ईरान-इजरायल संघर्ष के कारण बलूचिस्तान में ईंधन और खाद्य आपूर्ति संकट, कीमतें में 40%25 का इजाफा
सारांश
Key Takeaways
- ईरान-इजरायल संघर्ष का बलूचिस्तान पर गंभीर प्रभाव।
- ईंधन और खाद्य सामग्री की आपूर्ति में रुकावट।
- स्थानीय बाजारों में कीमतों में 30 से 40%25 की वृद्धि।
- आवश्यक वस्तुओं की कमी का सामना कर रहे व्यापारी।
- स्थिरता के लिए राजनीतिक और आर्थिक उपायों की आवश्यकता।
काबुल, 8 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। ईरान-इजरायल-अमेरिका संघर्ष का प्रभाव अन्य देशों पर भी स्पष्ट रूप से दिखाई देने लगा है। पाकिस्तान के बलूचिस्तान के कई क्षेत्रों में ईंधन और खाद्य आपूर्ति में रुकावट आ गई है। कीमतों में बढ़ोतरी और सीमावर्ती क्षेत्रों में कमी का भय बना हुआ है।
स्थानीय मीडिया के अनुसार, पाकिस्तान के ईरान सीमा से सटे क्षेत्रों, विशेषकर मकरान और रक्साना में, जैसे कि ग्वादर, केच, पंजगुर, चागई और वाशुक, में बड़ी मात्रा में ईरानी सामान पर निर्भरता है। ये सामान पाकिस्तान के अन्य हिस्सों से आने वाले सामान की तुलना में सस्ते और आसानी से उपलब्ध होते हैं।
स्थानीय व्यापारियों का कहना है कि सीमा बंद होने और ईरान द्वारा निर्यात पर लगाए गए प्रतिबंधों के कारण आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति काफी कम हो गई है।
मकरान ट्रेडर्स अलायंस के अध्यक्ष इशाक रोशन दाश्ती ने बताया कि सीमावर्ती क्षेत्रों में इस्तेमाल होने वाला लगभग 80 प्रतिशत ईंधन और खाद्य सामग्री ईरान से आती है।
उन्होंने कहा कि इस वर्ष की शुरुआत में हुए विरोध प्रदर्शनों के बाद ईरान ने खाद्य वस्तुओं के निर्यात पर 30 प्रतिशत से अधिक कर लगा दिया, जिससे ईरानी सामान पहले ही महंगा हो गया था।
दाश्ती ने कहा, "जब से युद्ध शुरू हुआ है, सीमा पर व्यापार लगभग बंद हो गया है।" ईरानी सरकार ने खाने की चीजों के निर्यातकों पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगा दिया है, जिससे आटा, खाना पकाने का तेल, दूध, दही, एलपीजी गैस, पेट्रोल और डीजल की आपूर्ति में बाधा आ रही है।
स्थानीय बाजारों में कमी के संकेत दिखाई देने लगे हैं और जिन दुकानदारों के पास अभी स्टॉक है, वे उच्च कीमतों पर सामान बेच रहे हैं। तटीय जिलों ग्वादर, जिवानी, पासनी और ओरमारा में खाद्य वस्तुओं की कीमतें 30 से 40 प्रतिशत तक बढ़ गई हैं।
मशकेल भी ऐसी ही स्थिति का सामना कर रहा है। स्थानीय व्यापारी खुदा दाद ने कहा कि मशकेल पहले से ईरानी उत्पादों पर निर्भर था क्योंकि पाकिस्तान के अन्य क्षेत्रों से उसकी ठीक से सड़क कनेक्टिविटी नहीं है। उन्होंने कहा कि पिछले सप्ताह अधिकांश चीजों की कीमतें तेजी से बढ़ी हैं।
द बलूचिस्तान पोस्ट की रिपोर्ट के अनुसार, एलपीजी गैस की कीमत दोगुनी होकर 600 पाकिस्तानी रुपए (पीकेआर) प्रति किलो हो गई है जबकि डीजल और कुकिंग ऑयल की कीमत 60 से 70 प्रतिशत तक बढ़ गई है।
ईंधन की बढ़ती कीमतों का असर ग्वादर के मछली पकड़ने के उद्योग पर भी पड़ रहा है क्योंकि वहां बड़ी संख्या में लोग इसी क्षेत्र से अपनी आजीविका कमाते हैं।
पश्चिम एशिया में यह संघर्ष तब शुरू हुआ जब अमेरिका और इजरायल ने ईरान पर संयुक्त हमले किए, जिनका उद्देश्य तेहरान की मिसाइल क्षमताओं और सैन्य ढांचे को कमजोर करना है।
इस अभियान की पहली लहर में ईरानी नेतृत्व के कई वरिष्ठ लोग मारे गए, जिनमें सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई भी शामिल बताए गए। इसके बाद ईरान ने जवाबी कार्रवाई करते हुए ड्रोन और मिसाइल हमले किए, जिनसे अमेरिकी ठिकानों, क्षेत्रीय राजधानियों और सहयोगी बलों को निशाना बनाया गया।