बांग्लादेश में खसरे का कहर: 8 और बच्चों की मौत, मृतक संख्या 902 पार, 1.41 लाख संदिग्ध मामले
सारांश
मुख्य बातें
बांग्लादेश में खसरे का प्रकोप थमने का नाम नहीं ले रहा। स्वास्थ्य सेवा महानिदेशालय (डीजीएचएस) के अनुसार, शनिवार, 15 अगस्त 2026 को पिछले 24 घंटों में कम से कम आठ और बच्चों की मौत हो गई, जिससे इस वर्ष पुष्ट और संदिग्ध मौतों की संयुक्त संख्या बढ़कर 902 हो गई है। यह प्रकोप बांग्लादेश के हालिया इतिहास के सबसे गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य संकटों में से एक बन चुका है।
मृत्यु और संक्रमण के ताज़ा आँकड़े
डीजीएचएस के आँकड़ों के अनुसार, पुष्ट मौतों की संख्या 99 पर बनी हुई है, जबकि संदिग्ध मौतों का आँकड़ा 803 तक पहुँच गया है। पिछले 24 घंटों में 728 नए संदिग्ध मामले सामने आए, जिससे कुल संदिग्ध मामलों की संख्या 1,41,776 हो गई। इसी अवधि में 70 नए पुष्ट मामले भी दर्ज किए गए और कुल पुष्ट मामले 17,800 तक पहुँच गए। नई आठ मौतें संदिग्ध श्रेणी में दर्ज की गई हैं।
प्रकोप की जड़ें: टीकाकरण में चूक और प्रशासनिक विफलता
कनाडा स्थित ग्लोबल सेंटर फॉर डेमोक्रेटिक गवर्नेंस (जीसीडीजी) ने अपनी रिपोर्ट 'प्रिवेंटेबल ट्रेजेडी: बांग्लादेश 2026 मीजल्स आउटब्रेक' में कहा है कि यह संकट महामारी विज्ञान के नज़रिए से अप्रत्याशित नहीं था। रिपोर्ट के अनुसार, 2024-25 के दौरान मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली तत्कालीन अंतरिम सरकार के कार्यकाल में टीकों की आपूर्ति और स्वास्थ्य कार्यक्रमों में गंभीर बाधाएँ आईं।
इन बाधाओं में नियमित टीकाकरण का छूट जाना, निर्धारित पूरक टीकाकरण अभियानों का रद्द होना, वैक्सीन खरीद में प्रशासनिक देरी और जोखिम वाली आबादी की समय पर पहचान न होना प्रमुख कारण बताए गए हैं।
यूनिसेफ की चेतावनियाँ अनसुनी रहीं
जीसीडीजी की रिपोर्ट में यूनिसेफ के हवाले से बताया गया है कि एजेंसी ने 2024 से 2026 के बीच संभावित वैक्सीन कमी को लेकर तत्कालीन अंतरिम सरकार को पाँच से छह औपचारिक पत्र भेजे और लगभग 10 बैठकें भी कीं, परंतु स्थिति में कोई सुधार नहीं हुआ। गौरतलब है कि बांग्लादेश लंबे समय से विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) द्वारा स्वीकृत टीके यूनिसेफ की अंतरराष्ट्रीय आपूर्ति व्यवस्था के ज़रिए खरीदता था। अंतरिम सरकार ने इस स्थापित व्यवस्था को बदलकर खुली निविदा (ओपन टेंडर) प्रणाली लागू कर दी, जिसे रिपोर्ट में संकट का एक अहम कारण बताया गया है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों की चिंता
जीसीडीजी ने इस बात पर विशेष चिंता जताई है कि खसरा एक ऐसी बीमारी है जिसे टीकाकरण के ज़रिए पूरी तरह रोका जा सकता है। यह ऐसे समय में आया है जब वैश्विक स्तर पर खसरे के मामले पहले से ही चिंताजनक स्तर पर हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि इस प्रकोप ने साबित किया है कि स्वास्थ्य तंत्र में प्रशासनिक निर्णय किस तरह जन-स्वास्थ्य पर सीधा और घातक असर डाल सकते हैं।
आगे की राह
फिलहाल बांग्लादेश में स्वास्थ्य अधिकारियों पर संकट से निपटने का दबाव बढ़ता जा रहा है। आँकड़ों में रोज़ाना हो रही बढ़ोतरी के बीच, तत्काल और व्यापक टीकाकरण अभियान की माँग तेज़ हो गई है। अंतरराष्ट्रीय स्वास्थ्य संगठनों की भूमिका और बांग्लादेश सरकार की प्रतिक्रिया आने वाले हफ्तों में इस संकट की दिशा तय करेगी।