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बलूचिस्तान में 2026 के पहले 6 महीनों में 507 जबरन गुमशुदगी, 150 हत्याओं का दावा: BYC रिपोर्ट

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बलूचिस्तान में 2026 के पहले 6 महीनों में 507 जबरन गुमशुदगी, 150 हत्याओं का दावा: BYC रिपोर्ट

सारांश

बलूच यकजहती कमेटी (BYC) की रिपोर्ट बलूचिस्तान में 2026 की पहली छमाही को अब तक के सबसे दस्तावेज़ीकृत दमन के दौर के रूप में चित्रित करती है — 507 जबरन गुमशुदगी, 150 हत्याएँ, और 303 लापता। ये दावे सत्यापित नहीं हैं, लेकिन एक दूसरे संगठन PAANK के आँकड़े और भी भयावह हैं।

मुख्य बातें

BYC की रिपोर्ट के अनुसार जनवरी-जून 2026 में बलूचिस्तान में 507 लोगों को कथित तौर पर जबरन गायब किया गया।
303 लोग अब भी लापता हैं; 32 की हिरासत में मौत का दावा; 150 को रिहा किया गया।
कथित पीड़ितों में 44 नाबालिग और 20 से अधिक महिलाएँ शामिल हैं।
रिपोर्ट में FC को 180 , CTD को 93 और पाकिस्तानी सेना को 42 जबरन गुमशुदगी के मामलों में ज़िम्मेदार बताया गया है।
एक अन्य संगठन PAANK ने इसी अवधि में 556 जबरन गुमशुदगी और 227 कथित हत्याओं का अलग आँकड़ा जारी किया है।
सभी आरोप BYC के अपने दावे हैं; स्वतंत्र सत्यापन नहीं हो सका है।

बलूच यकजहती कमेटी (BYC) के मानवाधिकार विभाग ने अपनी ताज़ा रिपोर्ट में दावा किया है कि जनवरी से जून 2026 के बीच बलूचिस्तान में 507 लोगों को कथित तौर पर जबरन गायब किया गया और 150 नागरिकों की हत्या की गई। रिपोर्ट के अनुसार, इन मामलों में 44 नाबालिग और 20 से अधिक महिलाएँ भी शामिल हैं, जो बलूचिस्तान में मानवाधिकारों की स्थिति को लेकर गंभीर सवाल खड़े करती है। उल्लेखनीय है कि इन दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो पाई है।

जबरन गुमशुदगी के मामले: मुख्य आँकड़े

BYC की रिपोर्ट के मुताबिक, 507 दर्ज मामलों में से 150 लोगों को अल्पकालिक हिरासत के बाद रिहा कर दिया गया, जबकि 32 लोगों की हिरासत के दौरान मौत का दावा किया गया है। 303 लोग अब भी लापता हैं और उनके परिजनों को उनके ठिकाने की कोई सूचना नहीं दी गई है।

संगठन के अनुसार, जबरन गुमशुदगी के मामलों में क्वेटा और केच ज़िलों में सर्वाधिक घटनाएँ दर्ज की गई हैं। BYC ने आरोप लगाया है कि इन मामलों में फ्रंटियर कॉर्प्स (FC) की भूमिका 180 मामलों में, काउंटर टेररिज़्म डिपार्टमेंट (CTD) की 93 मामलों में, पाकिस्तानी सेना की 42 मामलों में और कथित राज्य-समर्थित डेथ स्क्वॉड की 20 मामलों में संलिप्तता है। कुछ मामलों में सुरक्षा बलों, खुफिया एजेंसियों और पुलिस की संयुक्त कार्रवाई का भी दावा किया गया है।

150 हत्याओं का दस्तावेज़ीकरण, 15 नाबालिग भी शामिल

रिपोर्ट में जनवरी-जून 2026 के दौरान 150 बलूच नागरिकों की हत्याओं का दस्तावेज़ीकरण किया गया है, जिनमें 15 नाबालिग भी बताए गए हैं। BYC के अनुसार, सर्वाधिक हत्याएँ पंजगुर में हुईं, इसके बाद केच और ग्वादर का स्थान रहा।

संगठन का आरोप है कि इन हत्याओं में सबसे बड़ी भूमिका कथित राज्य-समर्थित डेथ स्क्वॉड की रही, उसके बाद FC और पाकिस्तानी सेना का स्थान है। हालाँकि, पाकिस्तान सरकार या उसकी सुरक्षा एजेंसियों की ओर से इन आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया रिपोर्ट में दर्ज नहीं है।

कार्यकर्ताओं पर उत्पीड़न के आरोप

BYC ने अपनी रिपोर्ट में बलूच कार्यकर्ताओं महरंग बलूच और बेबार्ग बलूच के कथित उत्पीड़न का भी विस्तार से उल्लेख किया है। संगठन के अनुसार, दोनों मार्च 2025 से हिरासत में हैं। BYC का आरोप है कि खुफिया एजेंसियों के निर्देश पर जेल प्रशासन ने कई बार दोनों को बुनियादी चिकित्सा सुविधाओं तक पहुँच से वंचित किया।

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, शांतिपूर्ण सभा, आवाजाही और विरोध प्रदर्शन जैसे मौलिक अधिकारों पर 2026 की पहली छमाही में गंभीर प्रतिबंध लगाए गए। BYC के मुताबिक, अधिकारियों ने शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों के खिलाफ बार-बार उत्पीड़न, धमकी, गिरफ्तारी और बल प्रयोग का सहारा लिया।

आँकड़ों में भिन्नता और स्वतंत्र सत्यापन की सीमाएँ

यह ध्यान देना ज़रूरी है कि रिपोर्ट में लगाए गए सभी आरोप BYC के अपने दावे हैं और इनकी स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है। बलूचिस्तान में सक्रिय एक अन्य मानवाधिकार संगठन PAANK ने जनवरी-जून 2026 के लिए 556 जबरन गुमशुदगी और 227 कथित न्यायेतर या हिरासत में हत्याओं का अलग आँकड़ा प्रस्तुत किया है। दोनों संगठनों के आँकड़ों में यह भिन्नता दर्शाती है कि बलूचिस्तान में स्वतंत्र पत्रकारिता और निगरानी की भारी सीमाएँ हैं।

गौरतलब है कि पाकिस्तान में बलूचिस्तान की स्थिति दशकों से अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों की चिंता का विषय रही है। एमनेस्टी इंटरनेशनल और ह्यूमन राइट्स वॉच सहित अनेक अंतरराष्ट्रीय संस्थाएँ वर्षों से जबरन गुमशुदगी और न्यायेतर हत्याओं को लेकर पाकिस्तान सरकार से जवाब माँगती रही हैं।

आगे क्या होगा

BYC ने अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार निकायों और संयुक्त राष्ट्र से बलूचिस्तान में स्वतंत्र जाँच की माँग की है। यह रिपोर्ट ऐसे समय में आई है जब पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय वित्तीय दबाव और राजनीतिक अस्थिरता के दौर से गुज़र रहा है, जिससे बलूचिस्तान मुद्दे पर वैश्विक ध्यान और अधिक केंद्रित होने की संभावना है।

संपादकीय दृष्टिकोण

दूसरे के लिए 556 — बलूचिस्तान में स्वतंत्र पत्रकारिता और निगरानी की गहरी विफलता को उजागर करती है। इसका मतलब यह नहीं कि आरोप झूठे हैं, बल्कि यह है कि वास्तविक संख्या शायद किसी भी रिपोर्ट से अधिक है। पाकिस्तान सरकार की चुप्पी — न खंडन, न जाँच का आश्वासन — खुद एक बयान है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय के लिए यह उस क्षण की माँग करता है जब वे केवल 'चिंता' जताने से आगे बढ़ें।
RashtraPress
30 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

बलूच यकजहती कमेटी (BYC) की रिपोर्ट में क्या दावे किए गए हैं?
BYC की रिपोर्ट के अनुसार, जनवरी-जून 2026 के दौरान बलूचिस्तान में 507 लोगों को कथित तौर पर जबरन गायब किया गया और 150 नागरिकों की हत्या की गई। रिपोर्ट में 303 लोगों के अब भी लापता होने और 32 की हिरासत में मौत का दावा है। ये सभी आरोप स्वतंत्र रूप से सत्यापित नहीं हो सके हैं।
इन मामलों में किन सुरक्षा बलों पर आरोप लगाए गए हैं?
BYC ने फ्रंटियर कॉर्प्स (FC) को 180 मामलों में, काउंटर टेररिज़्म डिपार्टमेंट (CTD) को 93 मामलों में, पाकिस्तानी सेना को 42 मामलों में और कथित राज्य-समर्थित डेथ स्क्वॉड को 20 मामलों में ज़िम्मेदार ठहराया है। ये दावे संगठन के अपने हैं और पाकिस्तान सरकार ने इन पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है।
महरंग बलूच और बेबार्ग बलूच कौन हैं और उनकी स्थिति क्या है?
महरंग बलूच और बेबार्ग बलूच बलूच अधिकार आंदोलन से जुड़े प्रमुख कार्यकर्ता हैं। BYC के अनुसार, दोनों मार्च 2025 से हिरासत में हैं और खुफिया एजेंसियों के कथित दबाव में उन्हें बुनियादी चिकित्सा सुविधाओं से वंचित किया गया है।
BYC और PAANK के आँकड़ों में इतना अंतर क्यों है?
बलूचिस्तान स्थित PAANK संगठन ने उसी अवधि के लिए 556 जबरन गुमशुदगी और 227 कथित हत्याओं का आँकड़ा दिया है, जो BYC के 507 और 150 के आँकड़ों से अधिक है। यह भिन्नता बलूचिस्तान में स्वतंत्र पत्रकारिता और निगरानी पर लगी पाबंदियों तथा अलग-अलग दस्तावेज़ीकरण पद्धतियों के कारण है।
बलूचिस्तान में सबसे अधिक प्रभावित ज़िले कौन से बताए गए हैं?
BYC की रिपोर्ट के अनुसार, जबरन गुमशुदगी के सर्वाधिक मामले क्वेटा और केच में दर्ज किए गए। वहीं हत्याओं के मामले में पंजगुर सबसे आगे रहा, इसके बाद केच और ग्वादर का स्थान है।
राष्ट्र प्रेस
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