बांग्लादेश में खसरे का प्रकोप: 825 बच्चों की मौत, 1.24 लाख से अधिक संदिग्ध मामले
सारांश
मुख्य बातें
बांग्लादेश में खसरे का प्रकोप पिछले तीन महीनों से गंभीर रूप धारण किए हुए है। स्वास्थ्य सेवा महानिदेशालय (डीजीएचएस) के आंकड़ों के अनुसार, 27 जुलाई 2026 को सुबह 8 बजे तक पिछले 24 घंटों में खसरे जैसे लक्षणों वाली बीमारी से पाँच और बच्चों की मौत हो गई, जिससे कुल मृतक संख्या 825 तक पहुँच गई। यह संकट तब और गहरा हो जाता है जब सामने आता है कि देश में टीकाकरण कवरेज वर्ष 2025 में घटकर मात्र 57 प्रतिशत रह गया था।
मौतों का वर्गीकरण और मामलों की स्थिति
डीजीएचएस के ताज़ा आंकड़ों के अनुसार, कुल 825 मौतों में से 730 मौतें संदिग्ध खसरा श्रेणी में आती हैं, जबकि 95 मौतें प्रयोगशाला-पुष्टि (लैब कन्फर्म) खसरे के कारण हुई हैं और यह संख्या पिछले कुछ दिनों से स्थिर बनी हुई है। पिछले 24 घंटों में खसरे के 992 नए संदिग्ध मामले सामने आए, जिससे देशभर में संदिग्ध मामलों की कुल संख्या 1,24,745 हो गई है।
इसी अवधि में 113 नए प्रयोगशाला-पुष्टि मामले भी दर्ज किए गए, जिससे कन्फर्म मामलों का कुल आँकड़ा 15,555 पहुँच गया। 15 मार्च से अब तक 1,07,654 संदिग्ध मरीज़ों को अस्पताल में भर्ती किया जा चुका है, जिनमें से 1,03,467 ठीक हो चुके हैं।
टीकाकरण में चूक: असली वजह
स्वास्थ्य विशेषज्ञों और रिपोर्टों के अनुसार, बांग्लादेश कभी भी खसरा-युक्त टीके की पहली और दूसरी दोनों खुराकों के लिए 95 प्रतिशत कवरेज हासिल नहीं कर सका — जो किसी भी खसरा प्रकोप को रोकने के लिए न्यूनतम आवश्यक स्तर माना जाता है। रिपोर्टों के अनुसार, वर्ष 2025 में टीकाकरण कवरेज घटकर करीब 57 प्रतिशत रह गया।
यह ऐसे समय में और चिंताजनक है जब सरकारी प्रशासनिक आंकड़ों में टीकाकरण कवरेज 100 प्रतिशत से अधिक दर्शाया जाता रहा। दूसरी ओर, विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) और यूनिसेफ के अनुमानों के अनुसार, बांग्लादेश में खसरा टीकाकरण कवरेज वर्ष 2010 से लगातार 93 से 96 प्रतिशत के बीच रहा। सरकारी दावों और अंतरराष्ट्रीय अनुमानों के बीच यह अंतर एक गंभीर चेतावनी संकेत था, जिसे समय रहते नहीं पहचाना गया।
डेटा की कमज़ोरी और प्रणालीगत विफलता
गौरतलब है कि टीकाकरण कवरेज, मौसमी बदलाव और संक्रमण के पुराने पैटर्न से जुड़े सांख्यिकीय मॉडल के ज़रिए अधिकांश खसरा प्रकोप का पहले ही अनुमान लगाया जा सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि गुणवत्तापूर्ण डेटा किसी भी प्रभावी सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणाली की नींव होता है — यह जानकारी को जमीनी स्तर पर लागू की जा सकने वाली रणनीतियों में बदलने में सहायक होता है।
रिपोर्टों के अनुसार, "इन आंकड़ों में अंतर पहले से ही एक चेतावनी संकेत था, लेकिन हम समय रहते इसे पहचानने और संभावित संकट का अनुमान लगाने में विफल रहे।" यह प्रकोप बांग्लादेश की सार्वजनिक स्वास्थ्य निगरानी प्रणाली की गहरी खामियों को उजागर करता है।
आगे की राह
डीजीएचएस की निगरानी जारी है और प्रतिदिन आंकड़े अपडेट किए जा रहे हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञ आपातकालीन टीकाकरण अभियान और बेहतर डेटा संग्रह तंत्र की माँग कर रहे हैं, ताकि भविष्य में ऐसे प्रकोप को समय रहते रोका जा सके। जब तक टीकाकरण कवरेज 95 प्रतिशत के स्तर तक नहीं पहुँचता, विशेषज्ञों का कहना है कि खसरे का यह संकट और गहरा हो सकता है।