बलूच राजी मुची की दूसरी बरसी पर बीवाईसी ने वैश्विक अभियान का ऐलान, डिजिटल आर्काइव भी शुरू
सारांश
मुख्य बातें
मानवाधिकार संगठन बलूच यकजेहती कमेटी (बीवाईसी) ने 26 जुलाई 2026 को बलूच राजी मुची (बलूच नेशनल गैदरिंग) की दूसरी बरसी के अवसर पर एक बहुस्तरीय वैश्विक अभियान शुरू करने की घोषणा की। संगठन के अनुसार, 28 जुलाई 2024 को ग्वादर में आयोजित यह जनसमागम केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि बलूच लोगों के 'सामूहिक प्रतिरोध, राजनीतिक जागरूकता और अटूट संकल्प का प्रतीक' था।
मुख्य घटनाक्रम
बीवाईसी ने कहा कि जुलाई 2024 के उस आयोजन के दौरान बलूच लोगों को कथित तौर पर भारी सरकारी दमन का सामना करना पड़ा था। संगठन के आरोपों के अनुसार, सैन्य कार्रवाई, इंटरनेट बंदी, मनमानी गिरफ्तारियाँ, राजमार्गों की नाकाबंदी और हिंसक कार्रवाई की गई। कथित हिंसा में भारी संख्या में लोगों की मौत हुई और कई घायल हुए — हालाँकि इन आँकड़ों की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध नहीं है।
इन परिस्थितियों के बावजूद, बीवाईसी के अनुसार, हजारों बलूच पुरुष, महिलाएँ और बच्चे न्याय, सम्मान और जीवन के अधिकार की माँग को लेकर एकजुट हुए थे।
वैश्विक अभियान के उद्देश्य
बीवाईसी ने अपने बयान में स्पष्ट किया कि इस बहुस्तरीय वैश्विक अभियान के चार प्रमुख लक्ष्य हैं — जुलाई 2024 की घटनाओं का दस्तावेज़ीकरण और संरक्षण, कथित जिम्मेदार लोगों की जवाबदेही, पीड़ितों की आवाज़ को अंतरराष्ट्रीय मंच पर लाना, और सामूहिक संघर्ष को मज़बूत करना। संगठन ने आरोप लगाया कि अधिकारी 'चुप्पी और घटनाओं को मिटाने की कोशिशों' पर निर्भर हैं।
डिजिटल आर्काइव परियोजना
बीवाईसी ने एक बलूच राजी मुची स्थायी डिजिटल आर्काइव परियोजना भी शुरू की है, ताकि कथित राज्य सेंसरशिप के कारण इन घटनाओं की यादें मिटाई न जा सकें। गौरतलब है कि संगठन ने 2025 में पहली बरसी पर एक लाइव वेबिनार भी आयोजित किया था — यह दूसरी बरसी का अभियान उससे कहीं अधिक विस्तृत है।
संगठन ने प्रतिभागियों और समर्थकों से निम्नलिखित सामग्री उपलब्ध कराने की अपील की है: अनुभवों के लिखित या रिकॉर्ड किए गए विवरण, यात्रा की जानकारी, रास्ते में लगी रुकावटों और कथित सरकारी हस्तक्षेप के समय व स्थान, प्रत्यक्षदर्शियों के बयान, ग्वादर में जुटी भीड़ की तस्वीरें, स्थानीय और अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्ट, मानवाधिकार संगठनों की रिपोर्ट तथा अदालती दस्तावेज़।
पीड़ित परिवारों की आवाज़
बीवाईसी ने विशेष रूप से उन परिवारों की व्यक्तिगत कहानियाँ साझा करने को कहा है जिनके परिजन कथित कार्रवाई के दौरान मारे गए, घायल हुए, गिरफ्तार किए गए या कथित रूप से लापता हुए। संगठन का कहना है कि 'यादों को सुरक्षित रखना और उन्हें मिटाए जाने का विरोध करना भी प्रतिरोध का एक रूप है।'
आगे क्या
यह अभियान ऐसे समय में शुरू हुआ है जब बलूचिस्तान में मानवाधिकार की स्थिति को लेकर अंतरराष्ट्रीय चिंताएँ लगातार बढ़ रही हैं। बीवाईसी का यह डिजिटल दस्तावेज़ीकरण प्रयास वैश्विक मानवाधिकार संगठनों और अंतरराष्ट्रीय न्यायिक मंचों तक अपनी पहुँच बनाने की दिशा में एक महत्त्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।