भारत ने मालदीव को 2026-27 के लिए आवश्यक वस्तुओं के निर्यात को दी मंजूरी, बुर्किना फासो को भेजा 1000 मीट्रिक टन चावल
सारांश
Key Takeaways
- 2026-27 के लिए मालदीव को आवश्यक वस्तुओं का निर्यात निर्धारित किया गया।
- बुर्किना फासो को 1000 मीट्रिक टन चावल की खेप भेजी गई।
- यह कदम द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करेगा।
- भारत की 'पड़ोसी पहल' नीति के अंतर्गत यह कदम है।
- मानवीय सहायता भारत की अंतरराष्ट्रीय प्रतिबद्धता का एक हिस्सा है।
नई दिल्ली, 1 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। भारत ने मालदीव के अनुरोध पर 2026-27 के लिए आवश्यक वस्तुओं के निर्यात को मंजूरी दी है। भारतीय उच्चायोग के अनुसार, इस विशेष द्विपक्षीय तंत्र के तहत कई महत्वपूर्ण खाद्य और निर्माण सामग्रियों की आपूर्ति की जाएगी, जो मालदीव की आवश्यकताओं और विकास परियोजनाओं को मजबूती प्रदान करेगी।
भारतीय उच्चायोग ने जानकारी दी है कि मालदीव सरकार के अनुरोध पर भारत सरकार ने एक विशेष द्विपक्षीय तंत्र के अंतर्गत 2026-27 के लिए आवश्यक वस्तुओं के निर्यात की अनुमति दी है। इनमें अंडे, आलू, प्याज, चावल, गेहूं का आटा, चीनी, दालें, पत्थर की गिट्टी और नदी की रेत शामिल हैं।
इस तंत्र के तहत प्रत्येक वस्तु का कोटा मालदीव सरकार द्वारा साझा की गई आवश्यकताओं के अनुसार निर्धारित किया गया है। मालदीव के निर्माण उद्योग के लिए नदी की रेत और पत्थर की गिट्टी की आपूर्ति अत्यंत आवश्यक है। इसके साथ ही, इस वर्ष के लिए चावल के कोटे में 77 प्रतिशत की भी बढ़ोतरी की गई है।
पिछले वर्षों की तरह, वित्त वर्ष 2026-27 के दौरान इन वस्तुओं का निर्यात किसी भी मौजूदा या भविष्य में लागू होने वाले प्रतिबंधों से मुक्त रहेगा। भारत अपनी 'पड़ोसी पहल' नीति के तहत मालदीव में मानव-केंद्रित विकास को समर्थन देने के लिए प्रतिबद्ध है।
इसके अलावा, भारत ने मानवीय सहायता के तहत बुर्किना फासो को 1000 मीट्रिक टन चावल की खेप भेजी है। यह पहल ग्लोबल साउथ के देशों के प्रति भारत की प्रतिबद्धता को दर्शाती है।
विदेश मंत्रालय (एमईए) के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर कहा, "भारत ने मानवीय सहायता के तहत बुर्किना फासो को 1000 मीट्रिक टन चावल की एक खेप भेजी है। इसका उद्देश्य कमजोर समुदायों और आंतरिक रूप से विस्थापित लोगों की खाद्य सुरक्षा में सहायता करना है। यह कदम 'ग्लोबल साउथ' के देशों के लिए एक भरोसेमंद विकास और मानवीय सहायता तथा आपदा राहत साझेदार के रूप में भारत की निरंतर प्रतिबद्धता को दर्शाता है।"