11 अगस्त 2026
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चटगांव जेल में जुबो लीग नेता नूरुल आलम की मौत, बांग्लादेश में हिरासत मृत्यु पर बवाल

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चटगांव जेल में जुबो लीग नेता नूरुल आलम की मौत, बांग्लादेश में हिरासत मृत्यु पर बवाल

सारांश

बांग्लादेश की चटगांव जेल में जुबो लीग नेता नूरुल आलम की गिरफ्तारी के एक दिन बाद मौत ने हिरासत मृत्यु की श्रृंखला को फिर उजागर किया। अवामी लीग ने BNP सरकार पर जेलों को 'मौत के जाल' में बदलने का आरोप लगाया है और अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठन ने स्वतंत्र जाँच की माँग की है।

मुख्य बातें

जुबो लीग नेता नूरुल आलम की 25 जून 2026 को चटगांव सेंट्रल जेल में मौत हो गई।
नूरुल को 23 जून को एक्सप्लोसिव सब्सटेंस एक्ट के तहत गिरफ्तार किया गया था — गिरफ्तारी के महज एक दिन बाद मौत।
अवामी लीग ने BNP सरकार पर जेलों को 'मौत के जाल' में बदलने का आरोप लगाया।
कुछ दिन पहले एक अन्य अवामी लीग कार्यकर्ता की भी कथित तौर पर पुलिस हिरासत में यातना के बाद मौत हुई थी।
फ्रांस स्थित संगठन JMBF के संस्थापक शाहनूर इस्लाम ने स्वतंत्र जाँच और जवाबदेही की माँग की।

बांग्लादेश की चटगांव सेंट्रल जेल में 25 जून 2026 को अवामी लीग की युवा शाखा जुबो लीग के नेता नूरुल आलम की मौत हो गई, जिससे देश में सरकारी हिरासत में होने वाली मौतों को लेकर नई बहस छिड़ गई है। जेल अधिकारियों के अनुसार नूरुल अचानक बीमार पड़े और उन्हें चटगांव मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल ले जाया गया, जहाँ डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।

गिरफ्तारी से मौत तक का घटनाक्रम

बांग्लादेशी समाचार पत्र प्रोथोम अलो की रिपोर्ट के अनुसार, नूरुल आलम को 23 जून को सतकानिया पुलिस स्टेशन से गिरफ्तार किया गया था। उनके विरुद्ध 2024 में एक्सप्लोसिव सब्सटेंस एक्ट के तहत दर्ज एक मामले में यह कार्रवाई हुई थी। गिरफ्तारी के महज एक दिन बाद उनकी जेल में मौत हो जाने से परिजन और राजनीतिक दल सवाल उठा रहे हैं।

अवामी लीग का तीखा आरोप

अवामी लीग ने सत्ताधारी बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) की सरकार पर जेलों को 'मौत के जाल' में बदलने का आरोप लगाया। पार्टी ने कहा, 'जेल किसी इंसान की आखिरी मंजिल नहीं होती। जब कोई ठीक-ठाक इंसान, जिसे सरकारी कस्टडी में लिया गया हो, कुछ ही समय में मरकर वापस आता है, तो लोगों का यह सवाल करना आम बात है कि क्या यह हत्या थी।' पार्टी ने इन हालात की तुलना BNP के संस्थापक जियाउर रहमान के शासनकाल से की।

अवामी लीग ने यह भी कहा कि मुहम्मद यूनुस की पूर्व अंतरिम सरकार से लेकर वर्तमान प्रधानमंत्री तारिक रहमान के प्रशासन तक, जेलों में लगातार हो रही मौतें और अधिकारियों की चुप्पी एक 'चिंताजनक पैटर्न' को उजागर करती हैं। पार्टी ने कहा, 'गिरफ्तारी, धमकी और डर के ज़रिए विपक्ष की आवाज़ों को दबाना कभी भी लोकतंत्र की भाषा नहीं हो सकती।'

अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठन की प्रतिक्रिया

फ्रांस स्थित अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठन जस्टिस मेकर्स बांग्लादेश इन फ्रांस (JMBF) ने भी इस 'रहस्यमयी मौत' की कड़ी निंदा की। संगठन के संस्थापक एवं मानवाधिकार वकील शाहनूर इस्लाम ने कहा कि यह कोई अकेली घटना नहीं है, बल्कि यह एक निरंतर चलने वाले पैटर्न का हिस्सा है जो पिछली अंतरिम सरकार के दौर में शुरू हुआ था और मौजूदा सरकार में भी जारी है।

उन्होंने आरोप लगाया कि अवामी लीग और उससे जुड़े संगठनों के सदस्यों को मनमाने ढंग से गिरफ्तार किया जा रहा है और पुलिस व जेल हिरासत में बिना किसी जवाबदेही के उनकी मौतें हो रही हैं। इस्लाम ने कहा, 'ऐसी घटनाएँ कानून के राज, मानवाधिकार और न्याय व्यवस्था में लोगों के भरोसे को गहरी चोट पहुँचाती हैं। सरकार को इस मौत की सच्चाई सामने लानी चाहिए, दोषियों को जवाबदेह ठहराना चाहिए और पीड़ित परिवार को न्याय दिलाना चाहिए।'

व्यापक संदर्भ: बढ़ती हिरासत मौतें

यह घटना ऐसे समय में सामने आई है जब कुछ ही दिन पहले एक अन्य अवामी लीग कार्यकर्ता की कथित तौर पर पुलिस हिरासत में यातना के बाद मौत हो गई थी। गौरतलब है कि बांग्लादेश में राजनीतिक बंदियों की हिरासत में मौतें पिछले कुछ महीनों में बार-बार सुर्खियों में आई हैं, जिससे देश की जेल व्यवस्था और पुलिस जवाबदेही पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। मानवाधिकार संगठन इन मामलों में स्वतंत्र जाँच की माँग कर रहे हैं।

नूरुल की मौत के बाद अब सभी की नज़रें इस बात पर हैं कि BNP सरकार इस मामले में क्या कदम उठाती है और क्या किसी स्वतंत्र जाँच का आदेश दिया जाएगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि जेल प्रशासन की जवाबदेही के पूर्ण अभाव का प्रमाण है। जब तक कोई स्वतंत्र न्यायिक जाँच नहीं होती और दोषियों पर कार्रवाई नहीं होती, तब तक सरकारी खंडन महज औपचारिकता बनकर रह जाएगा। बांग्लादेश में लोकतंत्र की विश्वसनीयता इस बात पर निर्भर करती है कि सत्तापक्ष विपक्षी बंदियों के साथ भी कानून का समान व्यवहार सुनिश्चित करे।
RashtraPress
11 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

नूरुल आलम कौन थे और उनकी मौत कैसे हुई?
नूरुल आलम अवामी लीग की युवा शाखा जुबो लीग के नेता थे। उन्हें 23 जून 2026 को सतकानिया पुलिस स्टेशन से गिरफ्तार किया गया और 25 जून को चटगांव सेंट्रल जेल में बीमार पड़ने के बाद चटगांव मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल में उन्हें मृत घोषित किया गया।
अवामी लीग ने BNP सरकार पर क्या आरोप लगाए हैं?
अवामी लीग ने BNP सरकार पर बांग्लादेश की जेलों को 'मौत के जाल' में बदलने का आरोप लगाया है। पार्टी का कहना है कि विपक्षी नेताओं और कार्यकर्ताओं को मनमाने ढंग से गिरफ्तार किया जा रहा है और हिरासत में उनकी मौतें हो रही हैं।
क्या बांग्लादेश में इससे पहले भी ऐसी हिरासत मौतें हुई हैं?
हाँ, नूरुल की मौत से कुछ ही दिन पहले एक अन्य अवामी लीग कार्यकर्ता की कथित तौर पर पुलिस हिरासत में यातना के बाद मौत हुई थी। मानवाधिकार संगठनों के अनुसार यह एक निरंतर पैटर्न है जो पूर्व अंतरिम सरकार के दौर से चला आ रहा है।
JMBF ने इस मामले में क्या माँग की है?
फ्रांस स्थित संगठन जस्टिस मेकर्स बांग्लादेश इन फ्रांस (JMBF) के संस्थापक शाहनूर इस्लाम ने माँग की है कि सरकार मौत की सच्चाई का पता लगाए, दोषियों को जवाबदेह ठहराए और पीड़ित परिवार को न्याय दिलाए।
नूरुल आलम को किस मामले में गिरफ्तार किया गया था?
नूरुल आलम को 2024 में एक्सप्लोसिव सब्सटेंस एक्ट के तहत दर्ज एक मामले में 23 जून 2026 को सतकानिया पुलिस स्टेशन द्वारा गिरफ्तार किया गया था।
राष्ट्र प्रेस
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