8 नवंबर 2026
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बांग्लादेश में खसरे का प्रकोप: दो और बच्चों की मौत, 2026 में मृतकों की संख्या 1,282 पहुँची

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बांग्लादेश में खसरे का प्रकोप: दो और बच्चों की मौत, 2026 में मृतकों की संख्या 1,282 पहुँची

सारांश

बांग्लादेश में खसरे का प्रकोप थमने का नाम नहीं ले रहा — 8 नवंबर 2026 तक मृतकों की संख्या 1,282 और संदिग्ध मामले 2,38,840 तक पहुँच गए हैं। पूर्व PM शेख हसीना ने इसे 'महामारी' बताते हुए टीकाकरण व्यवस्था की विफलता और सरकारी लापरवाही को ज़िम्मेदार ठहराया है।

मुख्य बातें

बांग्लादेश में खसरे से 8 नवंबर 2026 को दो और बच्चों की मौत; वर्ष 2026 में कुल मृतक संख्या 1,282 हुई।
संदिग्ध मौतें 1,177 और प्रयोगशाला-पुष्टि मौतें 105 ; कुल संदिग्ध मामले 2,38,840 ।
15 मार्च 2026 से अब तक 2,12,979 मरीज़ अस्पताल में भर्ती; 2,04,049 स्वस्थ हो चुके।
पूर्व PM शेख हसीना ने प्रकोप को 'महामारी' बताते हुए मार्च 2026 में टीके के भंडार की कमी और सरकारी देरी को ज़िम्मेदार ठहराया।
हसीना ने टीकों की खरीद और टीकाकरण विफलताओं की स्वतंत्र जाँच की माँग की है।

बांग्लादेश में खसरे का प्रकोप 8 नवंबर 2026 को और गहरा हो गया, जब पिछले 24 घंटों में खसरे जैसे लक्षणों से दो और बच्चों की मौत की पुष्टि हुई। इसके साथ ही 2026 में बांग्लादेश में खसरे से जुड़ी पुष्ट और संदिग्ध मौतों की कुल संख्या बढ़कर 1,282 हो गई है। बांग्लादेश के स्वास्थ्य सेवा महानिदेशालय (DGHS) के आंकड़ों ने इस महामारी की भयावहता को एक बार फिर रेखांकित किया है।

ताज़ा आंकड़े और मौतों का विवरण

DGHS के अनुसार, हाल में हुई दोनों मौतों को संदिग्ध खसरा मौतों के रूप में दर्ज किया गया है। इस नई वृद्धि के साथ देश में संदिग्ध खसरा मौतों की कुल संख्या 1,177 हो गई है, जबकि प्रयोगशाला परीक्षणों द्वारा पुष्टि की गई मौतें 105 रही हैं।

रविवार सुबह 8 बजे IST तक के आंकड़ों के मुताबिक, पिछले 24 घंटों में 1,138 नए संदिग्ध मामले सामने आए, जिससे देशभर में संदिग्ध मामलों की कुल संख्या 2,38,840 तक पहुँच गई। इसी अवधि में 87 नए मामलों की प्रयोगशाला पुष्टि हुई, जिससे पुष्ट मामलों की संख्या 24,442 हो गई।

अस्पताल में भर्ती और उपचार की स्थिति

DGHS के आंकड़ों के अनुसार, 15 मार्च 2026 से अब तक खसरे के संदिग्ध लक्षणों वाले 2,12,979 मरीज़ों को देशभर के अस्पतालों में भर्ती कराया गया है। इनमें से 2,04,049 मरीज़ उपचार के बाद स्वस्थ हो चुके हैं। गौरतलब है कि यह प्रकोप देश की स्वास्थ्य व्यवस्था पर अभूतपूर्व दबाव बना रहा है।

शेख हसीना के आरोप और राजनीतिक विवाद

बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना ने अक्टूबर 2026 में इस प्रकोप को 'महामारी' करार देते हुए इसके लिए सरकारी लापरवाही और दशकों पुरानी टीकाकरण व्यवस्था के ध्वस्त होने को ज़िम्मेदार ठहराया था। 'द संडे गार्जियन' को दिए एक साक्षात्कार में हसीना ने मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली पूर्व अंतरिम सरकार पर आरोप लगाया कि राजनीतिक और प्रशासनिक फैसलों के ज़रिये टीकों की खरीद प्रक्रिया को बाधित किया गया, जिससे टीकाकरण कवरेज में भारी गिरावट आई।

हसीना के अनुसार, मार्च 2026 में बांग्लादेश में खसरा-रूबेला टीके का भंडार समाप्त हो गया था और अधिकारियों ने निर्धारित समय पर विशेष टीकाकरण अभियान शुरू नहीं किया। उन्होंने प्रधानमंत्री तारिक रहमान के नेतृत्व वाली बीएनपी सरकार की भी आलोचना करते हुए कहा कि प्रकोप की गंभीरता स्पष्ट होने के बाद भी पर्याप्त कदम नहीं उठाए गए। हसीना ने कहा था, 'रोकथाम योग्य बीमारी से एक हज़ार से अधिक बच्चों की मौत होना कोई सामान्य प्रशासनिक विफलता नहीं है।'

हसीना की माँगें और सुझाए उपाय

हसीना ने टीकों की निर्बाध आपूर्ति, कमज़ोर समुदायों के लिए लक्षित टीकाकरण अभियान, बीमारी की तत्काल निगरानी, बच्चों के लिए स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार और टीकों की खरीद एवं टीकाकरण में कथित विफलताओं की स्वतंत्र जाँच कराने की माँग रखी है।

आगे क्या होगा

यह ऐसे समय में आया है जब विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) और यूनिसेफ दक्षिण एशियाई देशों में टीकाकरण अंतराल को एक बड़े खतरे के रूप में चिह्नित कर चुके हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक बांग्लादेश में टीकाकरण कवरेज तेज़ी से नहीं बढ़ाया जाता, तब तक नए मामले और मौतें जारी रहने का जोखिम बना रहेगा। बांग्लादेश सरकार की ओर से अभी तक व्यापक आपातकालीन टीकाकरण योजना की कोई औपचारिक घोषणा नहीं हुई है।

संपादकीय दृष्टिकोण

282 मौतें महज एक स्वास्थ्य संकट नहीं, बल्कि एक नीतिगत विफलता की कहानी है — जहाँ टीकाकरण जैसी बुनियादी व्यवस्था राजनीतिक उठापटक की भेंट चढ़ी। मार्च 2026 में टीके का भंडार खाली होने की जानकारी होने के बावजूद यदि अभियान समय पर नहीं चला, तो यह प्रशासनिक जड़ता का प्रमाण है। विडंबना यह है कि खसरा एक ऐसी बीमारी है जिसे सस्ते और सुलभ टीके से रोका जा सकता था। बांग्लादेश की वर्तमान सरकार के लिए असली परीक्षा यह है कि वह राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप से ऊपर उठकर आपातकालीन टीकाकरण अभियान कब और कैसे लागू करती है।
RashtraPress
8 नवंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

बांग्लादेश में खसरे से कितनी मौतें हो चुकी हैं?
8 नवंबर 2026 तक बांग्लादेश में खसरे से जुड़ी पुष्ट और संदिग्ध मौतों की कुल संख्या 1,282 हो गई है। इनमें 105 मौतें प्रयोगशाला परीक्षणों द्वारा पुष्टि की गई हैं और 1,177 संदिग्ध श्रेणी में हैं।
बांग्लादेश में खसरे का प्रकोप कब से शुरू हुआ?
DGHS के आंकड़ों के अनुसार, 15 मार्च 2026 से इस प्रकोप की व्यवस्थित निगरानी शुरू हुई। तब से अब तक 2,12,979 मरीज़ अस्पताल में भर्ती हो चुके हैं और कुल संदिग्ध मामले 2,38,840 तक पहुँच गए हैं।
शेख हसीना ने खसरे के प्रकोप के लिए किसे ज़िम्मेदार ठहराया?
पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना ने 'द संडे गार्जियन' को दिए साक्षात्कार में मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली पूर्व अंतरिम सरकार पर टीकों की खरीद प्रक्रिया बाधित करने का आरोप लगाया। उन्होंने प्रधानमंत्री तारिक रहमान की बीएनपी सरकार की भी आलोचना की कि प्रकोप स्पष्ट होने के बाद भी पर्याप्त कदम नहीं उठाए गए।
बांग्लादेश में खसरे के टीके की कमी कब हुई?
शेख हसीना के दावे के अनुसार, मार्च 2026 में बांग्लादेश में खसरा-रूबेला टीके का भंडार समाप्त हो गया था। इसके बाद टीकाकरण कवरेज में भारी गिरावट आई और समय पर विशेष टीकाकरण अभियान भी शुरू नहीं किया गया।
इस प्रकोप को रोकने के लिए क्या माँगें रखी गई हैं?
हसीना ने टीकों की निर्बाध आपूर्ति, कमज़ोर समुदायों के लिए लक्षित अभियान, तत्काल निगरानी प्रणाली, बच्चों के लिए स्वास्थ्य सुविधाओं का विस्तार और टीकाकरण विफलताओं की स्वतंत्र जाँच की माँग की है। अब तक बांग्लादेश सरकार ने कोई व्यापक आपातकालीन टीकाकरण योजना घोषित नहीं की है।
राष्ट्र प्रेस
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