ब्रिटेन में 16 साल से कम उम्र के बच्चों पर सोशल मीडिया बैन: स्टार्मर का बड़ा फैसला, टेक कंपनियाँ नाराज़
सारांश
मुख्य बातें
ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर ने 15 जून 2026 को डाउनिंग स्ट्रीट में आयोजित प्रेस वार्ता में घोषणा की कि सरकार 16 वर्ष से कम आयु के बच्चों के लिए प्रमुख सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर प्रतिबंध लागू करने की दिशा में आगे बढ़ रही है। स्टार्मर ने इस कदम को 'देश के लिए एक बड़ा क्षण' करार दिया और स्पष्ट किया कि बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य की रक्षा के लिए तकनीकी कंपनियों के विरोध की परवाह किए बिना यह नीति लागू की जाएगी। इस प्रस्तावित बैन पर 1,16,000 से अधिक सार्वजनिक प्रतिक्रियाएँ मिली हैं, जो इसे 2012 के विवाह समानता परामर्श के बाद दूसरी सबसे बड़ी जन-प्रतिक्रिया बनाती हैं।
प्रतिबंध के दायरे में कौन-से प्लेटफॉर्म
प्रमुख ब्रिटिश दैनिक द गार्डियन के अनुसार, यह प्रस्तावित बैन टिकटॉक, इंस्टाग्राम, फेसबुक, थ्रेड्स, एक्स, यूट्यूब, स्नैपचैट और रेडिट सहित अनेक बड़े प्लेटफॉर्म्स पर लागू हो सकता है। सरकार का मानना है कि डिजिटल माध्यमों पर बढ़ता जोखिम — हानिकारक सामग्री, अत्यधिक स्क्रीन टाइम और भावनात्मक दबाव — बच्चों के समग्र विकास को गंभीर रूप से प्रभावित कर रहा है।
गौरतलब है कि यह कदम ऐसे समय में आया है जब वैश्विक स्तर पर बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा को लेकर नीतिगत बहस तेज़ हो रही है। ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, ब्राज़ील और इंडोनेशिया पहले ही उम्र-आधारित प्रतिबंध या नियम लागू कर चुके हैं, जबकि फ्रांस, स्पेन, डेनमार्क, थाईलैंड और दक्षिण कोरिया इसी दिशा में विचार कर रहे हैं।
सरकार का तर्क और स्टार्मर की दलील
स्टार्मर ने प्रेस वार्ता में कहा, 'बच्चों को ऑनलाइन सुरक्षित रखना हमारे समय की सबसे बड़ी बहसों में से एक है। यह तय करने का सवाल है कि हम किसके पक्ष में हैं — देश के परिवारों के या उस मौजूदा व्यवस्था के जो काम नहीं कर रही।' उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि तकनीकी कंपनियों का विरोध इस नीति को रोक नहीं सकता, क्योंकि बच्चों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है।
यह नीति उस व्यापक सार्वजनिक चिंता की प्रतिक्रिया भी है जो परामर्श प्रक्रिया में उभरकर सामने आई। 1,16,000 से अधिक प्रतिक्रियाएँ दर्शाती हैं कि ब्रिटिश समाज में बच्चों की डिजिटल सुरक्षा को लेकर गहरी बेचैनी है।
टेक कंपनियों की आपत्तियाँ
यूट्यूब ने अपने बयान में कहा कि सभी बच्चों पर एकसमान प्रतिबंध उचित समाधान नहीं है। कंपनी के अनुसार, 'व्यापक प्रतिबंध बच्चों को उन नियंत्रित, निगरानी वाले और लाभकारी डिजिटल अनुभवों से दूर कर देंगे, जो उनके लिए सुरक्षित वातावरण प्रदान करते हैं। इसके बजाय वे गुमनाम और कम सुरक्षित सेवाओं की ओर जा सकते हैं।'
स्नैपचैट ने भी आपत्ति जताते हुए कहा, 'स्नैपचैट पर बिताया जाने वाला अधिकांश समय दोस्तों और परिवार के साथ निजी बातचीत में गुजरता है। ऐसे में किशोरों को इन रिश्तों से पूरी तरह अलग कर देने वाला प्रतिबंध उन्हें अधिक सुरक्षित नहीं बनाता, बल्कि उन्हें कम सुरक्षित प्लेटफॉर्म्स की ओर धकेल सकता है।' टेक उद्योग का सामूहिक तर्क है कि पूर्ण बैन के बजाय आयु सत्यापन, अभिभावकीय नियंत्रण, कंटेंट मॉडरेशन और डिजिटल सुरक्षा उपायों को मज़बूत करना अधिक प्रभावी विकल्प हो सकता है।
वैश्विक संदर्भ और आगे की राह
यह प्रस्ताव उस वैश्विक रुझान का हिस्सा है जिसमें सरकारें तेज़ी से बच्चों की ऑनलाइन उपस्थिति को विनियमित करने की कोशिश कर रही हैं। ब्रिटेन अगर यह बैन लागू करता है, तो वह इस मामले में यूरोप के सबसे बड़े देशों में शामिल हो जाएगा। आलोचकों का कहना है कि क्रियान्वयन की चुनौती — विशेष रूप से आयु सत्यापन की तकनीकी जटिलता — इस नीति की सबसे बड़ी परीक्षा होगी। सरकार का अगला कदम संसद में विधेयक पेश करना होगा, जिसके बाद ही यह स्पष्ट होगा कि प्रतिबंध किस रूप में और कब लागू होगा।