पाकिस्तान के कैथोलिक बिशपों ने पोप लियो XIV से मुलाकात की, ईशनिंदा कानून और जबरन धर्म परिवर्तन का मुद्दा उठाया
सारांश
मुख्य बातें
पाकिस्तान के कैथोलिक बिशपों के एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल ने वेटिकन में पोप लियो XIV से मुलाकात कर देश में ईसाई समुदाय के सामने मौजूद गंभीर चुनौतियों को उनके समक्ष रखा। 31 मई को हुई इस बैठक में तीन आर्चबिशप, चार बिशप और एक कार्डिनल शामिल थे। प्रतिनिधिमंडल ने ईशनिंदा कानूनों के कथित दुरुपयोग, संस्थागत भेदभाव और अल्पसंख्यक समुदाय की युवा लड़कियों के जबरन धर्म परिवर्तन जैसे संवेदनशील मुद्दों पर पोप का ध्यान आकृष्ट किया।
बिशप शुकार्डिन ने रखी ईसाइयों की स्थिति
पाकिस्तान काथलिक धर्माध्यक्ष सम्मेलन के अध्यक्ष और हैदराबाद के बिशप सैमसन शुकार्डिन ने पोप को पाकिस्तान में ईसाई समुदाय की वर्तमान स्थिति से विस्तार से अवगत कराया। शुकार्डिन ने कहा कि पाकिस्तान में ईसाइयों को समान अधिकार नहीं मिल रहे और उन्हें सामाजिक व प्रशासनिक दोनों स्तरों पर भेदभाव का सामना करना पड़ता है।
उन्होंने कथित तौर पर ईशनिंदा कानूनों के दुरुपयोग की बढ़ती घटनाओं और ईसाई लड़कियों के जबरन धर्म परिवर्तन तथा विवाह की समस्या को विशेष रूप से रेखांकित किया। गौरतलब है कि पाकिस्तान में अल्पसंख्यक अधिकारों से जुड़े ये मुद्दे अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों की रिपोर्टों में भी लगातार उठते रहे हैं।
पोप को पाकिस्तान आने का निमंत्रण
बैठक के दौरान बिशपों के प्रतिनिधिमंडल ने पोप लियो XIV को पाकिस्तान आने का औपचारिक निमंत्रण भी दिया। रिपोर्टों के अनुसार, पोप ने भविष्य में पाकिस्तान दौरे की इच्छा व्यक्त की और प्रतिनिधिमंडल को सकारात्मक आश्वासन दिया। हालाँकि वेटिकन की ओर से अभी तक किसी आधिकारिक यात्रा की घोषणा नहीं की गई है।
संविधान संशोधन की माँग: अल्पसंख्यक संगठनों का दबाव
इस मुलाकात से ठीक पहले, पिछले सप्ताह इस्लामाबाद में आयोजित एक प्रेस वार्ता में कई अल्पसंख्यक अधिकार संगठनों ने पाकिस्तान की संघीय सरकार से प्रस्तावित 28वें संविधान संशोधन विधेयक के तहत धार्मिक अल्पसंख्यकों, महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा को मजबूत करने की माँग की। अल्पसंख्यक गठबंधन पाकिस्तान (MAP) सहित अन्य संगठनों के नेताओं ने राजनीतिक प्रतिनिधित्व, धार्मिक स्वतंत्रता और बाल संरक्षण से जुड़े संवैधानिक प्रावधानों में बदलाव का प्रस्ताव रखा।
MAP के अध्यक्ष अकमल भट्टी ने कहा कि मौजूदा संवैधानिक प्रावधान गैर-मुस्लिम नागरिकों को राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री जैसे शीर्ष पदों तक पहुँचने से रोकते हैं, जबकि अल्पसंख्यकों को प्रत्यक्ष लोकतांत्रिक प्रतिनिधित्व भी नहीं मिलता।
बाल धर्म परिवर्तन पर रोक और प्रत्यक्ष चुनाव की माँग
प्रस्तावों में 18 वर्ष से कम आयु के बच्चों के धर्म परिवर्तन पर पूर्ण रोक लगाने की माँग की गई है। सुझाव दिया गया है कि किसी भी धर्म परिवर्तन को न्यायिक मजिस्ट्रेट के समक्ष स्वतंत्र और सूचित सहमति दर्ज होने तक कानूनी मान्यता न दी जाए।
भट्टी ने संविधान के अनुच्छेद 51 और 106 में संशोधन कर राष्ट्रीय विधानसभा और प्रांतीय विधानसभाओं में गैर-मुस्लिमों तथा महिलाओं के लिए आरक्षित सीटों पर प्रत्यक्ष चुनाव कराने की भी माँग की। उन्होंने संसदीय संवैधानिक सुधार समिति से अल्पसंख्यक समुदायों, कानूनी विशेषज्ञों और नागरिक समाज संगठनों के साथ व्यापक परामर्श के बाद ही अंतिम संशोधन पैकेज तैयार करने का आग्रह किया।
आगे क्या
यह बैठक ऐसे समय में हुई है जब पाकिस्तान में अल्पसंख्यक अधिकारों का मुद्दा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ती चर्चा का विषय बना हुआ है। वेटिकन की संभावित यात्रा और प्रस्तावित संवैधानिक सुधारों पर पाकिस्तान सरकार की प्रतिक्रिया आने वाले हफ्तों में इस मसले की दिशा तय करेगी।