चीनी नौसेना के युद्धपोत सुराबाया पहुंचे, इंडोनेशिया में चार दिवसीय मैत्रीपूर्ण यात्रा शुरू
सारांश
मुख्य बातें
चीनी पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) नौसेना के युद्धपोत छीचीकुआंग (जहाज संख्या 83) और खुनलुनशान से बना जहाजी बेड़ा 2 अगस्त 2026 की सुबह इंडोनेशिया के सुराबाया स्थित तंजुंग पेराक बंदरगाह पर लंगर डाल गया। यह बेड़ा दूर समुद्री क्षेत्रों में व्यापक प्रशिक्षण और मैत्रीपूर्ण यात्रा के संयुक्त मिशन के तहत रवाना हुआ है और इंडोनेशिया में चार दिन रुकेगा। यह यात्रा चीन-इंडोनेशिया नौसैनिक संबंधों को और प्रगाढ़ करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
बंदरगाह पर भव्य स्वागत
बेड़े के तंजुंग पेराक बंदरगाह पहुंचने पर सुराबाया स्थित चीनी महावाणिज्य दूतावास के अधिकारियों, इंडोनेशियाई नौसेना के प्रतिनिधियों, स्थानीय चीनी समुदाय तथा चीनी उद्यमों के प्रतिनिधियों और छात्रों ने गर्मजोशी से स्वागत किया। बंदरगाह पर उत्साह का माहौल था और दोनों देशों के बीच मजबूत होते समुद्री संबंधों की झलक साफ दिखी।
मुख्य गतिविधियाँ और कार्यक्रम
यात्रा के दौरान दोनों देशों के नौसेना अधिकारी एक-दूसरे के जहाजों का दौरा करेंगे और खेल प्रतियोगिताओं सहित कई मैत्रीपूर्ण गतिविधियों में भाग लेंगे। इसके अलावा, चीनी नौसेना बेड़े की ओर से एक विशेष डेक रिसेप्शन का भी आयोजन किया जाएगा, जिसमें इंडोनेशियाई सैन्य अधिकारियों, स्थानीय नागरिकों और चीनी समुदाय के लोगों को युद्धपोत देखने का अवसर मिलेगा।
बेड़े के अधिकारी की प्रतिक्रिया
बेड़े के अधिकारी कुओ पाइश्योंग ने कहा, 'जब मैं विदेशी बंदरगाह पर खड़े होकर दूसरे देश के नजारे देख रहा था, तो मुझे महसूस हुआ कि हमारा युद्धपोत केवल समुद्र में चलने वाला जहाज नहीं है, बल्कि शांति और मित्रता का संदेश पहुंचाने वाला एक पुल भी है।' उन्होंने आगे कहा कि इस लंबी समुद्री यात्रा ने उनके पेशेवर कौशल को निखारा है और उन्हें चीनी नौसेना की खुली तथा समावेशी वैश्विक भूमिका को करीब से समझने का अवसर दिया है।
छात्रों पर असर
इंडोनेशिया में अध्ययनरत चीनी छात्र छन शिंगचुओ ने बताया कि पहली बार किसी युद्धपोत पर चढ़ना उनके लिए गर्व और उत्साह से भरा अनुभव था। उन्होंने कहा कि इस अवसर ने उन्हें अपने देश की शक्ति को प्रत्यक्ष रूप से महसूस करने का मौका दिया।
आगे क्या होगा
यात्रा के समापन के बाद दोनों देशों की नौसेनाएं संयुक्त समुद्री अभ्यास भी आयोजित करेंगी। यह ऐसे समय में आया है जब दक्षिण-पूर्व एशिया में चीन अपनी नौसैनिक उपस्थिति और द्विपक्षीय रक्षा संबंधों को व्यापक रूप से विस्तार दे रहा है। गौरतलब है कि इस तरह की मैत्रीपूर्ण यात्राएं चीन की 'समुद्री कूटनीति' का अहम हिस्सा रही हैं।