काहिरा में 'प्राचीन राजधानियों की सभ्यताओं का संवाद' शुरू, चीन-मिस्र राजनयिक संबंधों की 70वीं वर्षगांठ
सारांश
मुख्य बातें
मिस्र की राजधानी काहिरा में 1 जून 2026 को 'प्राचीन राजधानियों की सभ्यताओं का संवाद' नामक अंतर्राष्ट्रीय आदान-प्रदान कार्यक्रम का उद्घाटन हुआ, जिसमें चीन और मिस्र की प्राचीन सभ्यताओं के बीच सांस्कृतिक संवाद को नए आयाम देने पर ज़ोर दिया गया। यह आयोजन ऐसे समय में हुआ है जब दोनों देश राजनयिक संबंधों की स्थापना की 70वीं वर्षगांठ मना रहे हैं।
मुख्य घटनाक्रम
'सभ्यता की उत्पत्ति से भविष्य की कल्पना तक: प्राचीन राजधानियों की सभ्यताओं का संवाद (काहिरा-हांगचो)' विषय पर आयोजित इस कार्यक्रम का आयोजन मिस्र के राष्ट्रीय सभ्यता संग्रहालय में किया गया। इसमें चीन और मिस्र के सरकारी विभागों, सांस्कृतिक विरासत संस्थानों, विश्वविद्यालयों, थिंक टैंक और अकादमिक जगत के प्रतिनिधियों ने भाग लिया।
चर्चा के प्रमुख विषयों में सभ्यताओं की उत्पत्ति, ऐतिहासिक चिंतन, संग्रहालयों की भूमिका और ज्ञान के प्रसार जैसे क्षेत्र शामिल रहे।
चीनी पक्ष का संबोधन
मिस्र स्थित चीनी दूतावास के मिनिस्टर चांग याछ्यांग ने अपने उद्घाटन भाषण में कहा कि चीन और मिस्र विश्व की प्राचीन सभ्यताओं वाले देश हैं, जिनका इतिहास बेहद समृद्ध और गौरवशाली रहा है। उन्होंने कहा कि हज़ारों वर्षों से दोनों सभ्यताएँ एक-दूसरे से सीखती रही हैं और साथ मिलकर आगे बढ़ी हैं। उनके अनुसार, यह कार्यक्रम दोनों देशों के लोगों के बीच आपसी समझ और पारंपरिक मित्रता को और मज़बूत करेगा तथा नए युग में साझा भविष्य वाले चीन-मिस्र समुदाय के निर्माण के लिए जनसमर्थन को बढ़ाएगा।
मिस्र के संग्रहालय निदेशक की राय
मिस्र के राष्ट्रीय सभ्यता संग्रहालय के निदेशक तैयब अब्बास ने कहा कि सांस्कृतिक विरासत केवल अतीत का दस्तावेज़ नहीं है, बल्कि भविष्य निर्माण की एक महत्वपूर्ण शक्ति भी है। उनके अनुसार, सभ्यताओं के बीच संवाद विश्व शांति और सतत विकास हासिल करने का अहम माध्यम है।
उन्होंने ज़ोर दिया कि मिस्र और चीन ने आपसी सम्मान के आधार पर सांस्कृतिक सहयोग को आगे बढ़ाया है, और आधुनिक प्रौद्योगिकी का उपयोग करते हुए सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण, संवर्धन और प्रचार में अंतर्राष्ट्रीय सहयोग का सकारात्मक उदाहरण पेश किया है।
हांगचो-काहिरा का ऐतिहासिक जुड़ाव
मिस्र-चीन मैत्री संघ के परिषद सदस्य अब्देल-फत्ताह इज्ज़िद्दीन ने कहा कि वह कई बार हांगचो जा चुके हैं, और दोनों ही प्राचीन शहर गहरी ऐतिहासिक विरासत तथा परस्पर जुड़ाव को दर्शाते हैं। उन्होंने विश्वास जताया कि यह आयोजन दोनों मित्र देशों के बीच सांस्कृतिक सहयोग और जन-आदान-प्रदान को नए आयाम देगा।
चीन के संचार विश्वविद्यालय के सांस्कृतिक विकास और संचार संस्थान के डीन प्रोफेसर श्योंग छेंगयू ने कहा कि प्राचीन राजधानियों के बीच संवाद सभ्यताओं के पारस्परिक आदान-प्रदान और सीखने का जीवंत उदाहरण है। उन्होंने आह्वान किया कि मिस्र और चीन को मिलकर प्राचीन और आधुनिक सभ्यताओं के सह-अस्तित्व तथा साझा समृद्धि के विकास मार्ग की खोज करनी चाहिए।
आयोजकों की भूमिका और आगे की राह
इस कार्यक्रम का संयुक्त आयोजन चीन के संचार विश्वविद्यालय के सांस्कृतिक विकास और संचार संस्थान तथा मिस्र के राष्ट्रीय सभ्यता संग्रहालय द्वारा किया गया। गौरतलब है कि चीन-मिस्र राजनयिक संबंधों की 70वीं वर्षगांठ के संदर्भ में यह आयोजन दोनों देशों की सांस्कृतिक कूटनीति का एक प्रतीकात्मक पड़ाव माना जा रहा है।
आने वाले महीनों में दोनों देशों के बीच संग्रहालय सहयोग, अकादमिक आदान-प्रदान और संयुक्त शोध परियोजनाओं के नए चरण की उम्मीद जताई जा रही है।