बलूचिस्तान में जून में 77 हत्याएँ, 63 जबरन गुमशुदगियाँ — HRCB रिपोर्ट में पाक बलों पर गंभीर आरोप
सारांश
मुख्य बातें
ह्यूमन राइट्स काउंसिल ऑफ बलूचिस्तान (HRCB) की ताज़ा रिपोर्ट के अनुसार, जून 2026 के दौरान बलूचिस्तान में 77 लोगों की हत्या और 63 लोगों को जबरन गायब किए जाने के मामले दर्ज किए गए। रिपोर्ट में पाकिस्तानी सुरक्षा बलों — विशेष रूप से फ्रंटियर कॉर्प्स (FC) — पर इन घटनाओं में सीधी भूमिका का आरोप लगाया गया है।
मृत्यु के आँकड़े और तरीके
HRCB के मुताबिक, मारे गए 77 लोगों में 76 पुरुष और एक महिला शामिल थीं, जबकि 42 पीड़ितों की पहचान की पुष्टि नहीं हो सकी। रिपोर्ट में कहा गया कि इनमें से 19 लोगों को पहले जबरन गायब किया गया था — चार का अपहरण और हत्या जून में ही हुई, जबकि शेष 15 को पिछले महीनों में लापता किया गया था।
हत्याओं के तरीकों के संदर्भ में, रिपोर्ट के अनुसार 39 मामले कथित मुठभेड़ों के थे — जो कुल घटनाओं के आधे से अधिक हैं। इसके अलावा 12 टारगेट किलिंग, 10 फर्जी मुठभेड़, 9 हिरासत में मौत, 3 मामलों में शव बरामद, तथा ऑनर किलिंग और अंधाधुंध गोलीबारी से 2-2 मौतें दर्ज की गईं।
आरोपित एजेंसियाँ
रिपोर्ट के अनुसार, हत्या के मामलों में सबसे अधिक — 53 घटनाओं में — FC का नाम सामने आया। 14 मामलों में अज्ञात व्यक्तियों की भूमिका बताई गई, जबकि राज्य-समर्थित डेथ स्क्वॉड और काउंटर टेररिज्म डिपार्टमेंट (CTD) का नाम 5-5 मामलों में लिया गया।
जबरन गुमशुदगी के मामले
जबरन गायब किए गए 63 लोगों में 2 महिलाएँ और 3 किशोर भी शामिल थे। HRCB के अनुसार, इनमें से केवल 17 लोगों को जून के दौरान रिहा किया गया, जबकि शेष अब भी बिना किसी बाहरी संपर्क के हिरासत में हैं।
गुमशुदगी के मामलों में भी FC पर सबसे अधिक — 36 मामलों में — आरोप लगाए गए। इसके बाद पाकिस्तानी खुफिया एजेंसियों पर 16 मामलों, राज्य-समर्थित डेथ स्क्वॉड पर 6 और CTD पर 5 मामलों में जिम्मेदारी बताई गई। रिपोर्ट के अनुसार, लापता करने का सबसे आम तरीका घरों पर छापेमारी रहा — 27 मामले (42.86%) — इसके बाद हिरासत के बाद गायब करने के 20 मामले (31.75%), सैन्य अभियानों के दौरान गायब होने के 10 मामले (15.87%), FC कैंप में बुलाकर लापता करने के 3 और सुरक्षा चौकियों से हिरासत के 3 मामले दर्ज किए गए।
सैन्य अभियानों का नागरिकों पर असर
रिपोर्ट में आरोप लगाया गया है कि इसी अवधि में पाकिस्तानी बलों ने बलूचिस्तान में कई सैन्य अभियान चलाए, जिनके कारण आम नागरिकों की संपत्तियों को नुकसान पहुँचा, आवाजाही पर दीर्घकालिक पाबंदियाँ लगाई गईं और नागरिकों तथा मानवाधिकार कार्यकर्ताओं को डराने-धमकाने की घटनाएँ हुईं।
रिपोर्ट में विशेष रूप से उल्लेख है कि केच इलाके में बार-बार रात के समय छापेमारी की गई, जहाँ महिलाओं और बच्चों के साथ बदसलूकी और डराने-धमकाने की घटनाएँ हुईं तथा कई स्थानों पर सामान भी लूटा गया। मानवाधिकार कार्यकर्ता सम्मी दीन बलोच के घर पर भी लंबे समय तक छापेमारी की गई, जिसे रिपोर्ट में विशेष रूप से रेखांकित किया गया है।
आगे की स्थिति
HRCB की यह रिपोर्ट ऐसे समय में आई है जब बलूचिस्तान में मानवाधिकार उल्लंघनों को लेकर अंतरराष्ट्रीय समुदाय की चिंताएँ लगातार बढ़ रही हैं। पाकिस्तान सरकार की ओर से अब तक इन आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। मानवाधिकार संगठनों का कहना है कि जवाबदेही सुनिश्चित न होने पर ये आँकड़े आगे भी बढ़ते रहेंगे।