बीएलए का दावा: बलूचिस्तान में 18 हमलों में 31 पाकिस्तानी सैनिक ढेर, वरिष्ठ अधिकारी भी शामिल

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बीएलए का दावा: बलूचिस्तान में 18 हमलों में 31 पाकिस्तानी सैनिक ढेर, वरिष्ठ अधिकारी भी शामिल

सारांश

बीएलए ने 4 से 14 मई के बीच बलूचिस्तान के नौ से अधिक ज़िलों में 18 हमलों की जिम्मेदारी ली है — IED, घात और हाईवे नाकेबंदी के ज़रिए। संगठन का दावा है कि 31 सैनिक मारे गए और CPEC व रेको दिक जैसी आर्थिक परियोजनाओं को भी निशाना बनाया गया। पाकिस्तान ने अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है।

मुख्य बातें

बलूच लिबरेशन आर्मी (बीएलए) ने 4 से 14 मई 2026 के बीच बलूचिस्तान में 18 हमलों की जिम्मेदारी ली।
संगठन का दावा है कि इन हमलों में अधिकारी तौसीफ भट्टी सहित 31 पाकिस्तानी सैनिक कथित तौर पर मारे गए।
सबसे बड़ा हमला 13 मई को चामलांग के बाला डाक इलाके में हुआ, जिसमें आठ सैनिकों के मारे जाने का दावा।
क्वेटा-ताफ्तान हाईवे , CPEC मार्ग और रेको दिक परियोजना के वाहनों को भी निशाना बनाया गया।
बीएलए ने इन झड़पों में अपने पाँच लड़ाकों के मारे जाने की भी पुष्टि की।
पाकिस्तानी सुरक्षा बलों की ओर से इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि अभी तक नहीं हुई है।

बलूच लिबरेशन आर्मी (बीएलए) ने 4 मई से 14 मई 2026 के बीच बलूचिस्तान में पाकिस्तानी सुरक्षा बलों पर 18 अलग-अलग हमलों की जिम्मेदारी लेते हुए कथित तौर पर दावा किया है कि इन कार्रवाइयों में एक वरिष्ठ अधिकारी सहित 31 पाकिस्तानी सैनिक मारे गए। संगठन के प्रवक्ता जीयंद बलोच ने एक लिखित बयान में यह जानकारी दी, हालांकि पाकिस्तानी सुरक्षा बलों की ओर से इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि अभी तक नहीं हुई है।

हमलों का विवरण और प्रभावित क्षेत्र

बीएलए के बयान के अनुसार, हमले जमुरान, नोशकी, मस्तुंग, कलात, केच, ग्वादर, पंजगुर, दलबंदीन और चामलांग सहित बलूचिस्तान के कई ज़िलों में किए गए। संगठन ने दावा किया कि इन हमलों में इम्प्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस (IED) विस्फोट, घात लगाकर हमले और हाईवे नाकेबंदी जैसी रणनीतियाँ अपनाई गईं। यह ऐसे समय में आया है जब बलूचिस्तान में सुरक्षा स्थिति पहले से ही तनावपूर्ण बनी हुई है।

सबसे बड़ा हमला: चामलांग का बाला डाक काफिला

बीएलए के अनुसार, सबसे घातक हमला 13 मई को चामलांग के बाला डाक इलाके में हुआ, जहाँ संगठन के लड़ाकों ने पाकिस्तानी सेना के एक काफिले को निशाना बनाया। बयान में दावा किया गया कि पहले रिमोट कंट्रोल IED से एक सैन्य वाहन को उड़ाया गया, फिर दूसरे वाहन पर भारी हथियारों से हमला किया गया। संगठन ने कहा कि इस हमले में अधिकारी तौसीफ भट्टी सहित आठ पाकिस्तानी सैनिक मारे गए और यह कार्रवाई उसके खुफिया विंग 'जिराब' से मिली जानकारी के आधार पर की गई।

हाईवे नाकेबंदी और अन्य कार्रवाइयाँ

मस्तुंग के शेख वासिल इलाके में बीएलए ने दावा किया कि उसके लड़ाकों ने क्वेटा-ताफ्तान हाईवे पर 20 बड़े वाहनों के काफिले पर हमला किया, जिसमें खनिज ले जा रहे आठ वाहन निष्क्रिय कर दिए गए और कथित तौर पर छह सैनिक मारे गए। दलबंदीन में संगठन ने दावा किया कि लाग आप और खजांगी के बीच हाईवे पर दो घंटे से अधिक नाकेबंदी की गई और 'सियाह दिक' परियोजना से जुड़े तीन लोगों को हिरासत में लिया गया तथा रेको दिक परियोजना के एक वाहन को कब्जे में लिया गया।

नोशकी में सर मल और जोरकैन क्षेत्रों में कई घंटों की नाकेबंदी का दावा किया गया, जिसमें एक वाहन नष्ट होने और तीन सैनिकों के मारे जाने का दावा है। पंजगुर में CPEC मार्ग पर कथित 'राज्य समर्थित' समूह से जुड़े दो लोगों को मारने का दावा किया गया।

मस्तुंग में सरकारी इमारतों पर कब्जे का दावा

बीएलए ने यह भी दावा किया कि 14 मई को मस्तुंग के ड्रिंगार्ह इलाके में उसके लड़ाकों ने एक बड़े अभियान में स्थानीय पुलिस स्टेशन और अन्य सरकारी इमारतों पर अस्थायी नियंत्रण कर हथियार और गोला-बारूद अपने साथ ले लिए। गौरतलब है कि बीएलए ने इन हमलों में अपने पाँच लड़ाकों के मारे जाने की भी पुष्टि की।

आगे क्या होगा

पाकिस्तानी सेना और सरकार की ओर से इन दावों पर अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। बलूचिस्तान में सक्रिय सशस्त्र समूहों द्वारा किए गए दावों की स्वतंत्र पुष्टि अत्यंत कठिन होती है, क्योंकि क्षेत्र में मीडिया की पहुँच सीमित है। विशेषज्ञों का मानना है कि CPEC और रेको दिक जैसी आर्थिक परियोजनाओं को निशाना बनाना बीएलए की रणनीति में एक नया आयाम जोड़ता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

खासकर तब जब CPEC और रेको दिक जैसी अरबों डॉलर की परियोजनाएँ सीधे निशाने पर आ रही हैं। चिंताजनक बात यह है कि क्षेत्र में मीडिया की पहुँच इतनी सीमित है कि न दावों की पुष्टि होती है, न खंडन — और यह सूचना-शून्यता खुद एक नीतिगत विफलता है। पाकिस्तानी सेना की चुप्पी या तो रणनीतिक है या स्वीकारोक्ति से बचने की कोशिश; दोनों ही स्थितियाँ जवाबदेही के गंभीर सवाल उठाती हैं।
RashtraPress
17 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

बीएलए ने बलूचिस्तान में कितने हमलों का दावा किया है?
बीएलए ने 4 से 14 मई 2026 के बीच बलूचिस्तान में 18 अलग-अलग हमलों की जिम्मेदारी ली है। इनमें IED विस्फोट, घात और हाईवे नाकेबंदी शामिल हैं।
चामलांग हमले में क्या हुआ?
बीएलए के अनुसार, 13 मई को चामलांग के बाला डाक इलाके में पाकिस्तानी सेना के काफिले पर रिमोट कंट्रोल IED और भारी हथियारों से दोहरा हमला किया गया। संगठन ने दावा किया कि इसमें अधिकारी तौसीफ भट्टी सहित आठ सैनिक मारे गए।
क्या पाकिस्तान ने बीएलए के दावों की पुष्टि की है?
नहीं। पाकिस्तानी सुरक्षा बलों या सरकार की ओर से इन दावों पर अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया या खंडन सामने नहीं आया है। बलूचिस्तान में मीडिया की सीमित पहुँच के कारण स्वतंत्र सत्यापन अत्यंत कठिन है।
बीएलए ने किन आर्थिक परियोजनाओं को निशाना बनाया?
बीएलए ने दावा किया कि उसने CPEC मार्ग, रेको दिक परियोजना के वाहन और 'सियाह दिक' परियोजना से जुड़े लोगों को निशाना बनाया। दलबंदीन में क्वेटा-ताफ्तान हाईवे पर नाकेबंदी के दौरान रेको दिक का एक वाहन कब्जे में लेने का भी दावा किया गया।
बीएलए के इन हमलों का व्यापक संदर्भ क्या है?
बलूचिस्तान में बीएलए दशकों से पाकिस्तानी राज्य के खिलाफ सशस्त्र संघर्ष चला रहा है। हाल के वर्षों में संगठन ने CPEC जैसी बड़ी आर्थिक परियोजनाओं को निशाना बनाना शुरू किया है, जिसे विशेषज्ञ उसकी बदलती रणनीति का हिस्सा मानते हैं।
राष्ट्र प्रेस
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