाज़ार से क्या संबंध है?
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से तेल टैंकरों की आवाजाही सामान्य होने पर ही तेल उत्पादक देश उत्पादन बढ़ा सकेंगे और मध्य पूर्व की रिफाइनरियाँ पेट्रोलियम उत्पादों की सप्लाई बहाल कर सकेंगी। IEA के अनुसार, इस सप्ताह खाड़ी में फिर से हुई गोलीबारी दिखाती है कि बिना स्थायी युद्धविराम के बाज़ार सामान्य नहीं होगा।
जून 2026 में वैश्विक तेल भंडार की क्या स्थिति रही?
जून 2026 में वैश्विक तेल भंडार चार महीने बाद पहली बार 2.1 करोड़ बैरल बढ़ा, जो मुख्यतः समुद्र में मौजूद तेल की मात्रा बढ़ने से हुआ। हालाँकि OECD देशों के भंडार में 6.2 करोड़ बैरल और गैर-OECD देशों में 3.7 करोड़ बैरल की कमी दर्ज हुई।
कच्चे तेल की कीमतें हाल में किस स्तर पर हैं?
नॉर्थ सी डेटेड क्रूड की कीमत जून में एक महीने में 22 डॉलर प्रति बैरल गिरकर लगभग 68 डॉलर प्रति बैरल रह गई। 7-8 जुलाई को युद्धविराम उल्लंघन के बाद कीमतें फिर बढ़ीं और रिपोर्ट तैयार होने के समय लगभग 77 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार हो रहा था।
रूस-यूक्रेन संघर्ष का वैश्विक तेल बाज़ार पर क्या असर पड़ रहा है?
यूक्रेन द्वारा रूस की रिफाइनरियों और निर्यात ढाँचे पर बढ़ते हमलों ने वैश्विक पेट्रोलियम उत्पाद बाज़ार पर अतिरिक्त दबाव बनाया है। इससे रूस के निर्यात और घरेलू ईंधन आपूर्ति दोनों प्रभावित हुई हैं, जो खाड़ी संकट के साथ मिलकर बाज़ार की अनिश्चितता को और बढ़ा रहे हैं।
राष्ट्र प्रेस
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