क्या अमेरिकी कांग्रेस सदस्यों की चेतावनी: एआई चिप निर्यात भविष्य की सैन्य और आर्थिक ताकत तय करेगा?
सारांश
Key Takeaways
- एआई चिप्स की महत्ता भविष्य की सैन्य और आर्थिक ताकत में है।
- इनका निर्यात रणनीतिक हथियारों के समान सावधानी से नियंत्रित होना चाहिए।
- चीन की सैन्य-नागरिक एकीकरण नीति वैश्विक सुरक्षा को चुनौती दे सकती है।
- आवश्यकता है निरंतर एक्सपोर्ट कंट्रोल की।
- एआई चिप्स की लिमिटेड सप्लाई अमेरिकी उद्योग को कमजोर कर सकती है।
वाशिंगटन, 20 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। अमेरिका के सांसदों ने चेतावनी दी है कि एडवांस्ड आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस चिप्स के निर्यात से जुड़े निर्णय भविष्य की सैन्य और आर्थिक ताकत को प्रभावित कर सकते हैं। इसीलिए संसद में यह बहस तेज हो गई है कि क्या इस तकनीक को सामान्य व्यापारिक सामान की तरह देखा जाए या रणनीतिक हथियारों के रूप में कड़े नियंत्रण में रखा जाए।
पिछले हफ्ते हाउस फॉरेन अफेयर्स कमेटी की सुनवाई में, दोनों पार्टियों के सदस्यों ने कहा कि एआई चिप्स अब युद्ध, खुफिया कार्यों और देशों के बीच रणनीतिक प्रतिस्पर्धा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। इसलिए इनके निर्यात पर संसद की वैसी ही निगरानी आवश्यक है जैसी हथियारों की बिक्री पर होती है।
कमेटी के चेयरमैन कांग्रेसी ब्रायन मास्ट ने कहा कि एडवांस्ड एआई सिस्टम अब सिविलियन उपयोग से बहुत आगे बढ़ चुके हैं। उन्होंने कहा, "जब कोई एक्सपोर्ट अमेरिका के मिलिट्री फायदे को बदलता है, तो कांग्रेस की भूमिका होती है।"
मास्ट ने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पहले से ही मिलिट्री कमांड और कंट्रोल, इंटेलिजेंस एनालिसिस, निगरानी, साइबर ऑपरेशंस और न्यूक्लियर मॉडर्नाइजेशन का आधार है। उन्होंने कहा, "एआई का दबदबा यह तय कर सकता है कि कौन पहले देखता है, कौन पहले फैसला करता है, और कौन पहले हमला करता है।"
पूर्व राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार मैट पॉटिंगर ने चेतावनी दी कि उन्नत चिप्स को साधारण व्यापारिक उत्पाद समझना एक बड़ी रणनीतिक भूल हो सकती है। उन्होंने दूरसंचार क्षेत्र का उदाहरण दिया, जहां कभी पश्चिमी कंपनियों का दबदबा था, लेकिन आयातित तकनीक के माध्यम से चीनी कंपनियां आगे निकल गईं। उनका कहना था कि उन्नत एआई चिप्स की बिक्री से खुली प्रतिस्पर्धा नहीं, बल्कि विपक्षी देशों की सैन्य ताकत मजबूत होगी।
पॉटिंगर ने चीन की “सैन्य–नागरिक एकीकरण” नीति का जिक्र करते हुए कहा कि वहां नागरिक और सैन्य उपयोग में फर्क करना लगभग असंभव है। उन्होंने कहा, "ऐसा कुछ नहीं है कि एक हिस्से में सिविलियन इस्तेमाल हो और दूसरे में मिलिट्री इस्तेमाल।"
पूर्व प्रशासनिक अधिकारी जॉन फाइनर ने कहा कि एडवांस्ड चिप्स और सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग टूल्स पर एक्सपोर्ट कंट्रोल दुश्मनों की प्रगति को धीमा करने वाले कुछ प्रभावी उपायों में से एक रहे हैं, लेकिन उन्होंने चेतावनी दी कि इसके लिए निरंतर लागू करने की आवश्यकता है।
फाइनर ने कहा, "एक्सपोर्ट कंट्रोल कोई एक बार का समाधान नहीं है। इसके लिए निरंतर सतर्कता, बार-बार एडजस्टमेंट और, आवश्यकता पड़ने पर, सख्ती की जरूरत होती है।"
अर्थशास्त्री ओरेन कैस ने कहा कि एडवांस्ड कंप्यूटिंग पावर तक पहुंच राष्ट्रीय ताकत का एक निर्णायक पैमाना बन गया है। उनके अनुसार एआई युग में यह आर्थिक विकास के साथ-साथ नई सैन्य क्षमताओं के लिए भी आवश्यक है। कैस ने चेतावनी दी कि लिमिटेड चिप सप्लाई को विदेशी खरीदारों को देने से अमेरिकी इंडस्ट्री भी कमजोर हो सकती है।
कई सदस्यों ने तर्क किया कि एडवांस्ड एआई चिप्स को अब आम एक्सपोर्ट की तरह नहीं माना जाना चाहिए। उनके अनुसार, एडवांस्ड चिप्स निश्चित रूप से सैन्य बढ़त को बदल देती हैं। कुल मिलाकर, जैसे-जैसे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस युद्ध, खुफिया तंत्र और अर्थव्यवस्था का केंद्र बनती जा रही है, अमेरिकी संसद यह विचार कर रही है कि उन्नत एआई चिप्स को सामान्य व्यापार नहीं, बल्कि हथियार नियंत्रण जैसे कड़े नियमों के दायरे में रखा जाना चाहिए।