बोआओ फोरम पर्थ सम्मेलन: चीन के हरित विकास की विश्व नेताओं ने की सराहना
सारांश
मुख्य बातें
बोआओ फोरम का पर्थ सम्मेलन 28 जुलाई को ऑस्ट्रेलिया के पर्थ में आयोजित हुआ, जिसका केंद्रीय विषय था — 'हरित परिवर्तन: मानव और ग्रह के साझा भविष्य की ओर।' इस सम्मेलन में उपस्थित कई प्रतिनिधियों ने हरित ऊर्जा और टिकाऊ विकास के क्षेत्र में चीन की उपलब्धियों को वैश्विक मॉडल के रूप में रेखांकित किया।
प्रमुख वक्ताओं की राय
ऑस्ट्रेलिया की टीम ग्लोबल एक्सप्रेस की सीईओ क्रिस्टीन होलगेट ने कहा, 'मैं चीन की बहुत बड़ी प्रशंसक हूँ। चीन स्वच्छ ऊर्जा की दिशा में तेज़ी से आगे बढ़ रहा है।' उन्होंने यह भी बताया कि चीनी सरकार ने हरित परिवहन को प्रोत्साहन देने के लिए नई ऊर्जा वाहनों पर कर में छूट दी है और चार्जिंग बुनियादी ढाँचे में बड़े पैमाने पर निवेश किया है।
क्लाइमेट एनर्जी फाइनेंस थिंक टैंक के संस्थापक टिम बकले ने बैटरी, पवन ऊर्जा और सौर ऊर्जा के क्षेत्र में चीन की प्रगति को उल्लेखनीय बताया। वहीं, ऑस्ट्रेलियाई स्मार्ट एनर्जी काउंसिल के सीईओ डेविड मैकएल्रिया ने कहा, 'हरित अर्थव्यवस्था की दिशा में चीन का बदलाव पूरी दुनिया के लिए महत्वपूर्ण है। हमें चीन से सीखना चाहिए।'
साझेदारी पर ज़ोर
सम्मेलन में 'साझेदारी' प्रमुख विषय के रूप में उभरा। ऑस्ट्रेलिया चाइना बिजनेस काउंसिल के अध्यक्ष राइस रॉबर्ट्स ने कहा, 'हम चीनी सौर पैनल, बैटरी और वाहनों का इस्तेमाल कर रहे हैं। चीनी प्रौद्योगिकी की मदद से हम ऑस्ट्रेलिया की अर्थव्यवस्था को नई गति दे सकते हैं।'
फोर्टेस्क्यू के कार्यकारी अध्यक्ष एंड्रयू फॉरेस्ट ने खनन, इस्पात और सीमेंट जैसे उद्योगों में हरित परिवर्तन को ऑस्ट्रेलिया-चीन सहयोग के लिए सबसे संभावनाशील क्षेत्र बताया।
पूरक साझेदारी की संभावना
टिम बकले ने इस अवसर पर कहा कि ऑस्ट्रेलिया में नवीकरणीय ऊर्जा की अपार संभावनाएँ हैं, जबकि आपूर्ति श्रृंखला और बुनियादी ढाँचे के मामले में चीन को स्पष्ट बढ़त हासिल है। उनके अनुसार, दोनों देश एक-दूसरे की ताक़त का लाभ उठाते हुए एक पूरक साझेदारी विकसित कर सकते हैं।
आगे की राह
यह सम्मेलन ऐसे समय में आयोजित हुआ जब वैश्विक स्तर पर जलवायु परिवर्तन से निपटने की ज़िम्मेदारी को लेकर देशों के बीच सहयोग की माँग बढ़ रही है। गौरतलब है कि बोआओ फोरम एशिया-प्रशांत क्षेत्र में आर्थिक और नीतिगत संवाद का एक प्रमुख मंच है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस सम्मेलन से ऑस्ट्रेलिया और चीन के बीच हरित ऊर्जा सहयोग को नई दिशा मिल सकती है।