ऑस्ट्रेलिया ने चीन को लौटाए दो सांस्कृतिक अवशेष, सोंग राजवंश की दुर्लभ मूर्तियाँ कैनबरा से बीजिंग पहुँचीं
सारांश
मुख्य बातें
चीन के राष्ट्रीय पुरावशेष प्रशासन ने 28 अक्टूबर 2026 को कैनबरा में आयोजित एक आधिकारिक समारोह में ऑस्ट्रेलिया के राष्ट्रीय चित्रकला संग्रहालय से दो ऐतिहासिक चीनी सांस्कृतिक अवशेष प्राप्त किए। ये दोनों अवशेष उत्तरी सोंग राजवंश के शाही मकबरे से संबंधित मूर्तियों के शीर्ष भाग हैं, जो चीन के हेनान प्रांत से लाए गए थे। यह वापसी दोनों देशों के बीच सांस्कृतिक विरासत संरक्षण के क्षेत्र में बढ़ते सहयोग का प्रतीक मानी जा रही है।
समारोह में कौन-कौन उपस्थित रहे
राष्ट्रीय पुरावशेष प्रशासन के उप निदेशक थांग वेई, ऑस्ट्रेलिया में चीन के राजदूत ल्यो चिनसोंग, तथा ऑस्ट्रेलिया के राष्ट्रीय चित्रकला संग्रहालय के निदेशक निक मित्ज़ेविच वापसी एवं स्वागत समारोह में उपस्थित रहे और संबोधन दिए। इनके अलावा ऑस्ट्रेलिया के विदेश और व्यापार मंत्रालय, संघीय कला मंत्रालय एवं अन्य संबंधित संस्थाओं के प्रतिनिधि भी इस अवसर पर शामिल हुए।
ये अवशेष क्या हैं
वापस किए गए दोनों अवशेष चीन के उत्तरी सोंग राजवंश के शाही मकबरे से जुड़ी मूर्तियों के शीर्ष भाग हैं — एक सैन्य अधिकारी की मूर्ति का सिर और दूसरा नागरिक अधिकारी की मूर्ति का सिर। ऑस्ट्रेलिया के राष्ट्रीय चित्रकला संग्रहालय के पूर्व-प्रकाशित संग्रह अभिलेखों के अनुसार, ये दोनों टुकड़े हेनान प्रांत में उत्पन्न हुए थे। गौरतलब है कि सोंग राजवंश (960–1279 ई.) को चीनी कला और वास्तुकला के स्वर्णिम युग में से एक माना जाता है।
चीनी पक्ष का रुख
चीनी प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि लुप्त पुरावशेषों को उनके मूल देश में वापस लाना सभी देशों के पुरावशेषों की सुरक्षा सुनिश्चित करने, सभी देशों के लोगों के सांस्कृतिक अधिकारों और राष्ट्रीय भावनाओं का सम्मान करने तथा मानव सभ्यता की उपलब्धियों की रक्षा करने का न्यायसंगत कार्य है। चीनी पक्ष ने इस सहयोग को अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलनों के प्रति दोनों देशों की प्रतिबद्धता का महत्वपूर्ण परिणाम बताया, साथ ही कहा कि यह चीन-ऑस्ट्रेलिया मानविकी आदान-प्रदान और जनता के बीच आपसी समझ को और प्रगाढ़ करेगा।
ऑस्ट्रेलियाई पक्ष की प्रतिक्रिया
ऑस्ट्रेलियाई प्रतिनिधियों ने कहा कि पुरावशेषों की वापसी केवल वस्तुओं का हस्तांतरण नहीं है, बल्कि यह सांस्कृतिक विरासत के प्रति सम्मान, जिम्मेदारी और अंतर्राष्ट्रीय साझेदारी का प्रतीक है। उनके अनुसार यह कदम ऑस्ट्रेलिया-चीन मैत्रीपूर्ण संबंधों को और गहरा करेगा तथा सांस्कृतिक विरासत संरक्षण के क्षेत्र में निरंतर सहयोग को बढ़ावा देगा।
आगे का रास्ता
यह ऐसे समय में आया है जब दुनियाभर में उपनिवेशवादी युग में हुई लूट के सांस्कृतिक अवशेषों की वापसी को लेकर बहस तेज़ हो रही है। यह घटनाक्रम भविष्य में चीन और ऑस्ट्रेलिया के बीच विरासत संरक्षण के और सहयोगी करारों का मार्ग प्रशस्त कर सकता है।