21 अक्टूबर 2026
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भारत-एस्टोनिया संबंधों में नई गति, राजदूत कारेलसोहन बोलीं — EU-भारत FTA इस साल होगा साइन

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भारत-एस्टोनिया संबंधों में नई गति, राजदूत कारेलसोहन बोलीं — EU-भारत FTA इस साल होगा साइन

सारांश

एस्टोनिया की राजदूत क्रिस्टी कारेलसोहन ने कहा कि भारत-एस्टोनिया संबंधों में नई ऊर्जा है — EU-भारत FTA इस साल के अंत तक संभव है। 5,500 भारतीय ई-रेज़िडेंट और 1,300 कंपनियाँ पहले से ही यूरोपीय दरवाज़ा खटखटा रही हैं। डिजिटल और साइबर सुरक्षा में साझेदारी अगला बड़ा पड़ाव है।

मुख्य बातें

एस्टोनिया की राजदूत क्रिस्टी कारेलसोहन ने 21 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली में भारत-एस्टोनिया संबंधों में नई गति की पुष्टि की।
भारत-EU मुक्त व्यापार समझौते पर 2026 के अंत तक हस्ताक्षर की उम्मीद; सीमा शुल्क कटौती के साथ-साथ गैर-शुल्क बाधाएँ भी कम होंगी।
करीब 5,500 भारतीय नागरिकों ने एस्टोनिया की ई-रेज़िडेंसी ली है और 1,300 से अधिक कंपनियाँ स्थापित की हैं।
डिजिटल सेवाओं, प्रौद्योगिकी और साइबर सुरक्षा को द्विपक्षीय सहयोग के प्रमुख क्षेत्रों के रूप में चिह्नित किया गया।
पिछले 6 महीनों में उच्च-स्तरीय दौरे — एस्टोनियाई राष्ट्रपति का भारत दौरा, केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल का एस्टोनिया दौरा और इंडिया मोबाइल कांग्रेस में एस्टोनियाई मंत्री की उपस्थिति।
एस्टोनिया ने वैश्विक संस्थाओं में भारत की अधिक प्रभावशाली भूमिका का समर्थन किया।

भारत में एस्टोनिया की राजदूत क्रिस्टी कारेलसोहन ने 21 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली में कहा कि भारत और एस्टोनिया के द्विपक्षीय संबंधों में उल्लेखनीय गति आई है और दोनों देशों के बीच कूटनीतिक एवं व्यापारिक जुड़ाव पहले से कहीं अधिक सक्रिय है। उन्होंने यह भी उम्मीद जताई कि भारत और यूरोपीय संघ (EU) के बीच मुक्त व्यापार समझौता (FTA) इस वर्ष के अंत तक हस्ताक्षरित हो सकता है, जिससे दोनों पक्षों के कारोबारियों को परस्पर बाज़ारों में प्रवेश के नए अवसर मिलेंगे।

व्यापारिक सहयोग की प्राथमिकताएँ

लगभग सात सप्ताह पहले भारत में कार्यभार संभालने वाली राजदूत कारेलसोहन ने कहा कि भारत का विशाल बाज़ार एस्टोनियाई कंपनियों के लिए महत्त्वपूर्ण अवसर प्रस्तुत करता है। उन्होंने स्पष्ट किया, एस्टोनिया की कंपनियाँ अपेक्षाकृत छोटी हैं और देश का विनिर्माण आधार भी सीमित है, इसलिए बड़े पैमाने के व्यापार के बजाय विशिष्ट क्षेत्रों में सहयोग पर ध्यान देना अधिक व्यावहारिक होगा।

उन्होंने डिजिटल सेवाओं, प्रौद्योगिकी और साइबर सुरक्षा को एस्टोनिया की प्रमुख क्षमता वाले क्षेत्रों के रूप में चिह्नित किया। इसके अतिरिक्त, एस्टोनियाई कंपनियाँ भारत को लकड़ी से बने उत्पाद, खाद्य पदार्थ, पेय पदार्थ और अन्य वस्तुओं का निर्यात भी करती हैं।

EU-भारत FTA का महत्त्व और गैर-शुल्क बाधाएँ

प्रस्तावित भारत-EU मुक्त व्यापार समझौते पर राजदूत ने कहा कि इससे सीमा शुल्क में कमी आने की उम्मीद है, लेकिन समझौते का लाभ केवल शुल्क घटने तक सीमित नहीं रहेगा। उनके अनुसार, सीमा शुल्क संबंधी प्रक्रियाएँ, प्रमाणन की आवश्यकताएँ और अन्य नियामकीय बाधाएँ भी — विशेषकर छोटी कंपनियों के लिए — व्यापार को प्रभावित करती हैं।

उन्होंने ज़ोर देते हुए कहा कि गैर-शुल्क बाधाओं को कम करने और प्रक्रियाओं में पारदर्शिता लाने से भारतीय तथा यूरोपीय कंपनियों, दोनों के लिए नए रास्ते खुलेंगे।

ई-रेज़िडेंसी और उच्च-स्तरीय दौरे

कारेलसोहन ने बताया कि एस्टोनिया के ई-रेज़िडेंसी कार्यक्रम के ज़रिये करीब 5,500 भारतीय नागरिकों ने ई-रेज़िडेंसी ली है और 1,300 से अधिक कंपनियाँ स्थापित की हैं, जिससे उन्हें यूरोपीय बाज़ारों तक पहुँच मिलती है। उन्होंने 200 भारतीय छात्रों के एस्टोनिया में अध्ययनरत होने का उल्लेख करते हुए प्रौद्योगिकी और आईटी में रुचि रखने वाले और अधिक भारतीय छात्रों एवं निवेशकों का स्वागत किया।

पिछले छह महीनों में उच्च-स्तरीय संपर्कों में तेज़ी का उल्लेख करते हुए उन्होंने बताया — फरवरी में एस्टोनिया के राष्ट्रपति ने AI इम्पैक्ट समिट के लिए भारत का दौरा किया; जुलाई में केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल एक बड़े कारोबारी प्रतिनिधिमंडल के साथ एस्टोनिया गए; और हाल ही में एस्टोनिया के न्याय एवं डिजिटलीकरण मंत्री ने इंडिया मोबाइल कांग्रेस के लिए भारत का दौरा किया।

भू-राजनीतिक दृष्टिकोण और रूस-यूक्रेन संघर्ष

रूस-यूक्रेन युद्ध पर एस्टोनिया का रुख स्पष्ट करते हुए कारेलसोहन ने कहा, रूस की सीमा से लगे देश के रूप में और 1991 में रूस से स्वतंत्रता पाने वाले राष्ट्र के रूप में यह युद्ध एस्टोनिया के लिए अस्तित्व का प्रश्न भी है। उन्होंने यह भी कहा कि जब संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद का कोई स्थायी सदस्य नियम-आधारित अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था का उल्लंघन कर किसी छोटे पड़ोसी देश पर हमला करे, तो यह सभी के लिए चिंता का विषय है।

पश्चिम एशिया के तनाव पर उन्होंने कहा कि भले ही यह एस्टोनिया के भौगोलिक दायरे से दूर है, परंतु वैश्विक संघर्षों का असर ऊर्जा आपूर्ति और कीमतों सहित सभी देशों पर पड़ता है।

वैश्विक मंचों पर भारत की बढ़ती भूमिका

कारेलसोहन ने वैश्विक पटल पर भारत के बढ़ते रुतबे की सराहना करते हुए कहा कि मौजूदा अंतरराष्ट्रीय संस्थाएँ एक भिन्न युग में गठित हुई थीं और अब समय काफी बदल गया है। उन्होंने कहा कि एस्टोनिया चाहता है कि भारत जैसे बड़े लोकतांत्रिक देशों की वैश्विक मुद्दों पर आवाज़ अधिक मज़बूत हो और उन्हें अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं तथा मंचों पर अधिक प्रभावशाली भूमिका निभाने का अवसर मिले। यह संकेत है कि द्विपक्षीय संबंध अब व्यापार से आगे बढ़कर रणनीतिक साझेदारी की दिशा में बढ़ रहे हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

वहीं भारत के साथ मूल्य-आधारित साझेदारी बनाने की कोशिश कर रहा है — दोनों की विदेश नीति दर्शन काफी अलग है। 5,500 ई-रेज़िडेंट भारतीयों का आँकड़ा दिखाता है कि ज़मीनी स्तर पर जुड़ाव पहले से शुरू हो चुका है, लेकिन बड़ा प्रश्न यह है कि FTA के बाद गैर-शुल्क बाधाएँ कितनी तेज़ी से घटेंगी — क्योंकि अतीत में यही अड़चन सबसे बड़ी रही है।
RashtraPress
21 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भारत और एस्टोनिया के बीच संबंधों में क्या नया है?
एस्टोनिया की राजदूत क्रिस्टी कारेलसोहन के अनुसार, दोनों देशों के बीच कूटनीतिक और व्यापारिक संबंधों में उल्लेखनीय गति आई है। पिछले छह महीनों में दोनों देशों के बीच कई उच्च-स्तरीय दौरे हो चुके हैं, जिनमें एस्टोनियाई राष्ट्रपति की भारत यात्रा और केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल की एस्टोनिया यात्रा शामिल हैं।
भारत-EU मुक्त व्यापार समझौता कब तक हो सकता है?
राजदूत कारेलसोहन ने उम्मीद जताई है कि भारत और यूरोपीय संघ के बीच FTA पर 2026 के अंत तक हस्ताक्षर हो सकते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि समझौते का लाभ केवल सीमा शुल्क कटौती तक सीमित नहीं रहेगा — गैर-शुल्क बाधाओं और प्रमाणन प्रक्रियाओं को भी सरल बनाने की ज़रूरत होगी।
एस्टोनिया का ई-रेज़िडेंसी कार्यक्रम भारतीयों के लिए कितना उपयोगी है?
एस्टोनिया के ई-रेज़िडेंसी कार्यक्रम के ज़रिये करीब 5,500 भारतीय नागरिकों ने ई-रेज़िडेंसी ली है और 1,300 से अधिक कंपनियाँ स्थापित की हैं। यह कार्यक्रम भारतीय उद्यमियों को यूरोपीय बाज़ारों तक पहुँच प्रदान करता है।
एस्टोनिया और भारत के बीच किन क्षेत्रों में सहयोग की संभावना है?
राजदूत के अनुसार, डिजिटल सेवाओं, प्रौद्योगिकी और साइबर सुरक्षा में एस्टोनियाई कंपनियों की विशेष क्षमता है और इन क्षेत्रों में भारत के साथ सहयोग की काफी संभावनाएँ हैं। इसके अलावा, उच्च गुणवत्ता वाले आला उत्पाद और खाद्य-पेय पदार्थों का निर्यात भी द्विपक्षीय व्यापार का हिस्सा है।
रूस-यूक्रेन युद्ध पर एस्टोनिया का क्या रुख है?
एस्टोनिया का रुख स्पष्ट है — रूस की सीमा से सटे देश और 1991 में रूस से स्वतंत्रता पाए राष्ट्र के रूप में यह युद्ध एस्टोनिया के लिए अस्तित्व का प्रश्न है। राजदूत कारेलसोहन ने कहा कि जब संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद का स्थायी सदस्य नियम-आधारित अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था का उल्लंघन करे, तो यह सभी देशों के लिए चिंता का विषय बनता है।
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