10 अगस्त 2026
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बांग्लादेश में खसरे का कहर: 6 और बच्चों की मौत, 2026 में मृतक संख्या 873 पार

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बांग्लादेश में खसरे का कहर: 6 और बच्चों की मौत, 2026 में मृतक संख्या 873 पार

सारांश

बांग्लादेश में खसरे का प्रकोप 2026 का सबसे बड़ा सार्वजनिक स्वास्थ्य संकट बन चुका है — 873 मौतें, 1,36,320 से अधिक संदिग्ध मामले। GCDG की रिपोर्ट के अनुसार, यह त्रासदी टीकाकरण में प्रशासनिक चूक और वैक्सीन आपूर्ति में रुकावट का नतीजा है — जिसे रोका जा सकता था।

मुख्य बातें

9 अगस्त 2026 को 6 और बच्चों की खसरे जैसे लक्षणों से मौत; 2026 में कुल मृतक संख्या 873 हुई।
प्रयोगशाला-पुष्ट मौतें 98 , संदिग्ध मौतें 775 ; पुष्ट संक्रमित 17,115 , संदिग्ध मामले 1,36,320 ।
2025 में खसरे की टीकाकरण कवरेज घटकर 56.2% — 2017 से 2025 के बीच का सबसे निम्न स्तर।
GCDG की रिपोर्ट के अनुसार, 2024-2026 के बीच यूनिसेफ ने वैक्सीन कमी पर 5-6 औपचारिक पत्र और 10 बैठकें कीं, फिर भी समस्या नहीं सुलझी।
अंतरिम सरकार द्वारा यूनिसेफ आपूर्ति व्यवस्था बदलकर खुली निविदा प्रक्रिया अपनाना प्रकोप का प्रमुख कारण बताया गया।
BNP सरकार पर ज्ञात जोखिमों पर धीमी प्रतिक्रिया और पारदर्शिता की कमी का आरोप।

बांग्लादेश में खसरे का प्रकोप थमने का नाम नहीं ले रहा। 9 अगस्त 2026 को रविवार के दिन खसरे जैसे लक्षणों वाले 6 और बच्चों की मौत की पुष्टि हुई, जिससे वर्ष 2026 में खसरे से जुड़ी कुल पुष्ट और संदिग्ध मौतों की संख्या बढ़कर 873 हो गई है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ इसे हाल के वर्षों का सबसे गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य संकट बता रहे हैं।

मौजूदा आँकड़े और स्थिति

बांग्लादेश स्वास्थ्य सेवा महानिदेशालय (DGHS) द्वारा जारी आधिकारिक बयान के अनुसार, हाल में हुई सभी 6 मौतें अभी संदिग्ध श्रेणी में हैं। प्रयोगशाला में पुष्टि की गई मौतों की संख्या 98 पर स्थिर है, जबकि संदिग्ध मौतें बढ़कर 775 हो गई हैं।

पिछले 24 घंटों में देशभर में खसरे के 988 नए संदिग्ध मामले सामने आए, जिससे संदिग्ध मामलों की कुल संख्या 1,36,320 तक पहुँच गई। इसी अवधि में 75 नए प्रयोगशाला-पुष्ट मामले दर्ज हुए और कुल पुष्ट संक्रमितों की संख्या 17,115 हो गई।

प्रकोप की जड़ें: टीकाकरण में चूक

कनाडा स्थित ग्लोबल सेंटर फॉर डेमोक्रेटिक गवर्नेंस (GCDG) ने अपनी ताज़ा रिपोर्ट 'प्रिवेंटेबल ट्रेजेडी: बांग्लादेश'स 2026 मीज़ल्स आउटब्रेक' में कहा है कि यह संकट महामारी विज्ञान के नज़रिए से अप्रत्याशित नहीं था। रिपोर्ट के अनुसार, 2024-2025 के दौरान मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार के कार्यकाल में वैक्सीन आपूर्ति और स्वास्थ्य कार्यक्रमों में गंभीर रुकावटें आईं।

रिपोर्ट में उल्लेख है कि बांग्लादेश पहले विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) द्वारा स्वीकृत टीके यूनिसेफ (UNICEF) की अंतरराष्ट्रीय आपूर्ति प्रणाली के ज़रिए खरीदता था। अंतरिम सरकार ने इस व्यवस्था को बदलकर खुली निविदा प्रक्रिया लागू कर दी। रिपोर्ट के मुताबिक, 2024 से 2026 के बीच यूनिसेफ ने संभावित वैक्सीन कमी को लेकर अंतरिम सरकार को 5 से 6 औपचारिक पत्र भेजे और लगभग 10 बैठकें भी कीं, परंतु समस्या बनी रही।

गौरतलब है कि बांग्लादेशी अखबार 'समकाल' में प्रकाशित विस्तारित टीकाकरण कार्यक्रम (EPI) के आँकड़ों के अनुसार, 2025 में खसरे के टीकाकरण की कवरेज घटकर 56.2 प्रतिशत रह गई — जो 2017 से 2025 के बीच का सबसे निम्न स्तर था। इसके अलावा, WHO ने भी 2024-2025 के दौरान खसरा-रूबेला (MR) वैक्सीन की देशव्यापी कमी और नियमित टीकाकरण में आई गिरावट को बच्चों की प्रतिरक्षा कमज़ोर होने तथा 2026 के प्रकोप के मुख्य कारणों में गिनाया है।

व्यवस्था की विफलताएँ

GCDG की रिपोर्ट के अनुसार, इस प्रकोप के पीछे कई प्रशासनिक और स्वास्थ्य-व्यवस्था संबंधी विफलताएँ जिम्मेदार रहीं — जिनमें वैक्सीन की खरीद, परिवहन और आपूर्ति में रुकावटें, EPI सत्रों का रद्द होना, MR1 और MR2 टीकाकरण कवरेज में गिरावट, जोखिम वाले बच्चों की समय पर पहचान न हो पाना और अतिरिक्त टीकाकरण अभियानों का अभाव प्रमुख हैं।

संगठन ने यह भी आरोप लगाया कि इस वर्ष सत्ता में आई बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) सरकार उन जोखिमों पर तेज़ी से कार्रवाई करने में विफल रही, जिनके बारे में पहले से जानकारी उपलब्ध थी। GCDG ने पारदर्शिता की कमी की भी आलोचना करते हुए कहा कि प्रकोप के दौरान सूचनाओं को सार्वजनिक करने में देरी और स्पष्टता का अभाव मौजूदा सरकार की स्वास्थ्य प्रतिक्रिया की एक गंभीर कमज़ोरी रही है।

आगे की राह

यह ऐसे समय में आया है जब बांग्लादेश पहले से ही राजनीतिक और आर्थिक उथल-पुथल से जूझ रहा है। GCDG ने इस प्रकोप को एक रोके जा सकने वाली त्रासदी बताया है और माँग की है कि सरकार टीकाकरण अभियानों को तत्काल गति दे, आँकड़ों में पारदर्शिता लाए और अंतरराष्ट्रीय स्वास्थ्य संगठनों के साथ समन्वय मज़बूत करे। जब तक टीकाकरण कवरेज में उल्लेखनीय सुधार नहीं होता, विशेषज्ञों के अनुसार मामलों में और वृद्धि की आशंका बनी रहेगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

तकनीक सिद्ध थी, और चेतावनियाँ भी दी गई थीं, फिर भी 873 जानें गईं। यूनिसेफ के 5-6 पत्रों और 10 बैठकों के बावजूद अंतरिम सरकार का निष्क्रिय रहना और खुली निविदा प्रक्रिया में उलझे रहना यह दर्शाता है कि प्रशासनिक प्राथमिकताओं ने बच्चों की जान को पीछे धकेल दिया। मौजूदा BNP सरकार पर भी ज्ञात जोखिमों पर धीमी प्रतिक्रिया के आरोप गंभीर हैं। यह प्रकरण दक्षिण एशिया के लिए एक कड़ी चेतावनी है कि राजनीतिक संक्रमण के दौर में स्वास्थ्य ढाँचे की निरंतरता सुनिश्चित करना कितना ज़रूरी है।
RashtraPress
10 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

बांग्लादेश में 2026 का खसरा प्रकोप कितना गंभीर है?
यह 2026 के सबसे गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य संकटों में से एक है। 9 अगस्त 2026 तक कुल 873 मौतें (98 पुष्ट, 775 संदिग्ध) दर्ज हो चुकी हैं और संदिग्ध मामलों की संख्या 1,36,320 तक पहुँच गई है।
बांग्लादेश में खसरे का प्रकोप क्यों इतना बड़ा हुआ?
GCDG की रिपोर्ट के अनुसार, 2024-2025 में टीकाकरण कवरेज घटकर 56.2% रह गई और वैक्सीन आपूर्ति में प्रशासनिक रुकावटें आईं। अंतरिम सरकार ने यूनिसेफ की स्थापित आपूर्ति व्यवस्था बदलकर खुली निविदा प्रक्रिया अपनाई, जिससे वैक्सीन की कमी हो गई।
मोहम्मद यूनुस की अंतरिम सरकार की इस प्रकोप में क्या भूमिका रही?
GCDG की रिपोर्ट के अनुसार, 2024-2025 के दौरान अंतरिम सरकार के कार्यकाल में EPI सत्र रद्द हुए, वैक्सीन खरीद में देरी हुई और यूनिसेफ की चेतावनियों पर ध्यान नहीं दिया गया। यूनिसेफ ने इस दौरान 5-6 औपचारिक पत्र और लगभग 10 बैठकें कीं, लेकिन समस्या नहीं सुलझी।
BNP सरकार पर क्या आरोप लगाए गए हैं?
GCDG ने आरोप लगाया है कि 2026 में सत्ता में आने के बाद बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) सरकार पहले से ज्ञात जोखिमों पर तेज़ी से कार्रवाई करने में विफल रही। इसके अलावा, प्रकोप के दौरान सूचनाओं को सार्वजनिक करने में देरी और पारदर्शिता की कमी को भी गंभीर कमज़ोरी बताया गया है।
खसरे के इस प्रकोप को रोका जा सकता था?
हाँ — GCDG ने इसे 'रोकी जा सकने वाली त्रासदी' कहा है। WHO द्वारा स्वीकृत MR वैक्सीन उपलब्ध थी और यह बीमारी टीकाकरण से पूरी तरह रोकी जा सकती है। विशेषज्ञों के अनुसार, यदि 2024-2025 में टीकाकरण कार्यक्रम बाधित न होते, तो इस स्तर का प्रकोप नहीं होता।
राष्ट्र प्रेस
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