बांग्लादेश में खसरे से 1,147 मौतें: टीकाकरण कवरेज 95% से नीचे गिरने का नतीजा
सारांश
मुख्य बातें
बांग्लादेश में खसरे का प्रकोप चिंताजनक रूप ले चुका है — मार्च 2025 के मध्य से अब तक 2,02,000 से अधिक संदिग्ध मामले सामने आ चुके हैं और 1,147 लोगों की मौत हो चुकी है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के आंकड़ों के अनुसार, इस साल बांग्लादेश में दुनिया के किसी भी अन्य देश की तुलना में खसरे के सबसे अधिक संदिग्ध मामले दर्ज हुए हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, नियमित टीकाकरण कार्यक्रम में आई गिरावट इस त्रासदी का मुख्य कारण है।
मौतों का आँकड़ा और प्रकोप की गंभीरता
WHO के आंकड़ों के अनुसार, कुल संदिग्ध मामलों में से 22,000 मामलों की पुष्टि प्रयोगशाला जाँच से हुई है। सबसे चिंताजनक तथ्य यह है कि मृतकों में 94 प्रतिशत बच्चे पाँच साल से कम उम्र के हैं — यानी वह वर्ग जो टीकाकरण से सबसे अधिक सुरक्षित हो सकता था।
सितंबर 2025 में औसतन प्रतिदिन 1,198 नए मामले सामने आए, जो मई के बाद से सर्वाधिक संख्या है। यह संकेत देता है कि प्रकोप पर अभी तक नियंत्रण नहीं पाया जा सका है।
टीकाकरण कवरेज में खतरनाक गिरावट
WHO और यूनिसेफ के संयुक्त अनुमान के अनुसार, 2025 में बांग्लादेश में पहली खुराक का कवरेज गिरकर 90 प्रतिशत और दूसरी खुराक का कवरेज 86 प्रतिशत रह गया। यह 'हर्ड इम्युनिटी' के लिए आवश्यक 95 प्रतिशत के स्तर से काफी नीचे है।
गौरतलब है कि हाल के वर्षों में बांग्लादेश ने इस लक्ष्य को लगभग हासिल कर लिया था, किंतु 2025 में कवरेज में तेज़ गिरावट आई। रिपोर्टों के अनुसार, टीकाकरण कराने वाले लोगों की संख्या लक्ष्य से 100 प्रतिशत से भी अधिक दर्ज की गई, जो यह इंगित करती है कि खुराक की गिनती या लक्ष्य निर्धारण में गंभीर त्रुटियाँ हुई हैं।
डेटा की कमज़ोरी और प्रशासनिक खामियाँ
यूनिसेफ और बांग्लादेश सांख्यिकी ब्यूरो के अनुसार, देश में 40 प्रतिशत बच्चों का पंजीकरण ही नहीं हुआ था। इसके साथ ही सरकारी आंकड़े बताते हैं कि स्वास्थ्य कर्मियों के लगभग एक-तिहाई पद खाली पड़े हैं।
WHO के दस्तावेज़ों और वैज्ञानिकों, स्वास्थ्य कर्मियों तथा अधिकारियों से हुई बातचीत के आधार पर कहा जा रहा है कि गलत आंकड़ों ने आपातकालीन स्थिति से निपटने की क्षमता को भी कमज़ोर किया, जिसके चलते लाखों बच्चे टीकाकरण से वंचित रह गए।
एक परिवार की दर्दनाक कहानी
पूर्वोत्तर सिलहट क्षेत्र के दो वर्षीय अरमान हुसैन की मौत इस संकट का एक मर्मस्पर्शी उदाहरण है। जुलाई 2025 में उसकी मृत्यु हो गई — उसे खसरे का टीका नहीं लगाया गया था। परिवार ने इलाज का खर्च उठाने के लिए अपना तिपहिया ऑटो-रिक्शा बेच दिया, लेकिन अस्पताल में भर्ती होने के 24 घंटे के भीतर ही उसने दम तोड़ दिया। बच्चे के पिता ने बताया कि स्वास्थ्य कर्मी उनके दूर-दराज के गाँव तक पहुँच ही नहीं सके थे।
विशेषज्ञों की सिफारिशें और आगे की राह
स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने बांग्लादेश सरकार से आग्रह किया है कि वह पाँच साल से अधिक उम्र के बच्चों के लिए भी टीकाकरण अभियान का विस्तार करे, क्योंकि खसरे के कुल मामलों में से एक-तिहाई मामले इसी आयु वर्ग में दर्ज हुए हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, टीकाकरण कवरेज में कमी, कमज़ोर डेटा प्रणाली और सुदूर क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं की अनुपलब्धता — इन तीन कारकों ने मिलकर इस संकट को विकराल बनाया है। यह प्रकोप एक बार फिर साबित करता है कि टीकाकरण बुनियादी ढाँचे की अनदेखी किस कदर जानलेवा साबित हो सकती है।