24 अगस्त 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

अजीत डोभाल का चीन दौरा: सीमा विवाद और ब्रिक्स आमंत्रण पर टिकी नज़रें, विशेषज्ञ वाइल अव्वाद का विश्लेषण

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
अजीत डोभाल का चीन दौरा: सीमा विवाद और ब्रिक्स आमंत्रण पर टिकी नज़रें, विशेषज्ञ वाइल अव्वाद का विश्लेषण

सारांश

NSA अजीत डोभाल का चीन दौरा महज़ कूटनीतिक औपचारिकता नहीं — यह सीमा स्थिरता और ब्रिक्स मंच पर शी जिनपिंग की उपस्थिति सुनिश्चित करने की दोहरी रणनीति है। विशेषज्ञ वाइल अव्वाद के अनुसार, भारत एशिया की दो बड़ी शक्तियों के बीच भरोसे की नींव रखने की कोशिश में है।

मुख्य बातें

NSA अजीत डोभाल 23 अगस्त को चीन दौरे पर रवाना हुए — यात्रा के दो प्रमुख लक्ष्य: सीमा विवाद और ब्रिक्स निमंत्रण ।
विशेषज्ञ वाइल अव्वाद के अनुसार, भारत चीन के साथ स्थिर संबंध बनाए रखने को लेकर 'बहुत उत्सुक' है।
दोनों देशों के बीच 100% सहमति संभव नहीं, लेकिन परस्पर विश्वास बढ़ाने के प्रयास जारी हैं।
ट्रंप की टैरिफ नीति को लेकर अव्वाद ने चेताया — भारत-अमेरिका रणनीतिक संबंधों को नुकसान पहुँचा है।
होर्मुज स्ट्रेट पर ट्रंप के दावों को अव्वाद ने 'काउबॉय डिप्लोमेसी' बताया, वैश्विक स्थिरता के लिए खतरनाक करार दिया।

राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल के सोमवार, 23 अगस्त को प्रस्तावित चीन दौरे को विदेश मामलों के विशेषज्ञ वाइल अव्वाद ने अत्यंत महत्वपूर्ण बताया है। उनके अनुसार, यह यात्रा दो निर्णायक उद्देश्यों को साधने की कोशिश है — लंबित सीमा विवाद को सुलझाना और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग को ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में भाग लेने का औपचारिक निमंत्रण देना।

दौरे के दो प्रमुख उद्देश्य

विशेषज्ञ वाइल अव्वाद ने कहा, "यह दौरा दो वजहों से बहुत अहम है। एक तो आपसी मसलों को सुलझाना, खासकर सीमा से जुड़े मसलों को, और दूसरा शी जिनपिंग को ब्रिक्स समिट में आने के लिए बुलाना, क्योंकि अभी तक यह स्पष्ट नहीं है कि वह आएंगे या नहीं।" उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि भारत के हालिया कूटनीतिक कदम यह दर्शाते हैं कि नई दिल्ली चीन के साथ स्थिर और भरोसेमंद संबंध बनाए रखने को लेकर गंभीर है।

भारत-चीन संबंधों की वर्तमान स्थिति

अव्वाद के अनुसार, दोनों देशों के बीच 100 प्रतिशत सहमति की उम्मीद यथार्थवादी नहीं है और मतभेद बने रहेंगे। फिर भी, उनका मानना है कि एशिया के इन दो बड़े देशों के बीच परस्पर विश्वास बढ़ाने के लिए इस तरह की कूटनीतिक पहल आवश्यक है। गौरतलब है कि 2020 के गलवान संघर्ष के बाद से दोनों देशों के संबंध तनावपूर्ण रहे हैं और हाल के महीनों में सामान्यीकरण की प्रक्रिया धीरे-धीरे आगे बढ़ रही है।

भारत-अमेरिका संबंध और ट्रंप की टैरिफ नीति

भारत-अमेरिका संबंधों पर वाइल अव्वाद ने कहा कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रयासों के बाद दोनों देशों के संबंध धीरे-धीरे सामान्य हो रहे हैं, लेकिन उन्होंने आगाह किया कि ट्रंप पहले ही दोनों देशों के बीच रणनीतिक संबंधों को नुकसान पहुँचा चुके हैं। उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिकी राजदूत इस संबंध को सुधारने की कोशिश में लगे हैं और भारत को अमेरिका का एक अनिवार्य रणनीतिक साझेदार बता रहे हैं।

ट्रंप की टैरिफ नीति पर अव्वाद ने कहा कि पड़ोसी और सहयोगी देशों पर भी टैरिफ लगाने की अमेरिकी नीति भारत सरकार के लिए चिंता का विषय है। उन्होंने कहा, "इससे यह बात साफ होती है कि साथियों के खिलाफ आर्थिक दबाव डालने से कोई अच्छा नतीजा नहीं निकलता — इसके बजाय देशों के बीच भरोसा कम होता है। ट्रंप पहले ही कनाडा के साथ ऐसी स्थिति पैदा कर चुके हैं, और अब कनाडा भी उसी तरह जवाब दे रहा है।"

होर्मुज स्ट्रेट विवाद और 'काउबॉय डिप्लोमेसी'

राष्ट्रपति ट्रंप द्वारा होर्मुज स्ट्रेट की तस्वीरें अमेरिकी क्षेत्र के रूप में साझा किए जाने के मुद्दे पर अव्वाद ने कड़ी आलोचना की। उन्होंने इसे 'काउबॉय डिप्लोमेसी' करार देते हुए कहा, "अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के बजाय, ट्रंप अब इन क्षेत्रों पर अमेरिकी दावा जता रहे हैं।" उनके अनुसार, ट्रंप उन स्थानों पर नियंत्रण चाहते हैं जहाँ तेल, गैस के संसाधन और महत्वपूर्ण व्यापार मार्ग हैं।

अव्वाद ने यह भी कहा कि ईरान के खिलाफ अमेरिका की मौजूदा नीति कभी भी वास्तव में परमाणु मुद्दे पर केंद्रित नहीं थी — इसे इज़रायल ने आगे बढ़ाया और प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने ट्रंप को इस दिशा में धकेला। उनकी राय में, ये घटनाक्रम वैश्विक स्थिरता के लिए गंभीर चुनौती पेश कर रहे हैं।

आगे की राह

डोभाल के इस दौरे के नतीजे भारत की बहुआयामी विदेश नीति की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएंगे — एक ओर चीन के साथ सीमा पर स्थायित्व और दूसरी ओर ब्रिक्स के मंच पर बहुपक्षीय कूटनीति को मज़बूत करना। विशेषज्ञों की नज़र अब इस यात्रा के ठोस परिणामों पर टिकी है।

संपादकीय दृष्टिकोण

चीन और रूस से संतुलन बनाए रखती है — लेकिन यह संतुलन अब पहले से कहीं अधिक कठिन हो गया है। गलवान के बाद सामान्यीकरण की प्रक्रिया धीमी और खंडित रही है, और ब्रिक्स निमंत्रण का दांव तब और जटिल हो जाता है जब शी जिनपिंग की उपस्थिति अनिश्चित हो। साथ ही, ट्रंप की टैरिफ आक्रामकता भारत को यह सोचने पर मजबूर कर रही है कि क्या अमेरिका एक विश्वसनीय दीर्घकालिक साझेदार बना रह सकता है। ऐसे में डोभाल का यह दौरा केवल द्विपक्षीय नहीं, बल्कि भारत की बहुध्रुवीय विश्व में स्थिति को परिभाषित करने का प्रयास है।
RashtraPress
24 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अजीत डोभाल का चीन दौरा क्यों महत्वपूर्ण है?
यह दौरा दो कारणों से अहम है — पहला, भारत-चीन सीमा विवाद पर आगे की बातचीत, और दूसरा, राष्ट्रपति शी जिनपिंग को ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में भाग लेने का औपचारिक निमंत्रण देना। विशेषज्ञ वाइल अव्वाद के अनुसार, यह एशिया की दो बड़ी शक्तियों के बीच भरोसा बढ़ाने की दिशा में एक अहम कदम है।
क्या भारत और चीन के बीच सभी मतभेद सुलझ जाएंगे?
विशेषज्ञ वाइल अव्वाद के अनुसार, दोनों देशों के बीच 100 प्रतिशत सहमति संभव नहीं है और मतभेद बने रहेंगे। हालांकि, भारत के हालिया कदम यह दर्शाते हैं कि नई दिल्ली चीन के साथ स्थिर और टिकाऊ संबंध बनाए रखने को लेकर गंभीर है।
भारत-अमेरिका संबंधों पर ट्रंप की नीतियों का क्या असर पड़ा है?
वाइल अव्वाद के अनुसार, राष्ट्रपति ट्रंप की नीतियों ने भारत-अमेरिका के रणनीतिक संबंधों को नुकसान पहुँचाया है। हालांकि संबंध धीरे-धीरे सामान्य हो रहे हैं, ट्रंप की टैरिफ नीति भारत के लिए चिंता का विषय बनी हुई है।
होर्मुज स्ट्रेट पर ट्रंप के दावों को लेकर विशेषज्ञों की क्या राय है?
वाइल अव्वाद ने ट्रंप के इस रवैये को 'काउबॉय डिप्लोमेसी' करार दिया है। उनके अनुसार, अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों पर अमेरिकी दावा जताना वैश्विक स्थिरता के लिए खतरनाक है और इससे दुनिया रहने के लिए और अधिक असुरक्षित हो रही है।
ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में शी जिनपिंग की भागीदारी को लेकर स्थिति क्या है?
अभी तक यह स्पष्ट नहीं है कि चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में शामिल होंगे या नहीं। डोभाल के दौरे का एक प्रमुख उद्देश्य उन्हें इस सम्मेलन में भाग लेने के लिए औपचारिक रूप से आमंत्रित करना है।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 16 घंटे पहले
  2. 2 महीने पहले
  3. 2 महीने पहले
  4. 2 महीने पहले
  5. 2 महीने पहले
  6. 3 महीने पहले
  7. 8 महीने पहले
  8. 8 महीने पहले