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बांग्लादेश में खसरे का प्रकोप: 24 घंटों में 4 और बच्चों की मौत, 2026 में मृतकों की संख्या 1,057 हुई

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बांग्लादेश में खसरे का प्रकोप: 24 घंटों में 4 और बच्चों की मौत, 2026 में मृतकों की संख्या 1,057 हुई

सारांश

बांग्लादेश में खसरे का प्रकोप 2026 का सबसे गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य संकट बन चुका है। 24 घंटों में 4 और बच्चों की मौत के साथ मृतकों की संख्या 1,057 हो गई। GCDG की रिपोर्ट बताती है कि यह त्रासदी रोकी जा सकती थी — टीका आपूर्ति में व्यवधान और यूनिसेफ की चेतावनियों को नज़रअंदाज़ करना इसकी मुख्य वजह बना।

मुख्य बातें

बांग्लादेश में खसरे से 24 घंटों में 4 और बच्चों की मौत, 2026 में कुल मृतक 1,057 ।
पुष्ट मौतें 101 , संदिग्ध मौतें 956 ; संदिग्ध मामले 1,79,814 , पुष्ट मामले 20,562 ।
15 मार्च से अब तक 1,58,589 मरीज़ अस्पताल में भर्ती, जिनमें से 1,52,225 स्वस्थ।
GCDG की रिपोर्ट के अनुसार, 2024-25 में अंतरिम सरकार के कार्यकाल में टीका आपूर्ति बाधित हुई और पूरक टीकाकरण कार्यक्रम रद्द किए गए।
यूनिसेफ ने 2024-2026 के बीच 5-6 औपचारिक पत्रों और करीब 10 बैठकों में टीके की कमी की चेतावनी दी थी।
खुली निविदा प्रक्रिया से WHO -स्वीकृत टीकों की यूनिसेफ आपूर्ति शृंखला बदली गई, जिससे आपूर्ति में देरी हुई।

बांग्लादेश में खसरे का प्रकोप लगातार गंभीर होता जा रहा है। पिछले 24 घंटों में खसरे जैसे लक्षणों से चार और बच्चों की मौत हो गई, जिसके बाद वर्ष 2026 में देश में खसरे से पुष्ट और संदिग्ध मौतों की कुल संख्या बढ़कर 1,057 हो गई है। बांग्लादेश के स्वास्थ्य सेवा महानिदेशालय (DGHS) के ताज़ा आँकड़े इस महामारी की बढ़ती गंभीरता को उजागर करते हैं।

मृत्यु और संक्रमण के ताज़ा आँकड़े

DGHS के अनुसार, चारों नई मौतों को खसरे से हुई संदिग्ध मौतों की श्रेणी में रखा गया है। इसके साथ ही संदिग्ध मौतों की कुल संख्या 956 हो गई है, जबकि प्रयोगशाला में पुष्ट मौतों का आँकड़ा 101 है। पिछले 24 घंटों में खसरे के 1,148 नए संदिग्ध मामले दर्ज हुए, जिससे देश में संदिग्ध मामलों की कुल संख्या 1,79,814 तक पहुँच गई। इसी अवधि में 88 नए मामलों की प्रयोगशाला जाँच में पुष्टि हुई, और पुष्ट मामलों की संख्या बढ़कर 20,562 हो गई।

15 मार्च से अब तक खसरे जैसे लक्षणों वाले 1,58,589 मरीज़ बांग्लादेश के विभिन्न अस्पतालों में भर्ती हो चुके हैं, जिनमें से 1,52,225 स्वस्थ होकर घर लौट चुके हैं।

अंतरराष्ट्रीय रिपोर्ट में गंभीर चेतावनी

कनाडा स्थित ग्लोबल सेंटर फॉर डेमोक्रेटिक गवर्नेंस (GCDG) ने अपनी रिपोर्ट 'प्रिवेंटेबल ट्रेजेडी: बांग्लादेश 2026 मीज़ल्स आउटब्रेक' में इस प्रकोप को बांग्लादेश के हालिया इतिहास के सबसे गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य संकटों में से एक करार दिया है। रिपोर्ट में ज़ोर देकर कहा गया है कि यह संकट टीकाकरण के ज़रिए पूरी तरह रोका जा सकता था, और महामारी विज्ञान के नज़रिए से यह अप्रत्याशित नहीं था।

GCDG के अनुसार, इस संकट की जड़ें 2024-25 के दौरान मुहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली तत्कालीन अंतरिम सरकार के कार्यकाल में जमाई गई थीं। उस दौर में टीकों की आपूर्ति और स्वास्थ्य कार्यक्रमों में व्यवधान, नियमित टीकाकरण में चूक, निर्धारित पूरक टीकाकरण कार्यक्रमों को रद्द करना, टीकों की खरीद में प्रशासनिक देरी और जोखिम वाली आबादी की समय रहते पहचान न होना — ये सभी कारक एक साथ काम करते रहे।

टीका खरीद प्रणाली में बदलाव और यूनिसेफ की चेतावनियाँ

रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि बांग्लादेश लंबे समय से विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) से स्वीकृत टीकों की खरीद संयुक्त राष्ट्र बाल कोष (यूनिसेफ) की अंतरराष्ट्रीय आपूर्ति शृंखला के माध्यम से करता था। हालाँकि, अंतरिम सरकार ने इस प्रणाली की जगह खुली निविदा प्रक्रिया अपना ली, जिससे आपूर्ति में गंभीर विलंब हुआ।

रिपोर्ट के अनुसार, यूनिसेफ ने 2024 से 2026 के बीच पाँच से छह औपचारिक पत्रों और करीब 10 बैठकों के ज़रिए अंतरिम सरकार को टीकों की संभावित कमी के बारे में बार-बार आगाह किया था। इन चेतावनियों को नज़रअंदाज़ किया जाना अब एक गंभीर प्रशासनिक विफलता के रूप में देखा जा रहा है।

सार्वजनिक स्वास्थ्य पर व्यापक असर

यह ऐसे समय में आया है जब बांग्लादेश पहले से ही राजनीतिक और प्रशासनिक अस्थिरता से जूझ रहा है। खसरा — जो एक पूरी तरह टीके से रोके जाने योग्य रोग है — का इस पैमाने पर फैलना वैश्विक स्वास्थ्य समुदाय के लिए गंभीर चिंता का विषय है। GCDG जैसे अंतरराष्ट्रीय संगठनों का यह कहना कि प्रकोप 'अप्रत्याशित नहीं' था, सरकारी तंत्र की जवाबदेही पर सवाल उठाता है।

आगे क्या होगा

फ़िलहाल DGHS स्थिति की निगरानी कर रहा है और अस्पतालों में भर्ती तथा टीकाकरण अभियानों की जानकारी साझा कर रहा है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि जब तक टीकाकरण की खाई को तेज़ गति से नहीं भरा जाता, संक्रमण और मौतों का सिलसिला जारी रहने की आशंका है। अंतरराष्ट्रीय स्वास्थ्य एजेंसियों की भूमिका और सरकारी प्रतिक्रिया की सतत समीक्षा आने वाले हफ्तों में निर्णायक होगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

057 मौतें — और वे सब खसरे से, जो एक पूरी तरह टीके से रोका जा सकने वाला रोग है — यह महज़ एक स्वास्थ्य आँकड़ा नहीं, बल्कि एक प्रशासनिक विफलता का दस्तावेज़ है। यूनिसेफ ने बार-बार चेताया, WHO-प्रमाणित आपूर्ति शृंखला थी, फिर भी टीका खरीद को खुली निविदा में बदलने का निर्णय लिया गया — और उसकी कीमत सैकड़ों बच्चों ने जान देकर चुकाई। मुख्यधारा की कवरेज जो अक्सर चूकती है वह यह है कि यह संकट किसी अदृश्य वायरस की देन नहीं — यह नीतिगत लापरवाही और संस्थागत चेतावनियों की अनदेखी का परिणाम है। अब असली सवाल यह है कि क्या बांग्लादेश की वर्तमान सरकार जवाबदेही तय करेगी, या यह भी उन 'रोकी जा सकने वाली त्रासदियों' की फाइलों में दब जाएगा।
RashtraPress
20 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

बांग्लादेश में खसरे का प्रकोप 2026 में कितना गंभीर है?
2026 में बांग्लादेश में खसरे से पुष्ट और संदिग्ध मिलाकर कुल 1,057 मौतें हो चुकी हैं और संदिग्ध मामलों की संख्या 1,79,814 तक पहुँच गई है। GCDG ने इसे बांग्लादेश के हालिया इतिहास के सबसे गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य संकटों में से एक बताया है।
बांग्लादेश में खसरे का प्रकोप क्यों इतना बड़ा हुआ?
GCDG की रिपोर्ट के अनुसार, 2024-25 में अंतरिम सरकार के कार्यकाल में टीका आपूर्ति बाधित हुई, पूरक टीकाकरण कार्यक्रम रद्द हुए और WHO-स्वीकृत यूनिसेफ आपूर्ति शृंखला की जगह खुली निविदा प्रणाली अपनाई गई। इससे टीकाकरण की व्यापक खाई बन गई जिसने इस प्रकोप को जन्म दिया।
यूनिसेफ ने बांग्लादेश सरकार को कब और कैसे चेताया था?
यूनिसेफ ने 2024 से 2026 के बीच पाँच से छह औपचारिक पत्रों और करीब 10 बैठकों के ज़रिए तत्कालीन अंतरिम सरकार को टीकों की संभावित कमी के बारे में बार-बार आगाह किया था। इन चेतावनियों के बावजूद समय पर कार्रवाई नहीं हुई।
बांग्लादेश में खसरे से अब तक कितने मरीज़ ठीक हुए हैं?
DGHS के अनुसार, 15 मार्च से अब तक कुल 1,58,589 मरीज़ अस्पताल में भर्ती हुए, जिनमें से 1,52,225 स्वस्थ हो चुके हैं। हालाँकि, संक्रमण का सिलसिला अभी भी जारी है।
क्या बांग्लादेश में खसरे का प्रकोप रोका जा सकता था?
स्वास्थ्य विशेषज्ञों और GCDG की रिपोर्ट के अनुसार, खसरा एक पूरी तरह टीके से रोके जाने योग्य रोग है और यह प्रकोप महामारी विज्ञान के नज़रिए से अप्रत्याशित नहीं था। समय पर टीकाकरण और यूनिसेफ की आपूर्ति शृंखला बनाए रखी जाती तो इसे काफी हद तक रोका जा सकता था।
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