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बांग्लादेश में खसरे से 6 और बच्चों की मौत, मृतक संख्या 973 के पार; टीकाकरण में चूक बनी वजह

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बांग्लादेश में खसरे से 6 और बच्चों की मौत, मृतक संख्या 973 के पार; टीकाकरण में चूक बनी वजह

सारांश

बांग्लादेश में खसरे से मरने वालों की संख्या 973 के पार पहुँच गई है — और यह संकट अचानक नहीं आया। यूनिसेफ ने सरकार को पाँच-छह बार चेताया, WHO ने वैक्सीन की कमी दर्ज की, फिर भी टीकाकरण कवरेज 2025 में आठ साल के निचले स्तर 56.2% पर आ गई। यह त्रासदी नीतिगत चूक का नतीजा है।

मुख्य बातें

31 अगस्त 2026 तक बांग्लादेश में खसरे से पुष्ट और संदिग्ध मौतों की कुल संख्या 973 हो गई है, जिसमें सोमवार को 6 नई मौतें शामिल हैं।
पुष्ट मौतें 99 , संदिग्ध मौतें 874 ; कुल पुष्ट मामले 19,312 और संदिग्ध मामले 1,57,991 ।
जीसीडीजी की रिपोर्ट के अनुसार, 2024-25 में अंतरिम सरकार द्वारा टीकाकरण व्यवस्था बदलने से आपूर्ति शृंखला बाधित हुई।
2025 में खसरा टीकाकरण कवरेज घटकर 56.2% रही — 2017-2025 के बीच का सबसे निचला स्तर।
यूनिसेफ ने 2024-2026 के बीच अंतरिम सरकार को 5-6 औपचारिक पत्र और 10 बैठकों में वैक्सीन कमी की चेतावनी दी थी।
WHO ने एमआर वैक्सीन की देशव्यापी कमी और नियमित टीकाकरण में गिरावट को 2026 के प्रकोप का मुख्य कारण बताया है।

बांग्लादेश में खसरे का प्रकोप थमने का नाम नहीं ले रहा। 31 अगस्त 2026 को स्वास्थ्य सेवा महानिदेशालय (डीजीएचएस) द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, पिछले 24 घंटों में छह और बच्चों की मौत हो गई, जिससे इस वर्ष खसरे से हुई पुष्ट और संदिग्ध मौतों की कुल संख्या 973 तक पहुँच गई है। स्थानीय मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, ताज़ा सभी छह मौतें संदिग्ध खसरा संक्रमण से जुड़ी बताई जा रही हैं।

मौजूदा आंकड़े और संक्रमण की स्थिति

डीजीएचएस के नवीनतम बुलेटिन के अनुसार, खसरे से पुष्ट मौतों की संख्या 99 पर बनी हुई है, जबकि संदिग्ध मौतें बढ़कर 874 हो गई हैं। पिछले 24 घंटों में 1,162 नए संदिग्ध मामले सामने आए हैं, जिससे संदिग्ध मामलों का कुल आंकड़ा 1,57,991 तक जा पहुँचा है। इसी अवधि में 94 नए पुष्ट मामले भी दर्ज किए गए, जिससे कुल पुष्ट मामले 19,312 हो गए हैं।

अंतरराष्ट्रीय रिपोर्ट ने बताया 'रोकी जा सकती थी यह त्रासदी'

कनाडा स्थित ग्लोबल सेंटर फॉर डेमोक्रेटिक गवर्नेंस (जीसीडीजी) ने अपनी रिपोर्ट 'प्रिवेंटेबल ट्रेजेडी: बांग्लादेश 2026 मीजल्स आउटब्रेक' में इस प्रकोप को बांग्लादेश के हाल के वर्षों के सबसे बड़े सार्वजनिक स्वास्थ्य संकटों में से एक करार दिया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि महामारी विज्ञान के नज़रिए से यह प्रकोप अप्रत्याशित नहीं था — यह उन नीतिगत चूकों का परिणाम है जो वर्षों से जमा होती रहीं।

रिपोर्ट के अनुसार, 2024-25 के दौरान मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार के कार्यकाल में टीकों की आपूर्ति और स्वास्थ्य कार्यक्रमों में आई बाधाओं ने संकट को गहरा किया। नियमित टीकाकरण का छूट जाना, पूरक टीकाकरण कार्यक्रमों का रद्द होना, टीकों की खरीद में प्रशासनिक देरी और जोखिम वाले समूहों की समय पर पहचान न हो पाना — ये सभी कारक इस त्रासदी के पीछे बताए गए हैं।

टीकाकरण व्यवस्था में बदलाव और यूनिसेफ की चेतावनी

जीसीडीजी की रिपोर्ट में बताया गया कि बांग्लादेश पहले यूनिसेफ की अंतरराष्ट्रीय आपूर्ति प्रणाली के ज़रिए विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) द्वारा अनुमोदित टीके खरीदता था। अंतरिम सरकार ने इस व्यवस्था को बदलकर खुली निविदा प्रणाली लागू कर दी, जिससे आपूर्ति शृंखला बाधित हुई। रिपोर्ट में यूनिसेफ के हवाले से दावा किया गया है कि एजेंसी ने 2024 से 2026 के बीच संभावित वैक्सीन कमी को लेकर अंतरिम सरकार को पाँच से छह औपचारिक पत्र भेजे थे और लगभग 10 बैठकों में भी चेतावनी दी थी।

गौरतलब है कि बांग्लादेशी समाचार पत्र समकाल में प्रकाशित विस्तारित टीकाकरण कार्यक्रम (ईपीआई) के आंकड़ों के अनुसार, 2025 में खसरा टीकाकरण कवरेज घटकर 56.2 प्रतिशत रह गई — जो 2017 से 2025 के बीच का सबसे निचला स्तर था।

WHO ने चिह्नित किए मुख्य कारण

बाद में विश्व स्वास्थ्य संगठन ने 2024-25 के दौरान बांग्लादेश में मीजल्स-रूबेला (एमआर) वैक्सीन की देशव्यापी कमी और नियमित टीकाकरण में आई गिरावट को बच्चों की प्रतिरक्षा क्षमता कमज़ोर होने तथा 2026 के प्रकोप के मुख्य कारणों के रूप में चिह्नित किया है।

विशेषज्ञ क्या कहते हैं और आगे क्या होगा

स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, स्थिति पर काबू पाने के लिए व्यापक टीकाकरण अभियान, वैक्सीन की पर्याप्त उपलब्धता और जोखिम वाले क्षेत्रों में विशेष निगरानी की तत्काल आवश्यकता है। यह ऐसे समय में आया है जब बांग्लादेश पहले से ही राजनीतिक और प्रशासनिक उथल-पुथल से जूझ रहा है। यदि टीकाकरण कवरेज में शीघ्र सुधार नहीं हुआ, तो मृतक संख्या का आंकड़ा और ऊपर जाने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।

संपादकीय दृष्टिकोण

अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों के पत्र थे, और फिर भी प्रशासनिक बदलावों ने टीकाकरण की नींव खोखली कर दी। यूनिसेफ की दस बैठकों और छह पत्रों के बावजूद कार्रवाई न होना यह दर्शाता है कि जवाबदेही का ढाँचा पूरी तरह विफल रहा। 56.2% टीकाकरण कवरेज किसी भी महामारी विज्ञानी के लिए 'हर्ड इम्युनिटी' की दहलीज से बहुत नीचे है — और इस अंतर की कीमत बच्चों की जान से चुकाई जा रही है। असली सवाल यह है कि जब तक राजनीतिक जवाबदेही तय नहीं होगी, क्या भविष्य में ऐसे संकट टाले जा सकते हैं?
RashtraPress
1 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

बांग्लादेश में खसरे से अब तक कितनी मौतें हो चुकी हैं?
डीजीएचएस के आंकड़ों के अनुसार, 31 अगस्त 2026 तक बांग्लादेश में खसरे से पुष्ट और संदिग्ध मौतों की कुल संख्या 973 हो गई है। इसमें 99 पुष्ट और 874 संदिग्ध मौतें शामिल हैं।
बांग्लादेश में खसरे का प्रकोप इतना गंभीर क्यों हुआ?
जीसीडीजी और WHO की रिपोर्टों के अनुसार, 2024-25 में अंतरिम सरकार द्वारा टीकाकरण व्यवस्था में बदलाव, वैक्सीन आपूर्ति में देरी और नियमित टीकाकरण कार्यक्रमों के रद्द होने से बच्चों की प्रतिरक्षा क्षमता कमज़ोर पड़ गई। 2025 में टीकाकरण कवरेज गिरकर 56.2% पर आ गई, जो 2017-2025 के बीच का सबसे निचला स्तर था।
क्या यूनिसेफ ने पहले से चेतावनी दी थी?
हाँ, रिपोर्ट में यूनिसेफ के हवाले से कहा गया है कि एजेंसी ने 2024 से 2026 के बीच बांग्लादेश की अंतरिम सरकार को पाँच से छह औपचारिक पत्र भेजे थे और लगभग 10 बैठकों में वैक्सीन की संभावित कमी को लेकर आगाह किया था।
बांग्लादेश में खसरे के कुल मामले कितने हैं?
डीजीएचएस के अनुसार, 31 अगस्त 2026 तक कुल संदिग्ध मामले 1,57,991 और पुष्ट मामले 19,312 दर्ज किए गए हैं। पिछले 24 घंटों में 1,162 नए संदिग्ध और 94 नए पुष्ट मामले सामने आए।
स्थिति सुधारने के लिए क्या किए जाने की ज़रूरत है?
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, व्यापक टीकाकरण अभियान, वैक्सीन की पर्याप्त उपलब्धता और जोखिम वाले क्षेत्रों में विशेष निगरानी तत्काल आवश्यक है। खसरा एक ऐसी बीमारी है जिसे टीकाकरण के ज़रिए पूरी तरह रोका जा सकता है।
राष्ट्र प्रेस
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