अफगानिस्तान में बाढ़-भूस्खलन से 10 की मौत, 14 प्रांतों में 645 घर क्षतिग्रस्त
सारांश
मुख्य बातें
अफगानिस्तान में पिछले 48 घंटों के दौरान मूसलाधार बारिश, अचानक बाढ़, भूस्खलन, तेज़ आँधी और आकाशीय बिजली गिरने की घटनाओं ने 14 प्रांतों में व्यापक तबाही मचाई है — 10 लोगों की मौत हो गई और 6 अन्य घायल हुए। राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एनडीएमए) के आँकड़ों के अनुसार, 645 मकान पूरी तरह या आंशिक रूप से तबाह हो गए हैं और करीब 4,000 एकड़ कृषि भूमि बाढ़ की चपेट में आ गई है।
मुख्य घटनाक्रम
एनडीएमए के उप प्रवक्ता ताज मोहम्मद हेमत के अनुसार, ये आपदाएँ एक साथ देश के 14 प्रांतों में घटीं। लगातार बारिश से 131 मकान पूरी तरह नष्ट हो गए, जबकि 332 मकान आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त हुए। इसके अलावा ग्रामीण इलाकों की लगभग 40 किलोमीटर लंबी सड़कें भी बह गईं, जिससे कई क्षेत्रों में आवागमन ठप हो गया।
एनडीएमए प्रकाशन के निदेशक मोहम्मद यूसुफ हमद ने बताया कि केवल शुक्रवार से शनिवार के बीच के 24 घंटों में प्राकृतिक आपदाओं के कारण 9 लोगों की मौत हुई और 1 व्यक्ति घायल हुआ। कई प्रांतों में सार्वजनिक बुनियादी ढाँचे को भी भारी नुकसान पहुँचा है।
आम जनता पर असर
बाढ़ में 4,010 एकड़ से अधिक कृषि भूमि पर खड़ी फसलें नष्ट हो गईं, जिससे किसान परिवारों की आजीविका पर गहरी चोट पड़ी है। प्रभावित परिवारों ने सरकार और मानवीय सहायता संगठनों से तत्काल भोजन, अस्थायी आश्रय और राहत सामग्री उपलब्ध कराने की माँग की है। स्थानीय लोगों का कहना है कि बाढ़ ने घर और खेती दोनों बर्बाद कर दिए हैं, जिससे उनके पास जीवनयापन का कोई साधन नहीं बचा।
पृष्ठभूमि और पिछली घटनाएँ
यह ऐसे समय में आया है जब इसी सप्ताह सोमवार को पूर्वी नूरिस्तान प्रांत में भी भारी बारिश के बाद अचानक आई बाढ़ में करीब 20 लोगों की मौत हो चुकी थी और कई अन्य घायल हुए थे। गौरतलब है कि अफगानिस्तान हर मानसून सीज़न में विनाशकारी बाढ़ और भूस्खलन का सामना करता है, और लंबे समय से चले आ रहे संघर्ष तथा कमज़ोर बुनियादी ढाँचे के कारण राहत कार्य और भी कठिन हो जाता है।
मौसम विभाग की चेतावनी
अफगानिस्तान के मौसम विभाग ने अगले कुछ दिनों में देश के 34 में से 21 प्रांतों में और बारिश होने का अनुमान जताया है। विभाग ने बाढ़ संभावित क्षेत्रों के लिए विशेष चेतावनी जारी करते हुए नागरिकों से सतर्क रहने की अपील की है।
क्या होगा आगे
एनडीएमए और मानवीय सहायता संगठनों पर राहत अभियान तेज़ करने का दबाव बढ़ रहा है। मौसम विभाग की चेतावनी को देखते हुए आने वाले दिनों में हालात और बिगड़ने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।