चीन के ए-स्तरीय पर्यटन स्थलों पर 2025 में 7.51 अरब पर्यटक, 554.49 अरब युआन का राजस्व
सारांश
मुख्य बातें
चीन के संस्कृति एवं पर्यटन मंत्रालय ने मंगलवार को जारी 2025 की सांख्यिकी विज्ञप्ति में बताया कि वर्ष के अंत तक देश भर में 16,994 ए-स्तरीय दर्शनीय स्थल सक्रिय थे, जहाँ पूरे वर्ष में 7.51 अरब पर्यटक पहुँचे और 554.49 अरब युआन का पर्यटन राजस्व अर्जित हुआ। इन स्थलों पर 17.39 लाख लोगों को प्रत्यक्ष रोज़गार मिल रहा है, जो चीन के पर्यटन क्षेत्र की महामारी-उपरांत मज़बूत वापसी का संकेत देता है।
मुख्य आँकड़े एक नज़र में
विज्ञप्ति के अनुसार, ए-स्तरीय दर्शनीय स्थलों की संख्या और उनसे जुड़ा राजस्व, दोनों ही देश के सांस्कृतिक-पर्यटन एकीकरण की गति को दर्शाते हैं। मंत्रालय ने इन आँकड़ों को “14वीं पंचवर्षीय योजना” (2021-2025) के समापन वर्ष के प्रमुख संकेतकों के रूप में प्रस्तुत किया है।
कला, प्रदर्शन और दर्शक
संस्कृति एवं पर्यटन विभागों से संबद्ध 1,879 कला प्रदर्शन समूहों ने पूरे वर्ष में कुल 3,92,000 प्रदर्शन आयोजित किए, जो 2024 की तुलना में 1.8 प्रतिशत अधिक हैं। घरेलू दर्शकों की संख्या 31 करोड़ तक पहुँची, जो पिछले वर्ष से 2.4 प्रतिशत अधिक है।
देश भर में 740 सार्वजनिक कला संग्रहालयों में 11,000 प्रदर्शनियाँ आयोजित हुईं (+2.7%), और इन्हें देखने 788.6 लाख आगंतुक पहुँचे — पिछले वर्ष की तुलना में 9.4 प्रतिशत की वृद्धि। इसके अतिरिक्त 3,253 सार्वजनिक पुस्तकालय और 44,000 जन सांस्कृतिक संस्थान सक्रिय बताए गए।
अमूर्त सांस्कृतिक विरासत का विस्तार
राष्ट्रीय स्तर पर 1,557 प्रतिनिधि अमूर्त सांस्कृतिक विरासत वस्तुएँ और 3,994 राष्ट्रीय उत्तराधिकारी दर्ज किए गए। 2,388 संरक्षण संस्थानों में काम कर रहे 17,000 कर्मियों ने वर्षभर में 82,000 प्रदर्शन (+3%), 21,000 लोक गतिविधियाँ (+0.2%) और 23,000 प्रदर्शनियाँ (+4.8%) आयोजित कीं।
क्यों मायने रखते हैं ये आँकड़े
आंकड़ों के अनुसार, 2025 में चीन में सांस्कृतिक गतिविधियाँ अधिक समृद्ध हुईं, सांस्कृतिक उद्योग में निरंतर वृद्धि दर्ज की गई और संस्कृति-पर्यटन का एकीकरण और गहराया। मंत्रालय का दावा है कि “14वीं पंचवर्षीय योजना” के लक्ष्य कुशलतापूर्वक प्राप्त किए गए, जिससे आर्थिक एवं सामाजिक विकास को नई गति मिली।
आगे क्या
विश्लेषकों के अनुसार, 2026 से शुरू होने वाली अगली पंचवर्षीय योजना में चीन के सांस्कृतिक-पर्यटन ढाँचे का अंतरराष्ट्रीय विस्तार और डिजिटल-पर्यटन एकीकरण प्रमुख केंद्र-बिंदु रहने की संभावना है।