क्या बांग्लादेश चुनाव के दौरान अल्पसंख्यक हिंदुओं के खिलाफ कट्टरपंथी साजिश हो रही है?

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क्या बांग्लादेश चुनाव के दौरान अल्पसंख्यक हिंदुओं के खिलाफ कट्टरपंथी साजिश हो रही है?

सारांश

बांग्लादेश में होने वाले आम चुनावों से पहले अल्पसंख्यक हिंदू समुदाय के खिलाफ एक सुनियोजित हिंसा की साजिश सामने आई है। यह साजिश चुनावी बयानों के माध्यम से वोटों के ध्रुवीकरण की कोशिश का हिस्सा है। जानिए इस गंभीर स्थिति का प्रभाव क्या हो सकता है।

Key Takeaways

  • बांग्लादेश में अल्पसंख्यक हिंदुओं के खिलाफ सुनियोजित हिंसा की साजिश।
  • चुनावों के दौरान हिंदू-विरोधी बयानों का बढ़ता प्रभाव।
  • अल्पसंख्यकों की सुरक्षा को लेकर गहरी चिंता।
  • कट्टरपंथी तत्वों की भूमिका और उनकी योजनाएँ।
  • राजनीतिक लाभ के लिए धार्मिक ध्रुवीकरण की कोशिश।

नई दिल्ली, 27 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। फरवरी में होने वाले आम चुनावों से पूर्व बांग्लादेश में अल्पसंख्यक हिंदू समुदाय के खिलाफ हिंसा को भड़काने की एक सुनियोजित साजिश का पर्दाफाश हुआ है। खुफिया सूत्रों के अनुसार, चुनाव में भाग ले रहे कई नेता हिंदू-विरोधी बयानों को चुनावी मुद्दा बनाकर वोटों का ध्रुवीकरण करने की योजना बना रहे हैं।

इंटेलिजेंस ब्यूरो (आईबी) के एक वरिष्ठ अधिकारी ने जानकारी दी है कि पिछले सप्ताह कुछ नेताओं की बैठक में हिंदुओं के खिलाफ हिंसा भड़काने की रणनीति पर चर्चा की गई थी। इस साजिश में कट्टरपंथी तत्वों को भी शामिल किया गया है। अधिकारी के अनुसार, देश में अल्पसंख्यक समुदायों की स्थिति बेहद चिंताजनक है और चुनावों के निकट आते ही हिंसा में बढ़ोतरी की आशंका है।

बांग्लादेश पर नजर रखने वाले विशेषज्ञों का मानना है कि इस बार चुनाव विकास, सुरक्षा या आर्थिक मुद्दों पर नहीं लड़ा जाएगा। इसके बजाय, चुनावी विमर्श पूरी तरह से हिंदू-विरोधी और भारत-विरोधी नैरेटिव के इर्द-गिर्द घूमेगा।

सूत्रों के मुताबिक, कुछ नेता कट्टरपंथी तत्वों को भड़काते हुए यह दावा कर रहे हैं कि भारत ने अपदस्थ नेता शेख हसीना को शरण दी है। इसके साथ ही यह प्रचारित किया जा रहा है कि बांग्लादेश के हिंदू भारत समर्थक हैं और इसलिए उन्हें देश में रहने का कोई अधिकार नहीं है।

एक अन्य अधिकारी के अनुसार, इस साजिश का एक महत्वपूर्ण हिस्सा अल्पसंख्यक हिंदू समुदाय के खिलाफ झूठी कहानियाँ गढ़ना भी है। हिंदुओं पर चोरी और अन्य अपराधों के झूठे आरोप लगाए जाएंगे ताकि स्थानीय लोग उनके खिलाफ हिंसा कर सकें।

शेख हसीना भी चुनावी राजनीति का बड़ा मुद्दा बनी हुई हैं। कई दल उन्हें 'भारत समर्थक' और 'बांग्लादेश विरोधी' करार दे रहे हैं। भारत पर हसीना को शरण देने के आरोप लगाए जा रहे हैं, जबकि बांग्लादेश उनकी प्रत्यर्पण मांग चुका है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह रणनीति कितनी सफल होगी, यह कहना मुश्किल है। हालांकि, बांग्लादेश की बड़ी आबादी भारत के साथ अच्छे संबंध चाहती है, न कि पाकिस्तान के साथ। इसके बावजूद, कुछ नेताओं को लगता है कि धार्मिक आधार पर ध्रुवीकरण से उन्हें राजनीतिक लाभ मिल सकता है।

अधिकारियों का कहना है कि भारत और हिंदू-विरोधी बयानबाजी से जमात-ए-इस्लामी को खासा फायदा हो रहा है। सबसे बड़ी चिंता यह है कि आने वाले दिनों में हालात और बिगड़ सकते हैं। देश में कई हिंदू परिवार भय के माहौल में जी रहे हैं और यदि हिंसा बढ़ी तो बड़े पैमाने पर पलायन की स्थिति बन सकती है। इससे सीमावर्ती इलाकों पर अतिरिक्त दबाव पड़ेगा, जो पहले से ही जमात समर्थित मोहम्मद यूनुस के सत्ता में आने के बाद संवेदनशील बन चुके हैं।

बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों का उत्पीड़न कोई नई बात नहीं है। वर्षों से ऐसा होता आ रहा है और समय के साथ उनकी आबादी में भी भारी गिरावट आई है। अधिकारियों के अनुसार, इस बार स्थिति इसलिए ज्यादा गंभीर है क्योंकि यह केवल उत्पीड़न नहीं, बल्कि सुनियोजित वोट बैंक राजनीति का हिस्सा बन चुका है।

यह सब ऐसे समय हो रहा है जब कई नेता देश में इस्लामिक राज्य की स्थापना की मांग कर रहे हैं और संविधान के बजाय शरिया कानून लागू करने की बात कर रहे हैं। ऐसे तनावपूर्ण माहौल में बांग्लादेश में रहने वाले अल्पसंख्यकों की सुरक्षा को लेकर गहरी चिंता बनी हुई है।

अधिकारियों का कहना है कि चुनाव संपन्न होने तक अल्पसंख्यकों के खिलाफ उत्पीड़न और हिंसा रुकने की संभावना बेहद कम है, बल्कि इसके कई गुना बढ़ने की आशंका है।

Point of View

यह कहना आवश्यक है कि हमें इस मुद्दे को गंभीरता से लेना चाहिए। बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों की सुरक्षा और अधिकारों की रक्षा करना हर नागरिक का कर्तव्य है। हमें एकजुट होकर इस प्रकार की साजिशों का विरोध करना चाहिए।
NationPress
06/02/2026

Frequently Asked Questions

बांग्लादेश में अल्पसंख्यक हिंदुओं के खिलाफ हिंसा का क्या कारण है?
हिंसा का मुख्य कारण आगामी चुनावों में वोटों का ध्रुवीकरण और हिंदू-विरोधी बयानबाजी है।
क्या इस स्थिति से बांग्लादेश के हिंदू परिवारों पर असर पड़ेगा?
हाँ, हिंदू परिवार भय के माहौल में जी रहे हैं और अगर हिंसा बढ़ी तो पलायन की स्थिति बन सकती है।
क्या बांग्लादेश सरकार इस साजिश को रोकने के लिए कुछ कर रही है?
अधिकारियों का कहना है कि चुनाव संपन्न होने तक उत्पीड़न और हिंसा रुकने की संभावना कम है।
बांग्लादेश में हिंदू समुदाय की स्थिति क्या है?
हिंदू समुदाय की स्थिति बेहद चिंताजनक है और उनकी आबादी में गिरावट आई है।
क्या इस्लामिक राज्य की स्थापना की मांग से स्थिति और बिगड़ सकती है?
हाँ, इस्लामिक राज्य की मांग से स्थिति और अधिक तनावपूर्ण हो सकती है।
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