अंतरराष्ट्रीय योग दिवस 2025: यूएन महासचिव गुटेरेस ने योग को बताया वैश्विक शांति का माध्यम, हर पीढ़ी से की अपील
सारांश
मुख्य बातें
संयुक्त राष्ट्र के महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने 21 जून को मनाए गए अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर भारत की प्राचीन योग परंपरा को दुनिया के सभी धर्मों और संस्कृतियों के लाखों लोगों के लिए शांति, शक्ति और सार्थक जीवन का मार्ग बताया। उन्होंने हर पीढ़ी — विशेषकर बुजुर्गों — तक योगाभ्यास की पहुँच सुनिश्चित करने का आह्वान किया।
गुटेरेस का संदेश: योग अब वैश्विक विरासत
गुटेरेस ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर लिखा, 'प्राचीन भारत में अपनी गहरी जड़ों से, योग सच में वैश्विक बन गया है, जो सभी धर्मों और संस्कृतियों के लाखों लोगों को शांति पाने, ताकत बनाने और मकसद के साथ जीने में मदद करता है।' उन्होंने आगे कहा कि योग हमें अपने लिए, अपने ग्रह के लिए और एक-दूसरे के लिए ध्यानमग्नता, सम्मान और देखभाल करना सिखाता है।
उन्होंने इस योग दिवस पर विशेष रूप से अपील की कि परिवार के बुजुर्ग सदस्यों तक यह देखभाल पहुँचाई जाए, ताकि एक ऐसी दुनिया बनाई जा सके जहाँ हर पीढ़ी स्वस्थ जीवन जी सके।
इस वर्ष की थीम: स्वस्थ वृद्धावस्था के लिए योग
इस साल अंतरराष्ट्रीय योग दिवस की थीम 'स्वस्थ वृद्धावस्था के लिए योग' रही। इसमें निवारक स्वास्थ्य देखभाल, सक्रिय जीवनशैली और मानसिक कल्याण पर विशेष जोर दिया गया। यह थीम ऐसे समय में आई है जब दुनियाभर में बुजुर्ग आबादी तेज़ी से बढ़ रही है और स्वास्थ्य सेवाओं पर दबाव लगातार बढ़ रहा है।
अमेरिका में व्यापक उत्सव
टेक्सास के पार्कों से लेकर न्यूयॉर्क के टाइम्स स्क्वायर तक, राज्य विधानसभाओं और गवर्नर के कार्यालयों तक — पूरे अमेरिका में इस सप्ताह अंतरराष्ट्रीय योग दिवस धूमधाम से मनाया गया। करोड़ों अमेरिकी नागरिक नियमित रूप से योगाभ्यास करते हैं, और यह भारत की सांस्कृतिक पहचान तथा वैश्विक प्रभाव के सबसे सशक्त उदाहरणों में से एक बन चुका है।
सबसे बड़े आयोजनों में से एक टेक्सास के शुगर लैंड में ब्रेजोस रिवर पार्क में हुआ, जहाँ कॉन्सुल जनरल डी.सी. मंजूनाथ, हिंदू स्वयंसेवक संघ और हिंदू युवा के सदस्य तथा मेयर कैरल मैककचियन सहित चुने हुए जनप्रतिनिधि, आम नागरिक और योगप्रेमी एकत्र हुए। इस आउटडोर योग सत्र में सामुदायिक कल्याण गतिविधियाँ भी आयोजित की गईं।
एक दशक से अधिक की वैश्विक यात्रा
गौरतलब है कि संयुक्त राष्ट्र ने 21 जून को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस घोषित किए एक दशक से अधिक समय हो चुका है। तब से यह आयोजन पूरे विश्व में व्यापक स्तर पर होने लगा है — पार्कों, विश्वविद्यालयों, सामुदायिक केंद्रों, सार्वजनिक स्थलों और सरकारी संस्थानों में। यह इस बात का प्रमाण है कि भारत में जन्मी यह परंपरा अब एक वैश्विक स्वास्थ्य एवं कल्याण आंदोलन का रूप ले चुकी है।
आगे की राह
विशेषज्ञों का मानना है कि योग दिवस का बढ़ता वैश्विक विस्तार भारत की 'सॉफ्ट पावर' को और मज़बूत करता है। यूएन महासचिव की अपील के बाद अब यह देखना होगा कि सदस्य देश वृद्धावस्था स्वास्थ्य नीतियों में योग को किस हद तक एकीकृत करते हैं।