30 जुलाई 2026
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बलूचिस्तान में जून में 77 हत्याएँ, 63 जबरन गुमशुदगियाँ — HRCB रिपोर्ट में पाक बलों पर गंभीर आरोप

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बलूचिस्तान में जून में 77 हत्याएँ, 63 जबरन गुमशुदगियाँ — HRCB रिपोर्ट में पाक बलों पर गंभीर आरोप

सारांश

HRCB की रिपोर्ट बताती है कि जून 2026 में बलूचिस्तान में 77 हत्याएँ और 63 जबरन गुमशुदगियाँ दर्ज हुईं। फ्रंटियर कॉर्प्स पर सर्वाधिक मामलों में आरोप हैं। केच में महिलाओं-बच्चों से बदसलूकी और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं को निशाना बनाए जाने के आरोप इसे और गंभीर बनाते हैं।

मुख्य बातें

HRCB की रिपोर्ट के अनुसार जून 2026 में बलूचिस्तान में 77 लोगों की हत्या दर्ज की गई, जिनमें 76 पुरुष और 1 महिला शामिल हैं।
39 मामले कथित मुठभेड़ों के, 10 फर्जी मुठभेड़ और 9 हिरासत में मौत के मामले दर्ज।
63 लोगों को जबरन गायब किया गया, जिनमें 2 महिलाएँ और 3 किशोर शामिल; केवल 17 को जून में रिहा किया गया।
हत्या के 53 और गुमशुदगी के 36 मामलों में फ्रंटियर कॉर्प्स (FC) का नाम सामने आया।
केच इलाके में रात के छापों में महिलाओं-बच्चों से बदसलूकी और मानवाधिकार कार्यकर्ता सम्मी दीन बलोच के घर पर छापेमारी के आरोप।

ह्यूमन राइट्स काउंसिल ऑफ बलूचिस्तान (HRCB) की ताज़ा रिपोर्ट के अनुसार, जून 2026 के दौरान बलूचिस्तान में 77 लोगों की हत्या और 63 लोगों को जबरन गायब किए जाने के मामले दर्ज किए गए। रिपोर्ट में पाकिस्तानी सुरक्षा बलों — विशेष रूप से फ्रंटियर कॉर्प्स (FC) — पर इन घटनाओं में सीधी भूमिका का आरोप लगाया गया है।

मृत्यु के आँकड़े और तरीके

HRCB के मुताबिक, मारे गए 77 लोगों में 76 पुरुष और एक महिला शामिल थीं, जबकि 42 पीड़ितों की पहचान की पुष्टि नहीं हो सकी। रिपोर्ट में कहा गया कि इनमें से 19 लोगों को पहले जबरन गायब किया गया था — चार का अपहरण और हत्या जून में ही हुई, जबकि शेष 15 को पिछले महीनों में लापता किया गया था।

हत्याओं के तरीकों के संदर्भ में, रिपोर्ट के अनुसार 39 मामले कथित मुठभेड़ों के थे — जो कुल घटनाओं के आधे से अधिक हैं। इसके अलावा 12 टारगेट किलिंग, 10 फर्जी मुठभेड़, 9 हिरासत में मौत, 3 मामलों में शव बरामद, तथा ऑनर किलिंग और अंधाधुंध गोलीबारी से 2-2 मौतें दर्ज की गईं।

आरोपित एजेंसियाँ

रिपोर्ट के अनुसार, हत्या के मामलों में सबसे अधिक — 53 घटनाओं में — FC का नाम सामने आया। 14 मामलों में अज्ञात व्यक्तियों की भूमिका बताई गई, जबकि राज्य-समर्थित डेथ स्क्वॉड और काउंटर टेररिज्म डिपार्टमेंट (CTD) का नाम 5-5 मामलों में लिया गया।

जबरन गुमशुदगी के मामले

जबरन गायब किए गए 63 लोगों में 2 महिलाएँ और 3 किशोर भी शामिल थे। HRCB के अनुसार, इनमें से केवल 17 लोगों को जून के दौरान रिहा किया गया, जबकि शेष अब भी बिना किसी बाहरी संपर्क के हिरासत में हैं।

गुमशुदगी के मामलों में भी FC पर सबसे अधिक — 36 मामलों में — आरोप लगाए गए। इसके बाद पाकिस्तानी खुफिया एजेंसियों पर 16 मामलों, राज्य-समर्थित डेथ स्क्वॉड पर 6 और CTD पर 5 मामलों में जिम्मेदारी बताई गई। रिपोर्ट के अनुसार, लापता करने का सबसे आम तरीका घरों पर छापेमारी रहा — 27 मामले (42.86%) — इसके बाद हिरासत के बाद गायब करने के 20 मामले (31.75%), सैन्य अभियानों के दौरान गायब होने के 10 मामले (15.87%), FC कैंप में बुलाकर लापता करने के 3 और सुरक्षा चौकियों से हिरासत के 3 मामले दर्ज किए गए।

सैन्य अभियानों का नागरिकों पर असर

रिपोर्ट में आरोप लगाया गया है कि इसी अवधि में पाकिस्तानी बलों ने बलूचिस्तान में कई सैन्य अभियान चलाए, जिनके कारण आम नागरिकों की संपत्तियों को नुकसान पहुँचा, आवाजाही पर दीर्घकालिक पाबंदियाँ लगाई गईं और नागरिकों तथा मानवाधिकार कार्यकर्ताओं को डराने-धमकाने की घटनाएँ हुईं।

रिपोर्ट में विशेष रूप से उल्लेख है कि केच इलाके में बार-बार रात के समय छापेमारी की गई, जहाँ महिलाओं और बच्चों के साथ बदसलूकी और डराने-धमकाने की घटनाएँ हुईं तथा कई स्थानों पर सामान भी लूटा गया। मानवाधिकार कार्यकर्ता सम्मी दीन बलोच के घर पर भी लंबे समय तक छापेमारी की गई, जिसे रिपोर्ट में विशेष रूप से रेखांकित किया गया है।

आगे की स्थिति

HRCB की यह रिपोर्ट ऐसे समय में आई है जब बलूचिस्तान में मानवाधिकार उल्लंघनों को लेकर अंतरराष्ट्रीय समुदाय की चिंताएँ लगातार बढ़ रही हैं। पाकिस्तान सरकार की ओर से अब तक इन आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। मानवाधिकार संगठनों का कहना है कि जवाबदेही सुनिश्चित न होने पर ये आँकड़े आगे भी बढ़ते रहेंगे।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन अंतरराष्ट्रीय जवाबदेही का तंत्र लगभग निष्क्रिय बना हुआ है। फ्रंटियर कॉर्प्स पर बार-बार आरोप लगने के बावजूद पाकिस्तान सरकार की ओर से कोई स्वतंत्र जाँच नहीं होती — यह पैटर्न खुद में एक बड़ी कहानी है। मानवाधिकार कार्यकर्ता सम्मी दीन बलोच जैसे नामों का रिपोर्ट में उल्लेख यह संकेत देता है कि दस्तावेज़ीकरण करने वालों को भी निशाना बनाया जा रहा है, जिससे भविष्य में सच्चाई सामने लाना और कठिन होगा। जब तक संयुक्त राष्ट्र या किसी तटस्थ अंतरराष्ट्रीय निकाय को स्वतंत्र पहुँच नहीं मिलती, ये आँकड़े महज़ रिपोर्टों में दर्ज होते रहेंगे — ज़मीन पर कुछ नहीं बदलेगा।
RashtraPress
30 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

HRCB की बलूचिस्तान रिपोर्ट में क्या खुलासा हुआ है?
ह्यूमन राइट्स काउंसिल ऑफ बलूचिस्तान (HRCB) की रिपोर्ट के अनुसार जून 2026 में बलूचिस्तान में 77 लोगों की हत्या और 63 लोगों को जबरन गायब किया गया। रिपोर्ट में फ्रंटियर कॉर्प्स (FC) पर सर्वाधिक मामलों में जिम्मेदारी का आरोप लगाया गया है।
बलूचिस्तान में जबरन गुमशुदगी के लिए कौन-से तरीके अपनाए गए?
रिपोर्ट के अनुसार 27 मामलों (42.86%) में घरों पर छापेमारी, 20 मामलों (31.75%) में हिरासत के बाद गायब करना, और 10 मामलों (15.87%) में सैन्य अभियानों के दौरान लापता करना सबसे आम तरीके रहे। इसके अलावा FC कैंप और सुरक्षा चौकियों से भी लोगों को गायब किया गया।
फ्रंटियर कॉर्प्स (FC) पर कितने मामलों में आरोप हैं?
HRCB की रिपोर्ट के अनुसार FC का नाम हत्या के 53 मामलों और जबरन गुमशुदगी के 36 मामलों में सामने आया है। यह इसे दोनों श्रेणियों में सबसे अधिक आरोपित एजेंसी बनाता है।
केच इलाके में क्या हुआ?
रिपोर्ट के अनुसार केच इलाके में बार-बार रात के समय छापेमारी की गई, जिसमें महिलाओं और बच्चों के साथ बदसलूकी और डराने-धमकाने की घटनाएँ हुईं तथा कई स्थानों पर सामान लूटा गया। मानवाधिकार कार्यकर्ता सम्मी दीन बलोच के घर पर भी लंबे समय तक छापेमारी की गई।
पाकिस्तान सरकार ने इन आरोपों पर क्या कहा है?
HRCB की रिपोर्ट सामने आने के बाद पाकिस्तान सरकार की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। मानवाधिकार संगठनों का कहना है कि जवाबदेही के बिना ये उल्लंघन जारी रहने की आशंका है।
राष्ट्र प्रेस
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