17 अगस्त 2026
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बांग्लादेश में खसरे का कहर: 8 और बच्चों की मौत, मृतक संख्या 902 पार, 1.41 लाख संदिग्ध मामले

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बांग्लादेश में खसरे का कहर: 8 और बच्चों की मौत, मृतक संख्या 902 पार, 1.41 लाख संदिग्ध मामले

सारांश

बांग्लादेश में खसरे का प्रकोप थमने का नाम नहीं ले रहा — 902 मौतें, 1.41 लाख से अधिक संदिग्ध मामले। जीसीडीजी की रिपोर्ट बताती है कि यह त्रासदी टाली जा सकती थी, लेकिन अंतरिम सरकार के दौर में टीकाकरण व्यवस्था की विफलता और यूनिसेफ की चेतावनियाँ अनसुनी रहने से यह संकट गहराता गया।

मुख्य बातें

शनिवार, 15 अगस्त 2026 को बांग्लादेश में खसरे से 8 और बच्चों की मौत, कुल मृतक संख्या 902 पहुँची।
पुष्ट मौतें 99 , संदिग्ध मौतें 803 ; कुल पुष्ट मामले 17,800 , संदिग्ध मामले 1,41,776 ।
जीसीडीजी की रिपोर्ट के अनुसार, 2024-25 में मोहम्मद यूनुस सरकार के दौर में टीकाकरण कार्यक्रमों में बाधा और ओपन टेंडर नीति ने संकट की ज़मीन तैयार की।
यूनिसेफ ने 2024-26 के बीच वैक्सीन कमी पर 5-6 औपचारिक पत्र और लगभग 10 बैठकें कीं, लेकिन स्थिति नहीं सुधरी।
खसरा पूरी तरह टीकाकरण से रोकने योग्य बीमारी है — विशेषज्ञों ने तत्काल व्यापक अभियान की माँग की है।

बांग्लादेश में खसरे का प्रकोप थमने का नाम नहीं ले रहा। स्वास्थ्य सेवा महानिदेशालय (डीजीएचएस) के अनुसार, शनिवार, 15 अगस्त 2026 को पिछले 24 घंटों में कम से कम आठ और बच्चों की मौत हो गई, जिससे इस वर्ष पुष्ट और संदिग्ध मौतों की संयुक्त संख्या बढ़कर 902 हो गई है। यह प्रकोप बांग्लादेश के हालिया इतिहास के सबसे गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य संकटों में से एक बन चुका है।

मृत्यु और संक्रमण के ताज़ा आँकड़े

डीजीएचएस के आँकड़ों के अनुसार, पुष्ट मौतों की संख्या 99 पर बनी हुई है, जबकि संदिग्ध मौतों का आँकड़ा 803 तक पहुँच गया है। पिछले 24 घंटों में 728 नए संदिग्ध मामले सामने आए, जिससे कुल संदिग्ध मामलों की संख्या 1,41,776 हो गई। इसी अवधि में 70 नए पुष्ट मामले भी दर्ज किए गए और कुल पुष्ट मामले 17,800 तक पहुँच गए। नई आठ मौतें संदिग्ध श्रेणी में दर्ज की गई हैं।

प्रकोप की जड़ें: टीकाकरण में चूक और प्रशासनिक विफलता

कनाडा स्थित ग्लोबल सेंटर फॉर डेमोक्रेटिक गवर्नेंस (जीसीडीजी) ने अपनी रिपोर्ट 'प्रिवेंटेबल ट्रेजेडी: बांग्लादेश 2026 मीजल्स आउटब्रेक' में कहा है कि यह संकट महामारी विज्ञान के नज़रिए से अप्रत्याशित नहीं था। रिपोर्ट के अनुसार, 2024-25 के दौरान मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली तत्कालीन अंतरिम सरकार के कार्यकाल में टीकों की आपूर्ति और स्वास्थ्य कार्यक्रमों में गंभीर बाधाएँ आईं।

इन बाधाओं में नियमित टीकाकरण का छूट जाना, निर्धारित पूरक टीकाकरण अभियानों का रद्द होना, वैक्सीन खरीद में प्रशासनिक देरी और जोखिम वाली आबादी की समय पर पहचान न होना प्रमुख कारण बताए गए हैं।

यूनिसेफ की चेतावनियाँ अनसुनी रहीं

जीसीडीजी की रिपोर्ट में यूनिसेफ के हवाले से बताया गया है कि एजेंसी ने 2024 से 2026 के बीच संभावित वैक्सीन कमी को लेकर तत्कालीन अंतरिम सरकार को पाँच से छह औपचारिक पत्र भेजे और लगभग 10 बैठकें भी कीं, परंतु स्थिति में कोई सुधार नहीं हुआ। गौरतलब है कि बांग्लादेश लंबे समय से विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) द्वारा स्वीकृत टीके यूनिसेफ की अंतरराष्ट्रीय आपूर्ति व्यवस्था के ज़रिए खरीदता था। अंतरिम सरकार ने इस स्थापित व्यवस्था को बदलकर खुली निविदा (ओपन टेंडर) प्रणाली लागू कर दी, जिसे रिपोर्ट में संकट का एक अहम कारण बताया गया है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों की चिंता

जीसीडीजी ने इस बात पर विशेष चिंता जताई है कि खसरा एक ऐसी बीमारी है जिसे टीकाकरण के ज़रिए पूरी तरह रोका जा सकता है। यह ऐसे समय में आया है जब वैश्विक स्तर पर खसरे के मामले पहले से ही चिंताजनक स्तर पर हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि इस प्रकोप ने साबित किया है कि स्वास्थ्य तंत्र में प्रशासनिक निर्णय किस तरह जन-स्वास्थ्य पर सीधा और घातक असर डाल सकते हैं।

आगे की राह

फिलहाल बांग्लादेश में स्वास्थ्य अधिकारियों पर संकट से निपटने का दबाव बढ़ता जा रहा है। आँकड़ों में रोज़ाना हो रही बढ़ोतरी के बीच, तत्काल और व्यापक टीकाकरण अभियान की माँग तेज़ हो गई है। अंतरराष्ट्रीय स्वास्थ्य संगठनों की भूमिका और बांग्लादेश सरकार की प्रतिक्रिया आने वाले हफ्तों में इस संकट की दिशा तय करेगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि उस बीमारी का है जिसे दशकों पहले टीके से काबू में लाया जा चुका था। जीसीडीजी की रिपोर्ट जो उजागर करती है वह महज़ स्वास्थ्य विफलता नहीं, बल्कि नीतिगत लापरवाही की कहानी है — जब एक स्थापित यूनिसेफ आपूर्ति व्यवस्था को ओपन टेंडर के नाम पर बदला गया और यूनिसेफ की बार-बार की चेतावनियाँ अनसुनी रहीं। यह ऐसे समय में और भी चिंताजनक है जब वैश्विक स्तर पर खसरे के मामले बढ़ रहे हैं और कमज़ोर स्वास्थ्य तंत्र वाले देशों में एक भी प्रशासनिक चूक महामारी का रूप ले सकती है। असली सवाल यह है कि जब अंतरराष्ट्रीय संस्थाएँ बार-बार आगाह कर रही थीं, तो उस वक्त की सरकार ने क्यों नहीं सुना — और इसकी जवाबदेही कौन तय करेगा।
RashtraPress
17 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

बांग्लादेश में खसरे से अब तक कितनी मौतें हो चुकी हैं?
स्वास्थ्य सेवा महानिदेशालय (डीजीएचएस) के अनुसार, 15 अगस्त 2026 तक बांग्लादेश में खसरे से पुष्ट और संदिग्ध मौतों की कुल संख्या 902 हो गई है, जिसमें 99 पुष्ट और 803 संदिग्ध मौतें शामिल हैं।
बांग्लादेश में खसरे का यह प्रकोप इतना गंभीर क्यों हो गया?
जीसीडीजी की रिपोर्ट के अनुसार, 2024-25 में मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार के दौर में नियमित टीकाकरण छूटने, पूरक अभियान रद्द होने, वैक्सीन खरीद में प्रशासनिक देरी और यूनिसेफ की आपूर्ति व्यवस्था को ओपन टेंडर से बदलने के कारण यह संकट गहराया।
यूनिसेफ ने बांग्लादेश सरकार को कब और कितनी बार चेतावनी दी थी?
रिपोर्ट के अनुसार, यूनिसेफ ने 2024 से 2026 के बीच संभावित वैक्सीन कमी को लेकर अंतरिम सरकार को 5 से 6 औपचारिक पत्र भेजे और लगभग 10 बैठकें कीं, लेकिन स्थिति में कोई सुधार नहीं हुआ।
बांग्लादेश में खसरे के कुल कितने मामले सामने आए हैं?
15 अगस्त 2026 तक कुल संदिग्ध मामलों की संख्या 1,41,776 और पुष्ट मामलों की संख्या 17,800 हो गई है। पिछले 24 घंटों में 728 नए संदिग्ध और 70 नए पुष्ट मामले दर्ज किए गए।
क्या खसरे को रोका जा सकता था?
हाँ, विशेषज्ञों और जीसीडीजी की रिपोर्ट दोनों के अनुसार खसरा पूरी तरह टीकाकरण से रोकने योग्य बीमारी है। रिपोर्ट ने इस प्रकोप को 'प्रिवेंटेबल ट्रेजेडी' (टाली जा सकने वाली त्रासदी) करार दिया है, क्योंकि समय पर टीकाकरण से इसे रोका जा सकता था।
राष्ट्र प्रेस
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