चीनी उप प्रधानमंत्री तिंग शुएश्यांग की हांगकांग-मकाओ के 1,200 युवा ध्वजारोहण प्रतिनिधियों से मुलाकात
सारांश
मुख्य बातें
चीनी उप प्रधानमंत्री तिंग शुएश्यांग ने 21 सितंबर 2026 को बीजिंग स्थित जन वृहद भवन में हांगकांग और मकाओ विशेष प्रशासनिक क्षेत्रों के युवा ध्वजारोहण दलों के करीब 1,200 प्रतिनिधियों से मुलाकात की। इस भेंट में उन्होंने राष्ट्रपति शी चिनफिंग का स्नेहपूर्ण अभिवादन सभी प्रतिनिधियों तक पहुँचाया और केंद्र सरकार की ओर से उनका हार्दिक स्वागत किया।
बैठक की मुख्य बातें
तिंग शुएश्यांग ने इस अवसर पर कहा कि राष्ट्रपति शी चिनफिंग हमेशा हांगकांग और मकाओ के युवाओं के सर्वांगीण विकास पर विशेष ध्यान देते हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि इन दोनों विशेष प्रशासनिक क्षेत्रों की समृद्धि और देश का समग्र विकास युवाओं की उन्नति से अभिन्न रूप से जुड़ा हुआ है।
उन्होंने युवा प्रतिनिधियों को संबोधित करते हुए कहा कि हांगकांग और मकाओ इस समय अपने इतिहास के सर्वश्रेष्ठ विकास काल से गुज़र रहे हैं। उनके अनुसार, युवाओं का अच्छा विकास ही इन क्षेत्रों और पूरे देश के उज्जवल भविष्य की नींव है।
युवाओं से तीन आह्वान
तिंग शुएश्यांग ने छात्र प्रतिनिधियों के समक्ष तीन प्रमुख अपेक्षाएँ रखीं। पहली — राष्ट्रीय ध्वज के महत्व को गहराई से समझें और महान मातृभूमि के प्रति अपनी भावना को सुदृढ़ करें। दूसरी — राष्ट्रीय ध्वज की रक्षा करें और नए युग में देशभक्ति के आदर्श बनने का प्रयास करें। तीसरी — अपनी ऊर्जा और जोश से राष्ट्रीय ध्वज का मान बढ़ाएँ और अपनी जिंदगी की शानदार कहानी लिखें, ताकि वे 'एक देश, दो व्यवस्थाओं' के निर्माता और उत्तराधिकारी बन सकें।
प्रतिभागी और पृष्ठभूमि
इस आयोजन में हांगकांग और मकाओ के विश्वविद्यालयों, माध्यमिक विद्यालयों और प्राथमिक विद्यालयों के ध्वजारोहण दलों के कुल करीब 1,200 प्रतिनिधियों ने भाग लिया। यह भेंट ऐसे समय में हुई है जब बीजिंग इन दोनों विशेष प्रशासनिक क्षेत्रों में युवा पीढ़ी के साथ राष्ट्रीय पहचान और देशभक्ति को मज़बूत करने पर विशेष बल दे रहा है।
व्यापक संदर्भ
गौरतलब है कि 'एक देश, दो व्यवस्थाओं' की नीति के तहत हांगकांग (1997 से) और मकाओ (1999 से) चीन के अभिन्न अंग हैं, परंतु उनके अलग प्रशासनिक और कानूनी ढाँचे हैं। हाल के वर्षों में बीजिंग ने युवाओं में राष्ट्रीय पहचान को बढ़ावा देने के लिए इस प्रकार के सांस्कृतिक और शैक्षणिक कार्यक्रमों की संख्या बढ़ाई है। आने वाले समय में इस तरह के संवाद कार्यक्रम और अधिक व्यापक रूप लेने की संभावना है।