बेन गुरियन एयरपोर्ट क्षमता से भरा, इजरायल ने अमेरिकी सैन्य रिफ्यूलिंग विमानों को और जगह देने से इनकार किया
सारांश
मुख्य बातें
इजरायल के बेन गुरियन अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट पर अमेरिकी सैन्य रिफ्यूलिंग विमानों की बढ़ती तैनाती के कारण यात्री उड़ानें प्रभावित हो रही हैं। इजरायल एयरपोर्ट्स अथॉरिटी ने 22 जुलाई को स्पष्ट किया कि एयरपोर्ट अपनी अधिकतम क्षमता तक पहुँच चुका है और अब एक भी अतिरिक्त रिफ्यूलिंग विमान को समायोजित करना संभव नहीं है। ईरान के साथ जारी सैन्य संघर्ष के बीच यह स्थिति क्षेत्रीय हवाई यातायात के लिए गंभीर व्यवधान का कारण बन सकती है।
मुख्य घटनाक्रम
इजरायल एयरपोर्ट्स अथॉरिटी के महानिदेशक शेरोन केडमी ने इजरायल ब्रॉडकास्टिंग अथॉरिटी के हवाले से कहा कि यदि बेन गुरियन एयरपोर्ट पर अमेरिकी रिफ्यूलिंग विमानों की संख्या और बढ़ती है, तो सभी निर्धारित उड़ानें संचालित करना असंभव हो जाएगा। उन्होंने कहा, "हम उड़ानें रद्द होने से बचाने के लिए हरसंभव कोशिश कर रहे हैं। यहाँ और दूसरी जगहों पर अमेरिकी रिफ्यूलिंग विमान मौजूद हैं। हम वायुसेना के संपर्क में हैं और हर कोई जिम्मेदारी निभा रहा है।"
इससे पहले सोमवार को इजरायल के चैनल-12 ने बताया था कि बेन गुरियन एयरपोर्ट पर अमेरिका के 33 रिफ्यूलिंग विमान तैनात किए जा चुके हैं। यह संख्या और बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।
यात्रियों पर असर
अनुमानों के अनुसार, यदि 7 और विमान पहुँचते हैं और कुल संख्या 40 हो जाती है, तो अगस्त की शुरुआत से रोज़ाना करीब 30 उड़ानें रद्द करनी पड़ सकती हैं। इससे प्रतिदिन लगभग 5,000 यात्री प्रभावित हो सकते हैं। गौरतलब है कि बेन गुरियन एयरपोर्ट इजरायल का प्रमुख अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा है और इसके प्रभावित होने का असर वैश्विक हवाई यातायात पर भी पड़ सकता है।
अमेरिका-ईरान सैन्य अभियान की पृष्ठभूमि
अमेरिकी सेना ने मंगलवार (अमेरिकी समयानुसार रात 8:15 बजे) ईरान पर लगातार 11वीं रात सैन्य हमले किए। सेंटकॉम (CENTCOM) के अनुसार, इन हमलों में ईरान के सैन्य ऑपरेशन सेंटर, समुद्री सैन्य ठिकाने, सैन्य विमानों के हैंगर, ड्रोन स्टोरेज सुविधाएँ और मिलिट्री लॉजिस्टिक्स इंफ्रास्ट्रक्चर को निशाना बनाया गया।
अमेरिका का कहना है कि इन हमलों का उद्देश्य ईरान की उस क्षमता को कमज़ोर करना है जिससे वह होर्मुज जलडमरूमध्य से गुज़रने वाले व्यापारिक जहाज़ों के लिए खतरा बन सके। यह ऐसे समय में आया है जब होर्मुज जलडमरूमध्य से विश्व के तेल व्यापार का एक बड़ा हिस्सा गुज़रता है और किसी भी व्यवधान का वैश्विक ऊर्जा बाज़ार पर सीधा असर पड़ता है।
क्या होगा आगे
बेन गुरियन एयरपोर्ट पर क्षमता संकट और अमेरिकी सैन्य अभियान के बीच तालमेल बिठाना दोनों देशों के लिए कूटनीतिक चुनौती बन गया है। केडमी ने स्पष्ट किया कि इजरायली वायुसेना के साथ समन्वय जारी है, लेकिन यदि स्थिति नहीं बदली तो यात्री उड़ानों पर असर अपरिहार्य होगा। क्षेत्र में सैन्य तनाव कम होने तक यह संकट बना रहने की आशंका है।