18 अक्टूबर 2026
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बांग्लादेश में खसरे का प्रकोप: मृतक संख्या 1,196 पहुँची, 2.13 लाख से अधिक संदिग्ध मामले

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बांग्लादेश में खसरे का प्रकोप: मृतक संख्या 1,196 पहुँची, 2.13 लाख से अधिक संदिग्ध मामले

सारांश

बांग्लादेश में खसरे का यह प्रकोप अब महज़ एक बीमारी की कहानी नहीं रहा — यह प्रशासनिक विफलता का दस्तावेज़ है। 2,13,244 संदिग्ध मामले और 1,196 मौतें बता रही हैं कि टीकाकरण में हुई लापरवाही और आपूर्ति की रुकावटों की कीमत बच्चों की जान से चुकाई जा रही है।

मुख्य बातें

18 अक्टूबर 2026 तक बांग्लादेश में खसरे से कुल 1,196 मौतें — जिनमें 1,092 संदिग्ध और 104 प्रयोगशाला पुष्ट।
पिछले 24 घंटों में 7 बच्चों की मौत और 1,254 नए संदिग्ध मामले दर्ज।
कुल संदिग्ध मामले 2,13,244 ; पुष्ट मामले 23,122 ; 15 मार्च से 1,89,484 अस्पताल में भर्ती।
जनस्वास्थ्य विशेषज्ञ मुश्तुक हुसैन के अनुसार संक्रमण की लहर कम से कम एक और महीने तक जारी रह सकती है।
जीसीडीजी की रिपोर्ट के अनुसार 2024 2025 में वैक्सीन आपूर्ति में रुकावट और टीकाकरण अभियानों के रद्द होने से यह संकट पैदा हुआ।
यूनिसेफ के ज़रिए अप्रैल में वैक्सीन आपूर्ति फिर शुरू, लेकिन प्रकोप पर नियंत्रण अभी भी दूर।

बांग्लादेश में खसरे का प्रकोप विकराल रूप ले चुका है। 18 अक्टूबर 2026 को रविवार सुबह 8 बजे (स्थानीय समय) तक पिछले 24 घंटों में खसरे जैसे लक्षणों के कारण सात और बच्चों की मौत हो गई, जिससे इस प्रकोप में अब तक मरने वालों की कुल संख्या 1,196 हो गई है। स्वास्थ्य सेवा महानिदेशालय (डीजीएचएस) के अनुसार इन सातों मौतों को खसरे से जुड़ी संदिग्ध मौतों की श्रेणी में रखा गया है।

मौतों और मामलों की ताज़ा स्थिति

डीजीएचएस के आँकड़ों के मुताबिक, अब तक की कुल 1,196 मौतों में से 1,092 संदिग्ध श्रेणी में हैं, जबकि 104 मौतें प्रयोगशाला पुष्ट हैं। रविवार के 24 घंटों में 1,254 नए संदिग्ध मामले सामने आए, जिससे देश में कुल संदिग्ध मामलों की संख्या 2,13,244 पर पहुँच गई है। इसी अवधि में 65 नए मामलों की प्रयोगशाला से पुष्टि हुई, जिससे पुष्ट मामलों की कुल संख्या 23,122 हो गई है।

अस्पताल में भर्ती और ठीक होने वालों का ब्योरा

डीजीएचएस के आँकड़ों के अनुसार, 15 मार्च 2026 से अब तक बांग्लादेश के अस्पतालों में खसरे के कुल 1,89,484 संदिग्ध मरीज़ों को भर्ती किया गया है। इनमें से 1,81,756 मरीज़ स्वस्थ होकर अस्पतालों से छुट्टी पा चुके हैं। यह संख्या जहाँ राहत देती है, वहीं अभी भी हज़ारों बच्चे अस्पताल में इलाज करा रहे हैं।

महामारी पर जल्द काबू पाना मुश्किल: विशेषज्ञ

डीजीएचएस में रोग नियंत्रण विभाग के पूर्व निदेशक बेनजीर अहमद ने पिछले हफ्ते कहा कि भले ही बांग्लादेश ने अप्रैल में यूनिसेफ के ज़रिए वैक्सीन की आपूर्ति फिर से शुरू करवाई और एक आपातकालीन टीकाकरण अभियान भी चलाया, लेकिन संक्रमण फैलने की मौजूदा रफ्तार को देखते हुए महामारी पर जल्द काबू पाना मुश्किल है।

जनस्वास्थ्य विशेषज्ञ मुश्तुक हुसैन ने बताया कि टीकाकरण के बाद बच्चों में पर्याप्त रोग प्रतिरोधक क्षमता विकसित होने में आमतौर पर तीन से चार सप्ताह का समय लगता है। उनके अनुसार, "संक्रमण, अस्पताल में भर्ती होने के मामलों और मौतों की मौजूदा लहर कम से कम एक और महीने तक जारी रह सकती है।"

प्रकोप की जड़ें: टीकाकरण में कमियाँ और प्रशासनिक चूक

जनस्वास्थ्य विशेषज्ञों ने इस दोबारा फैलाव के लिए पूर्ववर्ती टीकाकरण कवरेज में आई खामियों और अस्पताल प्रबंधन की कमज़ोरियों को ज़िम्मेदार ठहराया है — जिनमें संक्रमित बच्चों की देर से पहचान और घर पर आइसोलेशन में लापरवाही शामिल है।

कनाडा स्थित संस्था ग्लोबल सेंटर फॉर डेमोक्रेटिक गवर्नेंस (जीसीडीजी) ने अपनी रिपोर्ट 'प्रिवेंटेबल ट्रैजेडी: बांग्लादेश का 2026 खसरा प्रकोप' में कहा है कि यह संकट महामारी विज्ञान के नज़रिए से कोई अप्रत्याशित घटना नहीं थी। रिपोर्ट के अनुसार, इस आपदा के पीछे कई कारण एक साथ मिले — 2024 2025 के दौरान मुहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली तत्कालीन अंतरिम सरकार के कार्यकाल में वैक्सीन आपूर्ति और स्वास्थ्य कार्यक्रमों में आई रुकावटें, नियमित टीकाकरण का छूट जाना, तय अतिरिक्त टीकाकरण अभियानों का रद्द होना, वैक्सीन खरीद में प्रशासनिक देरी, और जोखिम वाली आबादी की समय रहते पहचान न कर पाना।

आगे क्या होगा

यह ऐसे समय में आया है जब बांग्लादेश पहले से ही राजनीतिक और आर्थिक उथल पुथल से गुज़र रहा है। एक प्रमुख अंतरराष्ट्रीय संस्था ने इस प्रकोप को बांग्लादेश के हालिया इतिहास के सबसे गंभीर जनस्वास्थ्य संकटों में से एक क़रार दिया है और रेखांकित किया है कि टीकाकरण के ज़रिए इस बीमारी को रोका जा सकता था। विशेषज्ञों के अनुमान के अनुसार, संक्रमण की यह लहर कम से कम एक और महीने तक जारी रह सकती है, जिससे स्वास्थ्य तंत्र पर दबाव और बढ़ने की आशंका है।

संपादकीय दृष्टिकोण

टीकाकरण अभियानों का रद्द होना और जोखिम वाली आबादी की पहचान में देरी — ये सब जानी मानी प्रशासनिक कमज़ोरियाँ थीं। गौरतलब है कि खसरा उन कुछ बीमारियों में है जिनका उन्मूलन टीकाकरण से पूरी तरह संभव है — फिर भी 2.13 लाख से अधिक मामले और 1,196 मौतें यह दर्शाती हैं कि राजनीतिक संक्रमण काल में स्वास्थ्य ढाँचा कितनी तेज़ी से ढह सकता है। मुख्यधारा की कवरेज आँकड़ों पर ठहर जाती है — असली सवाल यह है कि जब संकेत महीनों पहले दिख रहे थे, तब अंतरराष्ट्रीय स्वास्थ्य एजेंसियों और बांग्लादेश सरकार ने हस्तक्षेप में इतनी देर क्यों की।
RashtraPress
18 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

बांग्लादेश में खसरे के प्रकोप की ताज़ा स्थिति क्या है?
18 अक्टूबर 2026 तक बांग्लादेश में खसरे से जुड़ी कुल 1,196 मौतें हो चुकी हैं और संदिग्ध मामलों की संख्या 2,13,244 पर पहुँच गई है। पिछले 24 घंटों में 7 बच्चों की और मौत हुई तथा 1,254 नए संदिग्ध मामले सामने आए।
बांग्लादेश में खसरा इतनी तेज़ी से क्यों फैला?
जनस्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, 2024 2025 में अंतरिम सरकार के कार्यकाल में वैक्सीन आपूर्ति में रुकावट, नियमित टीकाकरण का छूट जाना, और अतिरिक्त टीकाकरण अभियानों का रद्द होना इस प्रकोप के प्रमुख कारण रहे। इसके साथ ही संक्रमित बच्चों की देर से पहचान और आइसोलेशन में लापरवाही ने भी संक्रमण को फैलने में मदद की।
बांग्लादेश में खसरे का प्रकोप कब तक थमेगा?
जनस्वास्थ्य विशेषज्ञ मुश्तुक हुसैन के अनुसार, टीकाकरण के बाद बच्चों में इम्युनिटी विकसित होने में तीन से चार सप्ताह लगते हैं, इसलिए संक्रमण की मौजूदा लहर कम से कम एक और महीने तक जारी रह सकती है। डीजीएचएस के पूर्व निदेशक बेनजीर अहमद ने भी कहा है कि जल्द काबू पाना मुश्किल है।
बांग्लादेश में खसरे के कितने मामले प्रयोगशाला से पुष्ट हैं?
18 अक्टूबर 2026 तक बांग्लादेश में 23,122 मामलों की प्रयोगशाला से पुष्टि हो चुकी है। कुल 1,196 मौतों में से 104 पुष्ट हैं और 1,092 संदिग्ध श्रेणी में हैं। 15 मार्च से अब तक 1,89,484 मरीज़ अस्पतालों में भर्ती हुए, जिनमें 1,81,756 ठीक होकर छुट्टी पा चुके हैं।
ग्लोबल सेंटर फॉर डेमोक्रेटिक गवर्नेंस (जीसीडीजी) की रिपोर्ट में क्या कहा गया है?
कनाडा स्थित जीसीडीजी ने अपनी रिपोर्ट 'प्रिवेंटेबल ट्रैजेडी: बांग्लादेश का 2026 खसरा प्रकोप' में कहा कि यह संकट महामारी विज्ञान के नज़रिए से अप्रत्याशित नहीं था। रिपोर्ट के अनुसार वैक्सीन खरीद में प्रशासनिक देरी, टीकाकरण कार्यक्रमों का रद्द होना और जोखिम वाली आबादी की समय से पहचान न होना — ये सब पूर्वानुमानित कमियाँ थीं जिन्हें समय रहते दूर किया जा सकता था।
राष्ट्र प्रेस
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