बांग्लादेश में खसरे से 24 घंटे में 9 बच्चों की मौत, कुल मृतक संख्या 698 पर पहुँची
सारांश
मुख्य बातें
बांग्लादेश में खसरे का प्रकोप थमने का नाम नहीं ले रहा। 25 जून 2026 को गुरुवार सुबह 8 बजे तक के बीते 24 घंटों में खसरे जैसे लक्षणों से पीड़ित 9 और बच्चों की मौत हो गई, जिससे देश में खसरे से पुष्ट और संदिग्ध मौतों की कुल संख्या बढ़कर 698 हो गई है। स्वास्थ्य अधिकारियों के अनुसार यह आँकड़ा लगातार बढ़ता जा रहा है और स्वास्थ्य व्यवस्था पर दबाव अभूतपूर्व स्तर पर पहुँच गया है।
मौतों और मामलों का ताज़ा आँकड़ा
बांग्लादेश स्वास्थ्य सेवा महानिदेशालय (DGHS) के आँकड़ों के अनुसार, हाल में दर्ज हुई 9 नई मौतें संदिग्ध खसरा मौतों की श्रेणी में रखी गई हैं। इसके साथ संदिग्ध खसरा मौतों की कुल संख्या 605 हो गई है, जबकि प्रयोगशाला में पुष्टि किए गए मामलों में मृत्यु का आँकड़ा 93 पर स्थिर बना हुआ है।
बीते 24 घंटों में खसरे के 893 नए संदिग्ध मामले सामने आए, जिससे देशभर में संदिग्ध मामलों की कुल संख्या 96,653 तक पहुँच गई। वहीं, 52 नए मामलों की प्रयोगशाला में पुष्टि हुई और पुष्ट संक्रमितों की कुल संख्या बढ़कर 11,442 हो गई।
अस्पतालों में भर्ती और ठीक होने की स्थिति
DGHS के आँकड़ों के मुताबिक, 10 अप्रैल से अब तक खसरे के संदिग्ध 80,497 मरीजों को देशभर के अस्पतालों में भर्ती कराया गया है। इनमें से 76,788 मरीज स्वस्थ होकर अस्पतालों से छुट्टी पा चुके हैं। यह ऐसे समय में आया है जब स्वास्थ्य ढाँचे पर पहले से ही भारी बोझ है।
सरकार की प्रतिक्रिया
बांग्लादेश के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री सरदार मोहम्मद सखावत हुसैन ने गुरुवार को राष्ट्रीय संसद (जातीय संसद) में कहा कि सरकार देशभर में खसरे के प्रसार को रोकने और बाल मृत्यु दर कम करने के लिए विभिन्न कार्यक्रम चला रही है। सत्तारूढ़ दल की आरक्षित सीट की सांसद के प्रश्न के उत्तर में उन्होंने कहा कि सरकार का मुख्य उद्देश्य हर बच्चे को टीकाकरण के दायरे में लाना और बीमारी के खिलाफ मज़बूत प्रतिरक्षा कवच तैयार करना है।
सखावत हुसैन ने स्वीकार किया कि टीके को लेकर हिचकिचाहट, अधूरा टीकाकरण, जनजागरूकता की कमी तथा कुछ मामलों में भौगोलिक और सामाजिक बाधाएँ बीमारी के प्रसार में योगदान दे रही हैं। उन्होंने यह भी कहा कि किसी भी प्रकोप के लिए जवाबदेही का निर्धारण जाँच रिपोर्ट और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर किया जाता है।
स्वास्थ्य व्यवस्था पर असर और आगे की चुनौती
स्वास्थ्य अधिकारियों का कहना है कि संक्रमण को रोकने के लिए निगरानी, टीकाकरण और उपचार सेवाओं को और मज़बूत किया जा रहा है। गौरतलब है कि लगातार बढ़ते मामलों और बच्चों की मौतों ने स्वास्थ्य व्यवस्था के सामने गंभीर चुनौती खड़ी कर दी है। विशेषज्ञों के अनुसार जब तक टीकाकरण कवरेज में उल्लेखनीय वृद्धि नहीं होती, प्रकोप पर नियंत्रण पाना कठिन बना रहेगा।